Nagpanchami 2021: साल में सिर्फ एक दिन खुलते हैं इस मंदिर के पट, आज हो रही है नागराज की पूजा
उज्जैन। हिंदुस्तान में हिंदू मजहब के अनुयायियों में आज नागपंचमी का पर्व मनाया जा रहा है। नागपंचमी को श्रावण शुक्ल पंचमी भी कहा जाता है। इस दिन नागों की पूजा होती है। नागों की पूजा करने के लिए यूं तो देश में अनेकों मंदिर हैं। मगर, मध्य प्रदेश में महाकाल की नगरी कहे जाने वाले उज्जैन जैसा मंदिर कहीं नहीं हैं। उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर के तीसरे तल पर नागचंद्रेश्वर मंदिर स्थित है। यह मंदिर साल में केवल नागपंचमी के पर्व पर खुलता है।
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नागचंद्रेश्वर मंदिर के बारे में मान्यता है कि, यहां नागराज तक्षक विराजमान हैं। नागपंचमी के दिन यानी कि आज इसमें उनकी पूजा हो रही है। पुजारियों का दावा है कि, यह विश्व का एक मात्र ऐसा मंदिर है, जहां भगवान विष्णु नहीं, बाबा महाकाल का परिवार शेषनाग पर विराजमान है। बाबा महाकाल ही एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है, जिनके शिखर भाग पर 11वीं शताब्दी की महाकालेश्वर परिवार संग शेष नागचंद्रेश्वर की अद्भुत प्रतिमा है। इस मंदिर की यह रोचक भी बात है कि, जहां धर्मग्रंथों में उल्लेख है कि शेषनाग पर सिर्फ विष्णु विराजमान होते हैं, लेकिन महाकाल के मंदिर में चांदी के शेषनाग पर शिव परिवार विराजमान है।
एक पुजारी ने कहा कि, उज्जैन के सिवाए ऐसी प्रतिमा दुनिया में कहीं और नहीं है। उन्होंने बताया कि, यह प्रतिमा नेपाल से लाई गई थी। मंदिर में स्थापित इस प्रतिमा में शिवजी, पार्वती और उनके पुत्र गणेश तीनों प्रतिष्ठित हैं। पुजारी ने यह भी कहा कि, इस मंदिर के पट नागपंचमी के पर्व पर रात के 12 बजे तक खुले रहते हैं और उसके बाद एक साल के लिए फिर से बंद हो जाते हैं।
उन्होंने कहा कि, यह परम्परा राजाओं के समय से शुरू हुई थी और आज तक चली आ रही है। यहां 11वीं शताब्दी में नागचंद्रेश्वर की दुर्लभ प्रतिमा स्थापित होने पर बड़ी संख्या में भक्त पूजा करने आते रहे हैं।












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