पाकिस्तान ने क्यों नहीं किया जय शाह को ICC चेयरमैन बनाने का विरोध? जानिए क्या है कारण
आईसीसी का नया चेयरमैन बनाकर जय शाह ने इतिहास रचने का काम किया है। अब तक 35 साल की उम्र में किसी भी देश का कोई आईसीसी हेड नहीं बना है। इस मामले में जय शाह ने सभी को पीछे छोड़ दिया। वह कुछ महीनों बाद अपना कार्यकाल संभाल लेंगे।
जय शाह का दबदबा इतना है कि किसी अन्य देश के कैंडिडेट ने उनके सामने चुनाव लड़ने तक की हिम्मत नहीं दिखाई। जय शाह को निर्विरोध चेयरमैन चुन लिया गया। यहाँ तक कि पाकिस्तान तक ने उनका विरोध करने की हिम्मत नहीं जुटाई।

पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड की तरफ से बीसीसीआई को लेकर कई बार बयानबाजी हुई है। जय शाह के एशियन क्रिकेट काउंसिल के अध्यक्ष रहते एशिया कप हाइब्रिड मॉडल पर हुआ था। पाकिस्तान में कम ही मैच हुए थे और भारत के मैचों सहित फाइनल श्रीलंका में खेला गया था।
अगले साल चैम्पियंस ट्रॉफी पाकिस्तान में होनी है और भारतीय टीम के वहां जाने या नहीं जाने को लेकर स्थिति साफ़ नहीं हो पाई है। अब जय शाह आईसीसी प्रेसिडेंट बन गए हैं, तो एक बार फिर से पाकिस्तान के लिए मामला खराब हो सकता है लेकिन उनको चेयरमैन बनाने का विरोध नहीं किया गया।
पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने जय शाह का विरोध किसी कारणवश नहीं किया। उनके सामने कोई विकल्प नहीं था इसलिए जय शाह को अध्यक्ष बनने दिया गया। अगर पाकिस्तान से किसी को चुनाव लड़ने के लिए मैदान पर उतार दिया जाता, तो बेइज्जती के अलावा कुछ नहीं मिलना था।
जय शाह ने पहले ही अपनी फील्डिंग सेट कर वोटों का जुगाड़ कर लिया था। उनको 16 में से लगभग 15 बोर्ड मेम्बर्स का सपोर्ट था। अब यहाँ पाकिस्तानी आर्मी भी कुछ नहीं कर सकती थी, जो अपने देश में धांधली कर अपनी मर्जी का प्रधानमंत्री बना देती है। आईसीसी के चुनाव में हार सामने देखकर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने चुपचाप बैठने में ही भलाई समझी।












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