Olympics 2024: गर्व से भर देगा ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम का गोल्डन इतिहास, यूं ही नहीं है दुनिया में दबदबा
Paris Olympics 2024, History of hockey: पेरिस ओलंपिक 2024 का काउंटडाउन शुरू हो चुका है। खेलों का ये महाकुंभ 26 जुलाई को उद्घाटन समारोह के साथ शुरू होगा, जिसका समापन समारोह 11 अगस्त को होगा। दुनिया के सबसे बड़े मंच पर भारतीय एथलीट अपना दमखम दिखाने के लिए तैयार हैं। इस क्रम में आज भारतीय हॉकी टीम के गोल्डन इतिहास पर एक नजर डालेंगे।
दुनिया के सबसे प्राचीन खेलों में से एक है हॉकी
हॉकी दुनिया के सबसे प्राचीन खेलों में से एक है, जहां खिलाड़ी स्टिक से एक छोटी गेंद को मारते हैं। हालांकि, आधुनिक समय की हॉकी का पहला संस्करण अंग्रेजों द्वारा 18वीं सदी के अंत और 19वीं सदी की शुरुआत के बीच विकसित किया गया था। इसके इतिहास की गहराई में जाऐ बिना वापस भारत के हॉकी इतिहास की तरफ चलते हैं।

शुरुआत में ही दुनिया के दिखाया भारत ने अपना दम
देश में भारतीय हॉकी महासंघ (IHF) का गठन अंतर्राष्ट्रीय हॉकी महासंघ (FIH) के गठन के एक साल बाद 1925 में हुआ था। IHF ने 1926 में न्यूजीलैंड में अपना पहला अंतरराष्ट्रीय दौरा आयोजित किया, जहां भारतीय हॉकी पुरुष टीम ने 21 मैच खेले और 18 जीते। इस टूर्नामेंट में युवा ध्यानचंद का उदय हुआ, जो यकीनन दुनिया के अब तक के सर्वश्रेष्ठ हॉकी खिलाड़ी बने।
ओलंपिक में भारतीय टीम का दबदबा
भारतीय हॉकी टीम ने 1928 में अपने पहले प्रयास में ही ओलंपिक स्वर्ण पदक जीत लिया। भारत ने पांच मैच खेले, जिसमें 29 गोल किए और एक भी गोल नहीं खाया, जिसमें से 14 गोल ध्यानचंद ने किए।
ध्यानचंद ने भारत को दिलाई गोल्ड की हैट्रिक
हॉकी के जादूगर भारतीय हॉकी टीम की आधारशिला बन गए क्योंकि उन्होंने 1932 और 1936 में दो और गोल्ड मेडल जीते, जिससे ओलंपिक हॉकी स्वर्ण की हैट्रिक पूरी हुई। ध्यानचंद को 1936 में कप्तान बनाया गया, जो उनका अंतिम ओलंपिक खेल साबित हुआ।
भारत ने ओलंपिक गोल्ड मेडल की लगाई दूसरी हैट्रिक
जब 1948 में द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ओलंपिक वापस लौटे, तो भारत को महान बलबीर सिंह सीनियर के रूप में एक नई प्रतिभा मिली, क्योंकि उन्होंने 1948, 1952 और 1956 में ओलंपिक स्वर्ण पदकों की दूसरी हैट्रिक बनाई, इस बार एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में। यह अवधि भारत में हॉकी के इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण अवधियों में से एक थी।
ओलंपिक में जब टीम इंडिया को लगा झटका
भारतीय हॉकी टीम ने 1958 और 1962 के एशियाई खेलों में रजत पदक जीता था, और अंत में 1966 के संस्करण में स्वर्ण पदक जीता। हालांकि, भारत ने मेक्सिको 1968 ओलंपिक मे केवल कांस्य पदक ही जीत पाया, जो उस समय ओलंपिक में उसका सबसे खराब प्रदर्शन था।
बुरे वक्त में टीम इंडिया ने नहीं खोई उम्मीद
टीम इंडिया ने 1972 म्यूनिख ओलंपिक में ब्रॉन्ज अपने नाम किया और फिर 1976 के मॉन्ट्रियल ओलंपिक में बिना किसी मेडल के खाली हाथ लौटना पड़ा। इस निराशा जनक प्रदर्शन के बाद भारतीय हॉकी टीम ने हार नहीं मानी, जिसका नतीजा ये हुआ कि उन्होंने 1980 मॉस्को ओलंपिक में शानदार वापसी की और गोल्ड मेडल पर कब्जा कर लिया।
भारत के पास एक और बार गोल्ड के साथ वापसी का मौका
यहां से फिर भारतीय हॉकी टीम को भारी गिरावट का सामना करना पड़ा और 41 साल बाद टोक्यो ओलंपिक 2020 में ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। अब एक बार फिर टीम इंडिया गोल्ड के लिए तैयार है, क्योंकि पेरिस ओलंपिक 2024 में उनका अभियान 27 जुलाई को न्यूजीलैंड के खिलाफ मैच से शुरू होने जा रहा है।
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पेरिस ओलंपिक 2024 के लिए भारतीय हॉकी टीम:
- गोलकीपर- पीआर श्रीजेश
- डिफेंडर्स- जरमनप्रीत सिंह, अमित रोहिदास, हरमनप्रीत सिंह, सुमित, संजय
- मिडफील्डर्स- राजकुमार पाल, शमशेर सिंह, मनप्रीत सिंह, हार्दिक सिंह, विवेक सागर प्रसाद
- फॉरवर्ड- अभिषेक, सुखजीत सिंह, ललित कुमार उपाध्याय, मंदीप सिंह, गुरजंत सिंह
- वैकल्पिक खिलाड़ी- नीलकांत शर्मा, जुगराज सिंह, कृष्ण बहादुर पाठक












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