T20 World Cup: 20 टीमों का वर्ल्ड कप कराने से क्या फायदा हुआ? एक नई बात निकलकर आई सामने
T20 World Cup: टी20 वर्ल्ड कप में इस बार कुछ बड़ा देखने को मिला है। कुल 20 टीमों को लेकर आईसीसी ने इवेंट का आयोजन किया। इस बीच पिचों को लेकर आईसीसी को आलोचना का शिकार भी होना पड़ा है लेकिन क्रिकेट को प्रमोट करने के लिए इस तरह का कदम उठाना पड़ा।
ज्यादा टीमों को लेकर आयोजन कराने के बाद कुछ चीजें सामने आई हैं। इनमें बड़ी टीमों का प्रदर्शन अहम रहा है। छोटी टीमों के खिलाफ खेलते हुए बड़ी टीमों को हार का सामना करना पड़ा है। न्यूजीलैंड और पाकिस्तानी टीम इसमें सबसे बड़ा उदाहरण है।

एक और ख़ास बात यह भी देखने को मिली कि टेस्ट दर्जा प्राप्त कुछ टीमों को टूर्नामेंट के पहले ही चरण में बाहर का रास्ता देखना पड़ा है। न्यूजीलैंड वो टीम है जो किसी भी टूर्नामेंट को आसानी से नहीं जाने देती है। कम से कम सेमीफाइनल तक खेलकर जाती है लेकिन इस बार कीवी टीम की भी नहीं चली।
जिस तरह अफगानिस्तान ने न्यूजीलैंड को हराकर बाहर किया है, वह काबिले तारीफ़ बात है। यही बात यूएस पर भी लागू होती है। यूएस ने भी पाकिस्तान को लगभग बाहर कर दिया। सुपर ओवर में जाकर पाकिस्तान को पराजय का सामना करना पड़ा। पाकिस्तानी टीम ने यूएस से हार झेलने के बारे में सोचा भी नहीं होगा।
ज्यादा टीमों को लेकर खेलने का एक फायदा यह हुआ है कि अब टॉप आठ में सभी बड़ी टीमें नहीं होंगी। कुछ छोटी टीमों को भी टॉप आठ में देखा जा सकेगा। अब तक ऐसा होता आया था कि टेस्ट खेलने वाले बड़े देश ही टॉप आठ और चार में जाते थे लेकिन इस बार काफी कुछ बदला है।
यूएस ने पहली बार खेलते हुए काफी प्रभावित किया है। भारत के सामने यूएस को हार का सामना करना पड़ा लेकिन उनके गेंदबाजों ने इस मैच में भी अपना सौ फीसदी देने का प्रयास किया। स्कॉटलैंड की टीम ने भी प्रभावित किया है। पिचें थोड़ी अच्छी रहती, तो लीग चरण का मज़ा ज्यादा आता।












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