क्या अब भी भारत ICC टूर्नामेंट में पाकिस्तान के साथ खेलेगा? आतंक के खिलाफ BCCI का क्या होना चाहिए अगला कदम
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के फ्रंट 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' (TRF) ने ली है, जिसके बाद देशभर में पाकिस्तान के खिलाफ गुस्सा साफ देखा जा रहा है।
अब इस घटना के बाद एक अहम सवाल उठ रहा है- क्या भारत को पाकिस्तान के साथ क्रिकेट जैसे मंच पर भी कोई रिश्ता रखना चाहिए? क्या इस कायराना हरकत के बाद भी टीम इंडिया आईसीसी टूर्नामेंट में पाकिस्तान के साथ क्रिकेट खेलेगी?

BCCI का साफ संदेश: सरकार के रुख के अनुसार फैसले
इस पर बीसीसीआई के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने स्पष्ट तौर पर कहा है, 'हमारी सरकार जो कहेगी, हम करेंगे। हम सरकार के रुख के कारण पाकिस्तान के साथ बायलेट्रल सीरीज नहीं खेलते हैं और आगे भी नहीं खेलेंगे।'
क्या भारत ICC टूर्नामेंट में पाकिस्तान के साथ क्रिकेट खेलेगा?
बीसीसीआई के उपाध्यक्ष ने कहा कि, 'जहां तक ICC टूर्नामेंट की बात है, वहां हम ICC की भागीदारी और नियमों के चलते खेलते हैं।' इसका मतलब है कि भारत और पाकिस्तान के बीच बायलेट्रल सीरीज तो पूरी तरह से बंद है, लेकिन आईसीसी जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर दोनों टीमों को टूर्नामेंट की बाध्यता के तहत आमने-सामने आना पड़ता है। ऐसे में अब भारत सरकार के ऊपर है कि कब सरकार आईसीसी टूर्नामेंट में भी पाकिस्तान का बॉयकॉट करने का निर्णय लेती है।
#WATCH | Delhi: #PahalgamTerroristAttack | Congress MP and BCCI Vice President Rajeev Shukla says, "Yesterdays attack in Pahalgam has made us think that now the time has come to eliminate terrorists completely. We strongly condemn this... 140 crore people of the country will… pic.twitter.com/yL8090IBLe
— ANI (@ANI) April 23, 2025
हर मोर्चे पर सख्ती जरूरी: क्रिकेट हो या फिल्म इंडस्ट्री
जो देश हमारे नागरिकों पर हमले करवाता है, उसके साथ किसी भी मंच पर सहयोग या सांस्कृतिक आदान-प्रदान को खत्म करने का समय आ चुका है। क्रिकेट हो या फिल्म इंडस्ट्री, हर जगह पाकिस्तान को अलग-थलग करना अब वक्त की जरूरत है।
क्या भारत पर पाकिस्तान से संबंध खत्म करने का कोई असर पड़ेगा?
भारत आज जिस स्तर पर वैश्विक ताकत बन चुका है, वहां पाकिस्तान से संबंध खत्म करना न तो आर्थिक रूप से कोई झटका है और न ही रणनीतिक रूप से कोई नुकसान। भारत का पाकिस्तान पर निर्भरता बहुत कम है- चाहे बात व्यापार की हो, खेल की हो या कला-संस्कृति की।
वास्तविकता यह है कि भारत का पाकिस्तान के साथ व्यापार बहुत सीमित है और 2019 में पुलवामा हमले के बाद 'मोस्ट फेवर्ड नेशन' (MFN) का दर्जा भी वापस ले लिया गया था। फिल्म इंडस्ट्री ने पहले ही पाकिस्तानी कलाकारों के साथ काम करने से दूरी बना ली है। अब जब क्रिकेट की बात आती है, तो भारत जैसे क्रिकेट-प्रधान देश को ICC इवेंट्स में भी पाकिस्तानी टीम से खेलने की कोई नैतिक मजबूरी नहीं होनी चाहिए। पाकिस्तान को अलग-थलग करने से नुकसान उन्हें होगा, भारत को नहीं।
पाकिस्तान को हर मंच पर उसकी भाषा में मिलना चाहिए जवाब
28 मासूम जिंदगियों की शहादत के बाद अगर हम क्रिकेट जैसे ग्लैमरस खेल में उसी देश से हाथ मिला रहे हैं, तो यह सिर्फ खेल नहीं, बल्कि नैतिकता की हार होगी। अब वक्त आ गया है कि भारत सिर्फ सीमा पर नहीं, बल्कि कूटनीतिक, सांस्कृतिक और खेल जगत के हर मंच पर पाकिस्तान को उसी की भाषा में जवाब दे।
हमारे नागरिकों के खिलाफ आतंकवादियों द्वारा की गई इस घिनौनी घटना के बाद पाकिस्तान के साथ किसी भी प्रकार के रिश्ते को जारी रखना हमारे राष्ट्रीय गौरव और सुरक्षा के खिलाफ होगा। भारत पूरी दुनिया को यह संदेश दे कि वह अपनी जमीन पर आतंकवाद को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करेगा और पाकिस्तान को भी उसी की भाषा में जवाब देगा।
आर्थिक रूप से तोड़नी होगी पाक की कमर
भारत जैसे क्रिकेट सुपरपावर के साथ खेलने से पाकिस्तान को सिर्फ ग्लोबल मंच ही नहीं, बड़ी आर्थिक राहत भी मिलती है। जब भी भारत-पाकिस्तान का मैच होता है, ब्रॉडकास्टिंग से लेकर स्पॉन्सरशिप तक करोड़ों की कमाई होती है- जिसमें बड़ा हिस्सा पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) को जाता है। अगर भारत ICC टूर्नामेंट्स में भी पाकिस्तान से खेलने से इनकार कर दे, तो ये सिर्फ एक नैतिक फैसला नहीं, बल्कि पाकिस्तान की आर्थिक नींव पर भी एक करारी चोट होगी।
खेल के नाम पर आतंक को नजरअंदाज करना अब मुमकिन नहीं। पाकिस्तान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करना वक्त की सबसे बड़ी ज़रूरत है-ताकि वो समझ सके कि नफरत और हिंसा की कीमत चुकानी पड़ती है।












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