मतदान से 9 दिन पहले केंद्र सरकार ने MSP को लेकर उठाया ये बड़ा कदम, जानिए इसके सियासी मायने

लखनऊ, 1 फरवरी: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को सदन में केंद्रीय बजट पेश किया। बजट में बताया गया कि इस बार MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) सीधे किसानों के खातों में भेजी जाएगी। सीतारमण की इस घोषणा के बाद अब सवाल उठने लगे हैं कि क्या यूपी में चुनाव से पहले केंद्र सरकार किसानों को साधकर किसान आंदोलन से हुई नाराजगी दूर करना चाहती है। राजनीतिक विश्लेषकों और कृषि विशेषज्ञों की माने तो ये ऐलान पांच राज्यों में होने वाले चुनाव को देखते हुए किया गया है। खासतौर से किसानों की नाराजगी दूर करने के लिए यूपी के लभग 2.81 करोड़ किसान मतदाताओं को साधने का प्लान तैयार किया गया है।

पश्चिम में किसानों को साधने की कवायद

पश्चिम में किसानों को साधने की कवायद

दरअसल पिछले एक साल से किसान आंदोलन यूपी समेत कई राज्यों में फैला हुआ था। मोदी सरकार ने हाल ही में तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा कर किसानों की नाराजगी दूर करने का प्रयास किया था लेकिन चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी को यह लगने लगा था कि केंद्र सरकार की इस घोषणा का जमीनी स्तर पर कोई खास असर नहीं दिख रहा है। किसानों खासतौर से जाटों में नाराजगी अभी भी कायम है। एमएसपी को लेकर किसान नेता पहले भी केंद्र सरकार को घेर चुके हैं। दरअसल यूपी में किसान पोर्टल पर यूपी में 2 करोड़ 81 लाख 44 हजार किसान रजिस्टर्ड हैं। इसमें पश्चिमी यूपी के किसान ज्यादा हैं जिससे योगी सरकार की नींद उड़ी हुई थी।

मतदान से 9 दिन पहले केंद्र ने उठाया ये कदम

मतदान से 9 दिन पहले केंद्र ने उठाया ये कदम

पहले चरण का मतदान दस फरवरी को ही होना है यानी महज 9 दिन बचे हुए हैं। पहले चरण की 58 सीटों का मतदान यूपी में आगे काफी असर डालेगा इस बात को ध्यान में रखते हुए मोदी सरकार का ये दांव गेमचेंजर साबित हो सकता है। इसका दूसरा पहलू यह भी है कि पश्चिमी यूपी में पिछले एक पखवाड़े में दर्जनभर से अधिक भाजपा प्रत्याशियों का अलग-अलग विरोध हो चुका है। वहीं दूसरी ओर पश्चिम यूपी में अखिलेश यादव और रालोद के जयंत चौधरी का गठबंधन भी बीजेपी को काफी नुकसान कर रहा है। पश्चिमी यूपी में पहले चरण में 28 ऐसी सीटें हैं जहां यदि सपा और रालोद के उम्मीदवार का पिछला मत मिला दिया जाए तो बीजेपी से ज्यादा साबित हो रहा है। इस परिस्थिति का तोड़ निकालने में बीजेपी जुटी हुई है।

एमएसपी गारंटी कानून लाने से क्यों डर रही सरकार

एमएसपी गारंटी कानून लाने से क्यों डर रही सरकार

वहीं केंद्र सरकार के इस कदम को भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने गुमराह करने वाला बताया है। उन्होंने कहा कि बिना एमएसपी गारंटी कानून लाए किसानों का भला नहीं हो सकता। उन्होंने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि व्यापारियों को लाभ देने के उद्देश्य से ही सरकार एमएसपी गारंटी कानून लाने से झिझक रही है। टिकैत ने कहा कि केन्द्र सरकार ने बजट में एमएसपी खाते में भेजने का जो कदम उठाया है उसका लाभ किसान नहीं बल्कि व्यापारी उठा ले जाएगा। एमएसपी गारंटी कानून लाए बिना किसानों को लाभ नहीं हो सकता। उन्होंने डिजिटल इंडिया कैंपेन का स्वागत करते हुए कहा कि किसानों को इससे जोड़ा जाए।

एमएसपी से केंद्र सरकार तय करती है फसलों की कीमत

एमएसपी से केंद्र सरकार तय करती है फसलों की कीमत

केंद्र सरकार फसलों की एक न्यूनतम कीमत तय करती है जिसे एमएसपी कहा जाता है। इससे अगर बाजार में फसल की कीमत कम भी हो जाती है। तो भी सरकार किसान को एमएसपी के हिसाब से ही फसल का भुगतान करती है। इससे किसानों को अपनी फसल की तय कीमत के बारे में पता चल जाता है। ये एक तरह से फसल की कीमत की गारंटी होती है। किसानों को अनाज वाली फसलें- धान, गेहूं, बाजरा, मक्का, ज्वार, रागी, जौ तथा दलहनी फसलें- चना, अरहर, मूंग, उड़द, मसूर, और तिलहन फसलें- सोयाबीन, सरसों, सूरजमुखी, तिल, नाइजर या काला तिल, कुसुम पर एमएसपी दी जाती है। इसके अलावा गन्ने पर भी एमएसपी दी जाती है।

क्या कहते हैं कृषि विशेषज्ञ

क्या कहते हैं कृषि विशेषज्ञ

कृषि विशेषज्ञ विवेक सचान ने बताया कि दावे और ऐलान तो हमेशा होते हैं लेकिन किसानों की आय दोगुना-तीन गुना करने की बातें पूरी नहीं हो पा रही हैं। किसानों को सीधे एमएसपी देने की घोषणा को समझे तो यूपी में दर्ज दो करोड़ 81 लाख में केवल 6% ही एमएसपी का लाभ पा सकेंगे। अगर सरकार एमएसपी पर खरीद करवा पाएगी, तभी ये संभव है। हालांकि जब भी बजट का समय आता है तब कहीं न कहीं चुनाव होते ही हैं और इसका चुनावी लाभ लेने का हमेशा ही प्रयास किया जाता है।

बजट में किसानों की झोली में आईं कई योजनाएं

बजट में किसानों की झोली में आईं कई योजनाएं

केन-बेतवा नदी जोड़ने की परियोजना 44,000 करोड़ की लागत से शुरू की जाएगी। इसके अलावा किसानों को डिजिटल और हाईटेक सेवाएं प्रदान करने के लिए पीपीपी मॉडल में योजना की शुरुआत होगी। नाबार्ड से किसानों के लिए फंड की सुविधा दी जाएगी। स्टार्टअप एफपीओ को सपोर्ट करके किसानों को हाईटेक बनाया जाएगा और किसानों को डिजिटल सेवा दी जाएगी। कृषि में ड्रोन को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही 100 गति शक्ति कार्गो टर्मिनल बनाए जाएंगे।

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