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'200% फाइनल है'.....2022 के यूपी चुनाव के बाद भाजपा के साथ गठबंधन पर क्या बोली बसपा

लखनऊ, 13 सितंबर: यूपी में बहुजन समाज पार्टी तीन-तीन बार भाजपा के समर्थन से सरकार बना चुकी है। इसलिए इसबार भी बसपा विरोधी पार्टियां यह दावा कर रही हैं कि चुनावों के बाद मायावती की पार्टी फिर से बीजेपी के साथ गठबंधन कर सकती है। लेकिन, बीएसपी का दावा है कि वह अपने दम पर पूर्ण बहुमत की सरकार बना लेगी। यही नहीं पार्टी के महासचिव सतीश मिश्रा ने दावा किया है कि अगर सरकार बनाने लायक सीटें नहीं मिलीं तो उनकी पार्टी विपक्ष में बैठना पसंद करेगी, लेकिन ना ही किसी भी पार्टी को समर्थन देगी और ना ही किसी से समर्थन लेगी। गौरतलब है कि इसबार भी मायावती की पार्टी अपने 2007 के चुनावी फॉर्मूले के तहत दलित-ब्राह्मण वोटों की गोलबंदी में लगी हुई है और जगह-जगह ब्राह्मण सम्मेलन करवा रही है।

किसी भी दल के साथ गठबंधन नहीं करेगी बसपा- मिश्रा

किसी भी दल के साथ गठबंधन नहीं करेगी बसपा- मिश्रा

बसपा के वरिष्ठ नेता और पार्टी सुप्रीमो मायावती के खास सतीश चंद्र मिश्रा ने सोमवार को उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में बीजेपी के साथ किसी भी तरह के चुनाव के बाद गठबंधन की संभावनाओं को सिरे से खारिज कर दिया है। वैसे उनका दावा है कि उनकी पार्टी स्पष्ट बहुमत से सरकार बनाएगी। बसपा महासचिव ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में यह भी साफ कर दिया है कि बहुजन समाज पार्टी इस चुनाव में किसी भी दल के साथ गठबंधन नहीं करेगी। वे बोले, 'हम ना तो किसी भी दूसरी पार्टी के साथ गठबंधन करेंगे और ना ही समर्थन लेंगे। हम विपक्ष में बैठना पसंद करेंगे।'

'200% फाइनल है, बीजेपी के साथ नहीं जाएंगे'

'200% फाइनल है, बीजेपी के साथ नहीं जाएंगे'

इस दौरान त्रिशंकू विधानसभा बनने की स्थिति में बीएसपी के फिर से बीजेपी के साथ हाथ मिलाने को लेकर जारी अटकलों के बारे में सतीश मिश्रा ने साफ कर दिया कि इसकी कोई संभावना नहीं है। वे बोले, '2022 में बीएसपी पूर्ण बहुमत की सरकार बना रही है। अगर चुनावों के बाद कोई दूसरी परिस्थिति पैदा होती है, हम बीजेपी के साथ कभी नहीं जाएंगे और यह 200% फाइनल है।' गौरतलब है कि बसपा उत्तर प्रदेश में पहले भाजपा और सपा दोनों दलों के साथ अलग-अलग मौके पर सरकारें बना चुकी है।

दलित-ब्राह्मण गठजोड़ की कोशिश में जुटी है बसपा

दलित-ब्राह्मण गठजोड़ की कोशिश में जुटी है बसपा

गौरतलब है कि 1993 में मायावती की पार्टी ने सपा के मुलायम सिंह यादव की अगुवाई वाली सरकार को समर्थन दिया था। लेकिन, 1995 में उसने समर्थन वापस ले लिया और कुछ महीनों के लिए भाजपा के समर्थन से सरकार बनाई थी और मायावती सीएम बन गई थीं। 1997 और 2002 में भी बीएसपी ने बीजेपी के सहयोग से सरकार बनाया था। लेकिन, 2007 में पार्टी ने दलित-ब्राह्मण मतदाताओं का नारा (ब्राह्मण शंख बजाएगा, हाथी बढ़ता जाएगा) बुलंद करके 403 में से 206 सीटें जीत ली थी और पहलीबार अपने दम पर सरकार बनाई थी। बीएसपी इसबार भी वही दलित-ब्राह्मण प्रयोग करना चाह रही है और पूरे प्रदेश में 'ब्राह्मण सम्मेलन' आयोजित करवा रही है।

यूपी के 80% ब्राह्मण हमारे साथ- बीएसपी

यूपी के 80% ब्राह्मण हमारे साथ- बीएसपी

उत्तर प्रदेश में दलितों की आबादी 20% अनुमानित है और ब्राह्मणों की जनसंख्या 13% बताई जाती है। खुद सतीश मिश्रा पार्टी के सबसे बड़े चेहरा हैं। उनका कहना है कि ब्राह्मण सम्मेलन का ट्रेंड उनकी पार्टी ने शुरू किया और अब सभी पार्टियां वैसा ही करने की कोशिश कर रही हैं। लेकिन, उनका दावा है कि '80% ब्राह्मण हमारे साथ हैं। सिर्फ वही ब्राह्मण जो किसी दूसरी पार्टी के पदाधिकारी हैं या खुद चुनाव लड़ रहे हैं वही बीएसपी के साथ नहीं हैं और ये सभी पार्टियां इन सम्मेलन कार्यक्रमों के जरिए आपस में लड़ रही हैं।'

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