'देश के लिए मेडल लाते हैं, स्टेशन पर बेइज्जती पाते हैं', ट्रेन में खिलाड़ियों के साथ अपराधियों जैसा सुलूक?
National Record Holder Dev Meena: भारत में क्रिकेट के दीवाने तो आपको हर गली मोहल्ले में नजर आ जाएंगे। लेकिन क्या हमारे देश में लोगों के बीच दूसरे खेलों को लेकर भी उसी तरह की समझ है? यह एक बड़ा सवाल है। भारत में जब भी कोई खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय मंच पर तिरंगा लहराता है तो पूरा देश गर्व से भर जाता है। लेकिन उस मेडल तक पहुंचने का रास्ता कितना पथरीला है, इसकी एक शर्मनाक तस्वीर महाराष्ट्र के पनवेल रेलवे स्टेशन से सामने आई है।
नेशनल रिकॉर्ड होल्डर के साथ बदसलूकी (National Record Holder Dev Meena)
भारत के उभरते हुए सितारे और नेशनल रिकॉर्ड होल्डर देव मीणा और उनके साथी खिलाड़ी कुलदीप यादव को ट्रेन में प्रताड़ना का सामना करना पड़ा है। इस घटना ने भारतीय खेल प्रशासन और व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हाल ही में 'ऑल इंडिया इंटर-यूनिवर्सिटी चैंपियनशिप' में हिस्सा लेने के बाद देव मीणा और कुलदीप यादव अपने घर लौट रहे थे। उनके पास पोल वॉल्ट के लंबे पोल (बांस) थे, जो इस खेल के लिए सबसे अनिवार्य उपकरण हैं।

ट्रेन से बेइज्जत कर उतारा गया
सफर के दौरान एक टीटीई ने इन पोल्स को अनधिकृत सामान बताते हुए आपत्ति जताई। खिलाड़ियों के पास वैध टिकट और पहचान पत्र होने के बावजूद उन्हें बीच रास्ते में ही पनवेल स्टेशन पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया गया। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि ये दोनों होनहार खिलाड़ी अपने लंबे पोल्स के साथ प्लेटफॉर्म पर लाचार खड़े हैं।
नेशनल चैंपियन के साथ ऐसा बर्ताव
करीब 5 घंटों तक वे रेलवे अधिकारियों को समझाते रहे कि ये कोई साधारण लकड़ी नहीं बल्कि उनके करियर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। देव मीणा ने हाल ही में नेशनल रिकॉर्ड बनाया है, उनकी आंखों में गुस्सा और बेबसी साफ झलक रही थी। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर एक नेशनल चैंपियन के साथ ऐसा बर्ताव हो सकता है, तो जूनियर खिलाड़ियों का क्या होगा?
पोल वॉल्ट के खेल में होता है पोल्स का इस्तेमाल
पोल वॉल्ट एक ऐसा खेल है जिसमें 4-5 मीटर लंबे पोल्स का इस्तेमाल होता है। भारत में एथलीट्स अक्सर निजी संसाधनों के भरोसे सफर करते हैं। रेलवे में स्पोर्ट्स इक्विपमेंट ले जाने के स्पष्ट नियमों के बावजूद जमीनी स्तर पर अधिकारियों की संवेदनहीनता खिलाड़ियों के मनोबल को तोड़ती है। यह सिर्फ दो खिलाड़ियों की कहानी नहीं है, बल्कि उन हजारों एथलीट्स की हकीकत है जो हर दिन ट्रेनिंग से ज्यादा ट्रांसपोर्टेशन और लॉजिस्टिक्स से लड़ते हैं।












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