Fifa World Cup 2022 : एक तरफ विवाद दूसरी तरफ जोश का समंदर, कतर पहली बार खेलेगा विश्वकप
पश्चिम एशिया का देश कतर विश्वकप फुटबॉल के कारण चर्चा में है। एशिया में दूसरी बार और किसी अरब देश में पहली बार यह प्रतियोगिता हो रही है। कतर की आबादी केवल 28 लाख। भारत के कई शहरों से भी छोटा है यह देश। अगर लखनऊ शहर की बात करें तो इसमें दो कतर समा जाएंगे। 2021 में लखनऊ शहर की आबादी 53 लाख के पार हो गयी थी। लेकिन खनिज तेल की अकूत सम्पदा के कारण कतर दुनिया का एक धनी देश है। कतर धनी देश तो है लेकिन यहां मानवाधिकार हनन समस्याएं रही हैं। ऐसे में दुनिया की सबसे मशहूर खेल प्रतियोगिता के आयोजन उसे एक बड़ा मौका मिला है। अब कतर फीफा विश्वकप के जरिये दुनिया के सामने अपनी छवि को सुधारने की कोशिश में है। यह जानना दिलचस्प होगा कि कतर का जनजीवन कैसा है ? यहां फुटबॉल को लेकर कितनी दीवानगी है? विश्व फुटबॉल में कतर की क्या हैसियत है ?

विवादों की छाया में विश्वकप फुटबॉल
2010 में जब इसे विश्वकप फुटबॉल की मेजबानी सौंपी गयी थी तब यह दुनिया का सबसे धनी देश था। जिन परिस्थितियों में कतर को इस बड़ी प्रतियोगिता की मेजबानी मिली थी उस पर बहुत विवाद हुआ था। कतर में सीमित संविधान वाला इस्लामिक राजतंत्र है। यहां बहुत पहले से मानवाधिकार हनन की शिकायतें रहीं हैं। बारह साल पहले जब कतर को विश्वकप की मेजबानी मिली थी तब फीफा के अध्यक्ष सेप ब्लाटर थे। ब्लाटर पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। लेकिन बाद में वे आरोप मुक्त हो गये थे। उस समय चर्चा थी कि कतर को मेजबानी जारी करने की निविदा में आर्थिक गड़बड़ी की गयी थी। कतर पिछले एक दशक से इस प्रतियोगिता के लिए तैयारी कर रहा है। इसके लिए कई स्टेडियम और आगंतुकों के लिए नयी इमारतें बनायी गयीं। लेकिन इस बड़े मौके पर विवादों ने कतर का दामन नहीं छोड़ा। आरोप लगा कि निर्माण कार्य में लगे प्रवासी मजदूरों के साथ गुलामों की तरह वर्ताव किया गया। हालात इतने खराब हो गये कि फीफा के पूर्व अध्यक्ष सेप ब्लाटर को कहना पड़ा, कतर को विश्वकप फुटबॉल की मेजबानी देना सबसे बड़ी भूल थी।

विवाद के इतर जोश का समंदर
हालांकि कतर को इन आलोचनाओं की कोई परवाह नहीं। वह विश्वकप के आयोजन को सफल बनाना चाहता है ताकि दुनिया के सामने अच्छी छवि बने। बहरहाल इस प्रतियोगिता को लेकर कतर में जोश और उमंग का आलम है। एक छोटे देश के लिए इतनी बड़ी प्रतियोगिता का आयोजन गर्व की बात है। फुटबॉल विश्वकप का बुखार पूरी दुनिया पर चढ़ गया है। इस खेल के दीवाने कतर पहुंचने लगे हैं। किसी को न घर-बार की फिक्र है न रुपये पैसों की। केरल की एक महिला नाजी नौशी अपने घर परिवार को छोड़ कर अकेले ही कार से कतर पहुंच गयी। भारत के एक पूर्व फुटबॉल कोच मोहम्मद कैसर ने विश्वकप के मैच देखने के लिए साढ़े चार लाख रुपये में चार टिकट खरीदे। फारस की खाड़ी की गोद में बसे कतर में फिलहाल जोश का समंदर लहरा है।

कतर में फुटबॉल
कतर पहले ब्रिटेन का संरक्षित राज्य था। 1971 में यह आजाद हुआ। 1993 में कतर की फुटबॉल वर्ल्ड रैंकिंग 53 थी। 1970 में इसने बहरीन के साथ पहला अंतराष्ट्रीय फुटबॉल मैच खेला था। इसके बाद यह धीरे-धीरे आगे बढ़ता रहा। 1984 में इसने गल्फ कप के फाइनल में जगह बनायी। फिर इसने तीन बार इस प्रतियोगिता को जीता। 1990 के दशक के शुरू में कतर ने एशियाई फुटबॉल में अपनी पहचान कायम की। 1993 में वह दुनिया की 53 वें नम्बर की टीम बन गया। 2006 में कतर ने एशियन गेम्स का गोल्ड मेडल जीता था। 2019 में इसने पहली बार एएफसी एशियन कप का खिताब जीता था। इसने चार बार के विजेता जापान को 3-1 से हराया था। कतर की यह एक बड़ी उपलब्धि थी। 2022 में कतर की विश्व रैंकिंग 50 है। मेजबान देश होने की वजह से कतर को पहली बार विश्वकप फुटबॉल प्रतियोगिता में खेलने का अवसर प्राप्त हुआ है।

एशिया से बाहर कतर का कैसा प्रदर्शन ?
2019 में कतर को कोपा अमेरिका कप में खेलने के लिए आमंत्रित किया गया था। उस समय यह फुटबॉल का एशियाई चैम्पियन था। इसे ग्रुप बी में अर्जेंटीना, कोलम्बिया और पराग्वे के साथ रखा गया था। कतर का पराग्वे के साथ पहला मैच 2-2 से बराबरी पर रहा था। दूसरे मैच में यह कोलंबिया से 1-0 से हार गया। तीसरे मैच में इसका मुकाबला शक्तिशाली अर्जेंटीना से था। अर्जेंटीना को क्वार्टर फाइनल में पहुंचने के लिए इस मैच को जीतना जरूरी था। इसके पहले वह कोलंबिया से 2-0 से हार गया था। पराग्वे से उसका मुकाबला 1-1 से ड्रा रहा था। इस मैच में लिविंग लिजेंड लियोनेल मैसी भी खेल रहे थे। अर्जेंटीना ने जोरदार खेल दिखाया और कतर को 2-0 से हरा दिया। 2022 के विश्वकप फुटबॉल में पहला मैच 20 नवम्बर को कतर और इक्वाडोर के बीच खेला जाएगा।












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