1.5 लाख RSS स्वयं सेवकों पर जाटों का दिल जितने की जिम्मेदारी, पश्चिमी यूपी में आगे की रणनीति जानिए
आरएसएस ने ही 'पहले मतदान, फिर जलपान' का नारा दिया था। संघ की योजना ये भी है कि वह मतदान के दिन भी लोगों से अधिक से अधिक मतदान करने को कहने पर जोर देगा। लोग घरों से बूथ तक पहुंचें इसको लेकर भी संघ कार्य कर सकता है। इसपर भी विचार चल रहा है-सूत्र
लखनऊ, 3 फरवरी: राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ जमीनी स्तर पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल हमेशा से चुनावों के दौरान करता रहा है। मतदाताओं के बीच जाकर ज्यादा से ज्यादा मतदान करने के लिए उन्हें प्रेरित करने की कोशिश संघ ने हमेशा से की है और अक्सर बीजेपी को इसका फायदा मिला है। लेकिन, पश्चिमी यूपी में इस बार संघ के सामने चुनौती गंभीर है, क्योंकि सपा-रालोद गठबंधन किसान आंदोलन की वजह से भाजपा के जाट वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश में है। इसके लिए आरएसएस इस बार पश्चिमी यूपी में कम से कम 1.5 लाख स्वयं सेवकों को उतार चुका है, जो घर-घर जाकर मतदाता जागरूकता अभियान चला रहे हैं। हालांकि, वह किसी पार्टी का नाम नहीं ले रहे हैं, लेकिन उनकी ओर से जो मुद्दे उठाए जा रहे हैं, वह बीजेपी के एजेंडे से मेल खाते हैं।

पश्चिमी यूपी में आरएसएस का मतदाता जागरूकता अभियान
उत्तर प्रदेश में किसान आंदोलन की वजह से जाटों के एक वर्ग में भाजपा के खिलाफ नाराजगी को दूर करने के लिए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ अपने स्तर पर कार्य करने में जुटा है। हालांकि, संघ के स्वयं सेवक लगभग हर चुनाव में जमीनी स्तर पर सक्रिय रहते हैं। धरातल पर काम करने की वजह से आरएसएस के स्वयं सेवक मतदाताओं का मूड भांपने में भी माहिर माने जाते हैं। इस बार पश्चिमी यूपी में जाटों की नाराजगी की बात कही जा रही है और इसलिए उनका दिल जीतने के लिए आरएसएस गंभीरता से कोशिश कर रहा है। टीओआई की एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि संघ के स्वयं सेवक शांति से जमीन पर कार्य कर रहे हैं, जिसका लक्ष्य 'समाज के सदस्यों को वापस लाना है, जो किसान आंदोलन के बाद से बीजेपी अलग हो चुके हैं।' जब विधानसभा चुनाव की तारीखों की भी घोषणा नहीं हुई थी, आरएसएस ने जाट समाज के पदाधिकारियों को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इस काम में लगा दिया था।

1,50,000 स्वयं सेवक घर-घर जाकर चला रहे हैं अभियान
संघ के पदाधिकारियों के अलावा कम से कम 1.5 लाख स्वयं सेवक भी घर-घर जाकर मतदाताओं को जागरूक करने के अपने अभियान में लगे हुए हैं। ये स्वयं सेवक वोटरों को पर्चे दे रहे हैं, जिसमें कुछ खास बातों पर जोर दिया गया है। इसमें किसी भी पार्टी का नाम नहीं लिया जा रहा है, लेकिन मतदाताओं से कहा जा रहा है कि 'उस पार्टी को वोट दें, जो गौ रक्षा को बढ़ावा देती है, जो दंगाइयों के खिलाफ कार्रवाई करती है और जो राष्ट्रवाद को बढ़ावा देती है।' संघ ने अपने सुविधानुसार अपने प्रशासनिक क्षेत्र बनाए हुए हैं। मसलन मेरठ प्रांत (क्षेत्र) में मेरठ, सहारनपुर और मुरादाबाद के 14 जिले शामिल हैं। इन जिलों में करीब 196 कस्बे और 10,580 गांव आते हैं; और स्वयं सेवक हर जगह पहुंचने के लिए प्रयासरत हैं।

पश्चिमी यूपी की 71 सीटों के लिए है खास रणनीति
मेरठ क्षेत्र में पहले आरएसएस के 2,900 से ज्यादा शाखा लगते थे। लेकिन, जब से 2013 का मुजफ्फरनगर दंगा हुआ है, 600 से ज्यादा और शाखा लगने लगे हैं। चुनाव के जानकारों के मुताबिक मेरठ क्षेत्र में 71 विधानसभा क्षेत्र आते हैं। जिनमें से मोटे तौर पर 47 सीटों को जाट वोटर प्रभावित कर सकते हैं। 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में बीजेपी इस इलाके की 52 सीटें जीती थी। इस बार रालोद के भरोसे समाजवादी पार्टी उसका यही किला ध्वस्त करना चाहती है।

मताधिकार का इस्तेमाल करने पर जोर
अपने अभियान के बारे में संघ के मेरठ प्रांत के बौद्धिक प्रमुख (संघ के विद्वत शाखा के प्रमुख) कृष्ण कुमार ने कहा, 'हमारे अभियान का नाम मतदाता जागरूकता अभियान है, जो पूरी तरह से अराजनीतिक है। हम घर-घर जाकर समाज के सभी वर्गों से संपर्क कर रहे हैं और उनसे मताधिकार का प्रयोग करने के लिए कह रहे हैं। आमतौर पर करीब 35 फीसदी मतदाता अपने मताधिकार का उपयोग नहीं करते। अगर वे अपने अधिकारों को उपयोग करेंगे, तो इससे लोकतंत्र और मजबूत होगा। इसी के लिए हजारों लोग विभिन्न जिलों में उन्हें समझाने के लिए काम कर रहे हैं।'

पश्चिमी यूपी में आरएसएस की आगे की रणनीति
पश्चिमी यूपी में आरएसएस की इस रणनीति के बारे में वन इंडिया ने दशकों से संघ जुड़े रहे और इस समय पश्चिमी यूपी में सक्रिय भाजपा के एक वरिष्ठ पदाधिकारी से बातचीत की है। उन्होंने अपना नाम नहीं बताने की शर्त पर हमसे कहा है, "संघ ने ही 'पहले मतदान, फिर जलपान' का नारा दिया था। संघ की योजना ये भी है कि वह मतदान के दिन भी लोगों से अधिक से अधिक मतदान करने को कहने पर जोर देगा। लोग घरों से बूथ तक पहुंचें इसको लेकर भी संघ कार्य कर सकता है। इसपर भी विचार चल रहा है और आगे देखिए क्या होता है।" इसको लेकर कृष्ण कुमार भी कह चुके हैं कि 'विधानसभा और लोकसभा क्षेत्रों में कोऑर्डिनेटर बनाए गए हैं और 10-10 सदस्यों की टीम गठित की गई है, जो बूथ स्तर पर काम कर रही है। बिना किसी राजनीतिक पार्टी का नाम लिए, हमने कई बातों को प्रमुखता से रखा है।' (तस्वीरें-सांकेतिक)













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