Exclusive: 'ओलंपिक 2028 में मेडल ही लक्ष्य है,' खास बातचीत में अब्दुल्ला अबूबकर ने कही दिल की बात
मलयाली ट्रिपल जंप स्टार अब्दुल्ला अबूबकर इस बार भारत के लिए ट्रैक पर उतरे, लेकिन उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पाए। पेरिस ओलंपिक में पदक की हार और अपनी भविष्य की उम्मीदों को लेकर एथलीट ने दिल खोलकर बात की। 28 वर्षीय खिलाड़ी एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप के स्वर्ण पदक विजेता और राष्ट्रमंडल खेलों के रजत पदक विजेता भी हैं।
देश के लिए पदक लाने में असफल रहे अब्दुल्ला
अब्दुल्ला ने बड़ी उम्मीदों के साथ पेरिस में प्रतिस्पर्धा की लेकिन देश के लिए पदक लाने में असफल रहे, लेकिन अब्दुल्ला ने भरोसा जताया है कि वह 2028 में अगले लॉस एंजिल्स ओलंपिक में जोरदार वापसी करेंगे।

'ट्रैक परफॉर्मेंस पर असर डाल रहा था'
अब्दुल्ला ने वनइंडिया से खास बातचीत में बताया कि, 'मैं पेरिस में अच्छा प्रदर्शन करना चाहता था, लेकिन वहां का ट्रैक परफॉर्मेंस पर असर डाल रहा था। दौड़ के लिए तैयार किया गया ट्रैक भारत की तरह सिंथेटिक नहीं था। इसके स्थान पर मोंडोट्रैक तैयार किया गया। यह पहली बार है जब मैंने इस ट्रैक पर प्रतिस्पर्धा की है। भारत में इस प्रकार का ट्रैक केवल JSW के पास है। हमारे पास वहां जाकर ट्रेनिंग करने का कोई विकल्प नहीं है।'
ट्रेनिंग के लिए पोलैंड जाने का सपना रह गया अधूरा
अब्दुल्ला ने आगे कहा कि, 'ओलंपिक से ठीक पहले, मैं ट्रेनिंग के लिए पोलैंड जा रहा था, लेकिन कोच की वीजा समस्या के कारण यह संभव नहीं हो सका। इस वजह से मैंने पेरिस में मोंडोट्रैक में अच्छा प्रदर्शन नहीं किया। मैं वहां 21वें स्थान पर रहा।'
'पेरिस का मौसम कोई चुनौती नहीं था'
उन्होंने बताया कि, मौसम कोई चुनौती नहीं था। जब मैं ओलंपिक में हिस्सा लेने गया तो पेरिस का मौसम कोई चुनौती नहीं था। वहां का मौसम बेंगलुरु जैसा ही था। इसलिए वहां मुकाबला करते समय मुझे किसी अन्य समस्या का सामना नहीं करना पड़ा।' ट्रैक बदलने के कारण ही मैं वैसा प्रदर्शन नहीं कर सका जैसा मैं चाहता था।'
अब्दुल्ला ने बड़ी उम्मीदों के साथ पेरिस में प्रतिस्पर्धा की लेकिन देश के लिए पदक लाने में असफल रहे। 28 वर्षीय एथलीट ने कहा कि, 'मैं पेरिस में अच्छा प्रदर्शन करना चाहता था।' 'मैंने प्रतियोगिता के लिए तैयारी की, लेकिन यह योजना के अनुसार नहीं हुआ।'
एथलीटों के सामने आने वाली चुनौतियां
अब्दुल्ला ने भारत में उचित प्रशिक्षण सुविधाओं की कमी को एक बड़ी बाधा बताया। उन्होंने कहा कि, 'भारत में कोई ट्रैक नहीं है।' 'भविष्य में ओलंपिक की तैयारी करते समय हमें अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दिखाने के लिए मोंडोट्रैक जैसे ट्रैक की आवश्यकता होगी।' उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मोंडोट्रैक स्प्रिंट के लिए फायदेमंद होते हैं, लेकिन ट्रिपल जंप जैसी स्पर्धाओं के लिए वे महत्वपूर्ण हैं।'
इस साल एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप होने वाली है और अब्दुल्ला का लक्ष्य पहले स्थान पर आना है। उन्होंने बताया कि आगामी चैंपियनशिप की तैयारी जल्द ही शुरू हो जाएगी। उन्होंने कहा कि, 'चैंपियनशिप की तैयारी 10-20 दिनों में शुरू हो जाएगी।' उन्होंने यह भी बताया कि वह इस साल भारत में प्रतिस्पर्धा नहीं करेंगे।'
भविष्य के लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करें
एथलीट का ध्यान चैंपियनशिप जीतने और अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में अच्छा प्रदर्शन करने पर रहता है। उन्होंने कहा कि, 'लक्ष्य चैंपियनशिप है।' 'यदि आप एशियाई चैंपियनशिप जीतते हैं, तो आप अन्य चैंपियनशिप के लिए अपना दिमाग खोलेंगे।' उनका दृढ़ संकल्प चुनौतियों के बावजूद उत्कृष्टता प्राप्त करने की उनकी प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।'
अब्दुल्ला की यात्रा उनके व्यक्तिगत संघर्षों और भारतीय एथलीटों द्वारा सामना किए जाने वाले व्यापक मुद्दों दोनों को उजागर करती है। बेहतर सुविधाओं और समर्थन के साथ, उम्मीद है कि अधिक एथलीट ओलंपिक जैसे वैश्विक मंचों पर अपने सपने को साकार कर सकते हैं।












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