भारतीय क्रिकेट ने इतनी जल्दबाजी में अपने ऑलराउंडर इरफान पठान को क्यों छोड़ दिया?

नई दिल्लीः भारतीय ऑलराउंडर इरफान पठान लीजेंड लीग क्रिकेट में बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। भारत की मौजूदा टीम केवल हार्दिक पांड्या को ही अपने लाड़ले की तरह से ट्रीट करती रही है क्योंकि ले-देकर वे एक असली टाइप के ऑलराउंडर माने जाते हैं। लेकिन क्या हार्दिक वाकई में एक अच्छे गेंदबाज हैं? इस पर हमेशा सवाल रहेगा। इसलिए जब हम दीपक चाहर और शार्दुल ठाकुर को देखते हैं तो वे हार्दिक से बेहतर विकल्प नजर आते हैं क्योंकि दोनों के पास हमेशा गेंदबाज मजबूत पक्ष रहेगा। इरफान अभी भी केवल 37 साल के हैं और ताज्जुब होता है कि भारतीय टीम ने इस खिलाड़ी से मुंह मोड़ने में इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई।

लीजेंड लीग क्रिकेट में इरफान का जलवा

लीजेंड लीग क्रिकेट में इरफान का जलवा

लीजेंड लीग क्रिकेट में इरफान ने दो मैच खेले और दोनों में प्रभाव छोड़ा। एक मैच में उन्होंने 10 गेंदों में 21 रन बनाए और 22 रन देकर 2 विकेट लिए तो दूसरे मैच में 21 गेंदों पर 56 रन बनाए जबकि गेंदबाजी में 26 रन देकर 1 विकेट लिया। 10 साल पहले भारत के लिए मैच खेलने वाले किसी खिलाड़ी के लिए आज भी ऐसी परफॉरमेंस देना बहुत जबरदस्त बात है और भारत के लिए बड़ी दुर्भाग्य की बात है कि वह ऐसे खिलाड़ी से चूक कैसे गया।

इंटरनेशनल करियर की शुरुआत जबरदस्त थी-

इंटरनेशनल करियर की शुरुआत जबरदस्त थी-

इरफान ने भारतीय टीम के लिए पहले साल में 47 विकेट लिए थे। उन्होंने 50 वनडे विकेट केवल 31 मैचों में ही ले लिए थे और बाद में 100 विकेट लेने वाले सबसे तेज भारतीय बॉलर भी बने। 2005 बल्ले से इरफान का सर्वश्रेष्ठ वर्ष था, उन्होंने एकदिवसीय मैचों में 88.86 की स्ट्राइक रेट से 35 के औसत से रन बनाए। अपने पदार्पण से 2007 के अंत तक, इरफान ने पांच अर्द्धशतक और 79 से अधिक की स्ट्राइक रेट के साथ 1,137 रन बनाए। हालांकि सबसे छोटे प्रारूप में प्रदर्शन उतना प्रभाव नहीं था।

पठान के शानदार करियर में गिरावट साल 2008 में आई जब वे एशिया कप में 51 के औसत से केवल 7 ही विकेट ले पाए थे। उस साल उन्होंने 20 वनडे मैचों में केवल 21 ही विकेट लिए।

2012 में फिर निखरने की कोशिश-

2012 में फिर निखरने की कोशिश-

2009 और 2011 के बीच, इरफान ने कुल तीन एकदिवसीय मैच खेले, जिसमें छह विकेट लिए, और छह T20I में चार विकेट लिए। वे घुटने की चोट को "अपने करियर का सबसे खराब चरण" बताते हैं। इसके बाद पठान का करियर साल 2012 में फिर निखरने की कोशिश कर रहा था जब ऑस्ट्रेलिया में खेली सीबी सीरीज में उन्होंने 6 विकेट लिए और 96 रन बनाए। फिर एशिया कप के पहले ही मैच में उनको 32 रन देकर 4 विकेट मिले जिसके चलते उनको श्रीलंका के दौरे पर भी जगह मिली जहां उन्होंने 5वें वनडे मैच में अपने पुराने दिनों की यादें ताजा कर दी क्योंकि पठान ने 28 गेंदों पर सावधानीपूर्वक 29 रन बनाए और 61 रन देकर पांच विकेट लिए जिसके बाद वे प्लेयर ऑफ द मैच घोषित किए गए।

लेकिन भारतीय क्रिकेट इरफान पठान के लिए दरवाजे बंद कर चुका था

लेकिन भारतीय क्रिकेट इरफान पठान के लिए दरवाजे बंद कर चुका था

जब इरफान पठान के अंदर फिर से पुरानी फॉर्म वापस आते दिखाई दे रही थी तब उनको मौके मिलने बंद हो गए और पठान ने उसके बाद कोई और वन डे इंटरनेशनल मुकाबला नहीं खेला। साल 2012 में उन्होंने टी-20 मुकाबलों में 18.58 की औसत से 12 विकेट लिए जबकि केवल दो ही पारियों में बल्लेबाजी की। साल 2013 आते-आते भारतीय टीम के पास उमेश यादव, मोहम्मद शमी और भुवनेश्वर कुमार जैसे गेंदबाज आने लगे थे। 2016 में हार्दिक पांड्या के आने से पहले ऑलराउंडर का स्लॉट खुला हुआ था जबकि जसप्रीत बुमराह की एंट्री ने तेज गेंदबाजी को और भी ज्यादा कंप्लीट कर दिया। उसी साल पठान सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज थे लेकिन ऐसा लगता है भारत अपने नए खिलाड़ियों के साथ आगे बढ़ने की सोच चुका था और उसने इरफान पठान की ओर देखना भी छोड़ दिया।

मेरा करियर 27-28 में ही खत्म हो गया- इरफान पठान

मेरा करियर 27-28 में ही खत्म हो गया- इरफान पठान

केवल 27 साल की उम्र के बाद इरफान पठान को नहीं खिलाया गया जबकि उनके पास अभी भी भारत को देने के लिए काफी कुछ था। जब इरफान ने 2020 में रिटायरमेंट लिया तो उन्होंने कहा था कि लोग 27-28 साल की उम्र में करियर शुरू कर देते हैं लेकिन मेरा उसी उम्र में खत्म हो गया और यही मेरे लिए एकमात्र अफसोस की बात है। भारत कई लोगों की आबादी का देश है और यहां पर क्रिकेट में टॉप लेवल पर खेलना बहुत ही मुश्किल बात होती है। अगर खिलाड़ी को कुछ भी हो जाए तो उसका रिप्लेसमेंट तुरंत तैयार रहता है और एक हल्का सा भटकाव उस खिलाड़ी को बहुत पीछे छोड़ देता है। अपने चरम पर इरफान पठान भारतीय क्रिकेट के लिए एक खजाना साबित होते लेकिन उनके लिए एक दशक पहले ही दरवाजे कुछ इस तरह बंद हुए कि फिर कभी नहीं खुले।

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