चार साल की मादा तेंदुआ से रिहायशी इलाके में थी दहशत, मुर्गी देखकर खाने दौड़ी तो पिंजरे में हुई कैद
सूरत। गुजरात में सूरत से कुछ किमी दूर बारडोली तहसील के जूनी कीकवाड गांव में तेंदुए की वजह से दहशत का माहौल था। लोग रास्तों में अकेले आने-जाने से डरने लगे थे। तेंदुआ छोटे जानवरों का शिकार कर गायब हो जाता था। ऐसे में वन विभाग से गुहार लगाई गई। वन विभाग की टीम ने 15 जुलाई को गांव से कुछ दूरी पर पिंजरा रखा। उस पिंजरे में एक मुर्गी रखी गई, ताकि तेंदुआ उसे देखकर पिंजरे में आ घुसे।

हफ्तेभर तक यह कोशिश कामयाब नहीं हुई। उसके बाद शुक्रवार तड़के पिंजरा देखा गया तो उसमें तेंदुआ नजर आया। बस फिर क्या था... वहां लोगों की भीड़ जुटने लगी। वनकर्मियों ने भी चैन की सांस ली। वन विभाग के एक कर्मचारी ने कहा कि, पिंजरे में कैद तेंदुआ मादा है और वह करीब 4 साल की है। उन्होंने कहा कि, पिछले काफी दिनों से इलाके में तेंदुआ दिखाई देने से ग्रामीणों में दहशत का माहौल था। गांववाले उससे छुटकारा पाना चाहते थे। ग्रामीणों ने कीकवाड गांव में सांप पकड़ने के लिए गई फ्रेंड्स ऑफ एनिमल वेल्फेयर ट्रस्ट की टीम को तेंदुए की मौजदूगी की जानकारी दी।

फ्रेंड्स ऑफ एनिमल वेल्फेयर के अगुआ जतिन राठौड़ ने फिर वन विभाग को सूचित किया कि, बारडोली तहसील के गांव में तेंदुए घूम रहे हैं। इसके लिए केतन चौधरी ने वन विभाग से पिंजरा रखने के लिए लिखित पत्र देकर भी मांग की थी। लिहाजा वन विभाग की टीम तेंदएु को काबू करने आ जुटी। वन विभाग की टीम ने 15 जुलाई को केतन चौधरी के घर के पास एक पिंजरा रख शिकार के लिए मुर्गी को छोड़ा। फिर शुक्रवार तड़के 2 बजे मुर्गी का शिकार करने आया तेंदुआ पिंजरे में कैद हो गया।
पिंजरे में तेंदुए को देखकर लोग अपने मोबाइलों से वीडियो बनाने लगे। वहीं, वनकर्मियों की टीम ने उसे पशु चिकित्सक को दिखाया। जहां जांच कराने के बाद उसे जंगल में छोड़ दिया।












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