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Maharana Pratap Jayanti : क्या वाकई महाराणा प्रताप के कवच, भाला व तलवार का वजन 200 KG था?

उदयपुर, 2 जून। इसमें कोई शक नहीं कि महाराणा प्रताप इस युग के सबसे बहादुर राजपूत शासक थे। वीरता और दृढ़ता की मिसाल महाराणा प्रताप को मुगल बादशाह अकबर की गुलामी पसंद नहीं थी। उन्होंने मुगलों को कईं युद्धों धूल भी चटाई। राजस्थान के कुम्भलगढ़ दुर्ग में 9 मई 1540 को जन्मे महाराणा प्रताप ने उदयपुर जिले के चावंड में 19 जनवरी 1597 को आखिरी सांस ली।

maharana pratap

महाराणा प्रताप जयंती 2022 के मौके पर राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार ने उनके समाधिस्थल चावंड में लगभग 5 करोड़ रुपए की लागत से महाराणा प्रताप पैनोरमा बनाए जाने की घोषणा की है। महाराणा प्रताप के जन्मस्थल, उनकी कर्मभूमि एवं समाधिस्थल से जुड़े समस्त स्थानों पर राजस्थान सरकार ने मेवाड़ कॉम्प्लेक्स फेज-1 एवं फेज-2 के तहत विभिन्न कार्य करवाए हैं।

आइए जानते हैं मेवाड़ के महान योद्धा महाराणा प्रताप के जीवन से जुड़ी कुछ बातें

#1 अकबर से लड़ने के लिए चुना, हार नहीं मानी

#1 अकबर से लड़ने के लिए चुना, हार नहीं मानी

जब राजस्थान के अधिकांश राजपूत शासक अकबर के वर्चस्व के आगे झुक गए, जिसमें प्रताप के भाई शक्ति सिंह, सागर सिंह और जगमल सिंह भी शामिल थे। तब महाराणा प्रताप ने अकबर के सामने झुकने से इनकार कर दिया और अपनी मातृभूमि मेवाड़ को बचाने के लिए लड़ने का फैसला किया।

 #2 हल्दीघाटी में मुगलों की तुलना में प्रताप के पास कम सैनिक

#2 हल्दीघाटी में मुगलों की तुलना में प्रताप के पास कम सैनिक

महाराणा प्रताप की सेना ने मुगल सेना को काफी नुकसान पहुंचाया था। पहला हमला इतना शक्तिशाली था कि मुगल सेना को अपने शिविर की ओर कई किलोमीटर पीछे भागना पड़ा। प्रताप ने इस लड़ाई को अद्भुत युद्ध रणनीति के साथ लड़ा। मुगल सेना को 'हल्दीघाटी दर्रा' के नाम से जाने जाने वाले संकरे पहाड़ी दर्रे में लड़ने के लिए बनाया गया था जहाँ विशाल सेना के लिए पूरी तरह से प्रवेश करना मुश्किल था।

 #3 सिटी पैलेस संग्रहालय उदयपुर

#3 सिटी पैलेस संग्रहालय उदयपुर

महाराणा प्रताप के पास पराक्रम और दिमाग दोनों थे। उनकी ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे 35 किलो से अधिक वजन के कवच, भाला व तलवार साथ लेकर युद्ध के मैदान में लड़ते थे। कुछ लोगों का यह भी दावा है कि कवच, भाला व तलवार का कुल वजन 200 किलो से अधिक था, लेकिन सिटी पैलेस संग्रहालय उदयपुर में उल्लेखित वजन 35 किलो है।

 #4 महाराणा प्रताप की ऊंचाई 7 फीट से अधिक

#4 महाराणा प्रताप की ऊंचाई 7 फीट से अधिक

ऐसा दावा किया जाता है कि महाराणा प्रताप की ऊंचाई 7 फीट से अधिक है लेकिन इसका कोई पुख्ता प्रमाण नहीं मिलता है, लेकिन यह संभव हो सकता है। ऐसा भी कहा जाता है कि हल्दीघाटी की ऐतिहासिक लड़ाई में उन्होंने मुगल विरोधी बहलोल खान में से एक को सिर से घोड़े तक दो टुकड़ों में काट दिया था।

#5 गोगुंदा में महाराणा प्रताप का राज्याभिषेक

#5 गोगुंदा में महाराणा प्रताप का राज्याभिषेक

मेवाड़ के कुलीनों और लोगों की सिफारिशों पर 54वें मेवाड़ शासक के रूप में उनका राज्याभिषेक गोगुन्दा में किया गया था, जो अकबर के खिलाफ उनके संघर्ष के दिनों में उदयपुर से 35 किमी दूर है।

#6 हाथी पर सवार मानसिंह पर हमला

#6 हाथी पर सवार मानसिंह पर हमला

कहते हैं कि हल्दीघाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप ने घोड़े चेतक ने भी अदम्य साहस दिखाया था। चेतक पर सवार प्रताप ने हाथी पर सवार जयपुर शासक मानसिंह पर भाले से जबरदस्त हमला किया था, लेकिन मान सिंह ने झुककर हमले को टाल दिया। प्रताप के घोड़े चेतक के पैर मानसिंह के हाथी की सूंड तक पहुंच गए थे। इसके चलते चेतक का पैर हाथी की सूंड की नोक से बंधी तलवार से घायल हो गया था।

#7 झाला मान सिंह ने राणा प्रताप का रूप धारण किया

#7 झाला मान सिंह ने राणा प्रताप का रूप धारण किया

झाला मान महाराणा प्रताप के करीबी थे। उन्हें युद्ध के मैदान को छोड़ने की सलाह दी, क्योंकि उनका प्रिय घोड़ा चेतक घायल हो गया था। तब झाला मान ने अपना ताज पहना था। मुगलों ने झाला मान पर महाराणा प्रताप समझकर हमला किया था और झाला मान मारा गया था।

#8 प्रताप को कभी नहीं पकड़ पाया अकबर

#8 प्रताप को कभी नहीं पकड़ पाया अकबर

मुगल बादशाह अकबर हमेशा महाराणा प्रताप को पकड़ने की योजना बनाता था, लेकिन वह कभी सफल नहीं हो सका।

#9 मेवाड़ पर कब्जा करने की कसम खाई

#9 मेवाड़ पर कब्जा करने की कसम खाई

महाराणा प्रताप ने पूरे मेवाड़ को जीतने की कसम खाई और इसके लिए उन्होंने सभी शाही सुखों को छोड़ने का संकल्प लिया और जंगल में रहने का फैसला किया।

#10 महाराणा प्रताप का परिवार

#10 महाराणा प्रताप का परिवार

महाराणा प्रताप के पिता उदयसिंह व मां जैवंता बाई थीं। महाराणा प्रताप के महारानी अजबदे के अलावा एक दर्जन रानियाँ थीं। इनके कुल 17 बच्चे थे, जिनमें अमर सिंह व भगवान दास शामिल।

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