Olympic 2024: ओलंपिक में भारत के लिए पहला व्यक्तिगत गोल्ड मेडल किसने जीता?
Olympic 2024: पेरिस ओलंपिक 2024 का काउंटडाउन शुरू हो चुका है। खेलों का ये महाकुंभ 26 जुलाई को उद्घाटन समारोह के साथ शुरू होगा, जिसका समापन समारोह 11 अगस्त को होगा। दुनिया के सबसे बड़े मंच पर भारतीय एथलीट अपना दमखम दिखाने के लिए तैयार हैं। अगर आपके जहन में ये सवाल चल रहा है कि ओलंपिक में भारत को पहला व्यक्तिगत स्वर्ण किसने दिलाया? तो सही जगह पर हैं आप। आइए जानते हैं।
भारत को पहला व्यक्तिगत स्वर्ण किसने दिलाया?
दरअसल, भारत का पहला व्यक्तिगत ओलंपिक स्वर्ण पदक अभिनव बिंद्रा ने चीन में जीता था। उन्होंने 11 अगस्त, 2008 को बीजिंग में आयोजित 2008 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता था।

अंतिम शॉट के दौरान जीता गोल्ड
इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने खेल जगत में भारत के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित किया और देश को बहुत गौरव दिलाया। 2008 बीजिंग ओलंपिक में पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में निर्णायक क्षण उनके अंतिम शॉट के दौरान आया, जहां उन्होंने लगभग पूर्ण स्कोर हासिल करने के लिए असाधारण संयम और कौशल का प्रदर्शन किया।
चीन के निशानेबाज झू किनान को हराकर जीता गोल्ड
बिंद्रा के 700.5 अंकों के अंतिम स्कोर ने उन्हें स्वर्ण पदक दिलाया, जिससे वे भारत के पहले व्यक्तिगत ओलंपिक चैंपियन बन गए। बिंद्रा ने आखिरी शॉट में चीन के निशानेबाज झू किनान को हराकर पदक जीता था।
अभिनव बिंद्रा का जन्म कहां हुआ?
बिंद्रा का जन्म 28 सितंबर, 1982 को भारत के देहरादून में हुआ था। उन्होंने शूटिंग में कम उम्र से ही रुचि दिखाई और कम उम्र में ही इस खेल का ट्रेनिंग लेना शुरू कर दिया था। उन्होंने अपने पहले कोच लेफ्टिनेंट कर्नल जे.एस. ढिल्लन के मार्गदर्शन में निशानेबाजी की ट्रेनिंग शुरू कर दी। बिंद्रा की खेल के प्रति प्रतिबद्धता और अपने कौशल को बेहतर बनाने के प्रति समर्पण उनके शुरुआती दिनों में ही स्पष्ट था।
सिडनी ओलंपिक में अपना ओलंपिक पदार्पण किया
17 साल की उम्र में बिंद्रा ने सिडनी ओलंपिक में अपना ओलंपिक पदार्पण किया। हालांकि उन्होंने कोई पदक नहीं जीता, लेकिन इस अनुभव ने वैश्विक मंच पर उत्कृष्टता हासिल करने के उनके दृढ़ संकल्प को बढ़ावा दिया। उन्होंने वर्षों तक कठोर प्रशिक्षण लिया, कभी-कभी अपने कौशल को बेहतर बनाने के लिए प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं के लिए विदेश यात्राएँ कीं।
बिंद्रा ने "ए शॉट एट हिस्ट्री: माई ऑब्सेसिव जर्नी टू ओलंपिक गोल्ड" नामक पुस्तक लिखी है, जिसमें स्वर्ण पदक जीतने की उनकी यात्रा का विवरण है। उन्हें कई पुरस्कार मिले हैं, जिनमें भारत का सर्वोच्च खेल सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार भी शामिल है।
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बिंद्रा की सफलता ने भारत के कई युवा एथलीटों को निशानेबाजी में शामिल होने और खेलों में अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रेरित किया है। उनका ऐतिहासिक स्वर्ण पदक भारतीय खेल इतिहास में एक निर्णायक क्षण बना हुआ है, जो दृढ़ संकल्प, कड़ी मेहनत और उत्कृष्टता की क्षमता का प्रतीक है।












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