Bandhavgarh Tiger Reserve : फिर बाघ से लड़ाई में तेंदुए की मौत, एक सप्ताह के अंदर 3 शावकों की मौत
Bandhavgarh Tiger Reserve : बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में तेंदुए की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। आज फिर पनपथा कोर में एक और मादा तेंदुए की मृत्यु हो गई है। हर बार की तरह इस बार भी यही सफाई दी जा रहा है कि तेंदुए की मौत बाघ के हमले में हुई है। इसी सप्ताह 21 नवम्बर को यहीं तेंदुए के 2 शावकों की मौत हो गई थी। मरने वाले शावकों की मां मादा तेंदुए की सुराग अभी तक नहीं हो पाई है। इसी बीच 26 नवंबर को 1 और तेंदुए का शव जंगल में मिल गया। चंसुरा के पास तेंदुए का शव मिलने के बाद वन विभाग मैं हड़कंप मचा गया और सतर्क होते हुए अधिकारी मौके पर पहुंच गए।
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संघर्ष में मादा तेंदुए को लगी गंभीर चोटें
बताया जा रहा है बाघ के साथ लड़ाई में मादा तेंदुए के रीढ़ की हड्ढी टूट गई थी। शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोट भी लगी थी। यही कारण है कि उसकी मौत हो गई। बताया गया है कि बाघ के साथ लड़ाई में मादा तेंदुए के शरीर से काफी सारा रक्त भी बह गया था जिसके कारण उसकी जान नहीं बच सकी। यह जानकारी भी सामने आ रही है कि संघर्ष के बाद काफी टाइम तक तेंदुए के बारे में वन विभाग के जिम्मेदारों को सूचना ही नहीं लगी जिससे उसकी जान चली गई। लोग यह भी कह रहे हैं कि टाइगर रिजर्व क्षेत्र में गश्त बिल्कुल नहीं हो रही है जिसके कारण इस तरह के मामले आए दिन सामने आ रहे हैं, यही कारण है कि अधिकारियों को जानकारी देरी से मिलती है।
भूख से हुई थी 2 शावकों की मौत
इसी सप्ताह के पहले दिन सोमवार को बांधवगढ टाइगर रिजर्व में तेंदुए के 2 शावकों की मौत होने की घटना सामने आया थी। इस बारे में यह जिम्मेदारों के तरफ से सफाई दी गई थी कि दोनों शावकों की मौत भूख और प्यास की वजह से हुई थी। पार्क प्रबंधन ने बताया था कि 1 शावक पहले ही मर गया था जबकि दूसरा भूख प्यास से तड़प रहा था, जिसे उठाकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया और उसके इलाज की व्यवस्था भी की गई लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका।













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