U19 WC 2022: इतिहास में 7 बार फाइनल खेल चुका है भारत, जानें कैसा रहा था हर मैच का रोमांच

नई दिल्ली। साल 2016 के बाद से आईसीसी के अंडर 19 विश्वकप टूर्नामेंट के फाइनल मैचों में भारत ही इकलौती ऐसी टीम रही है जो लगातार यहां पर पहुंचती नजर आयी है, फिर चाहे उसके सामने प्रतिद्वंदी कोई भी रहा हो। वेस्टइंडीज में खेले जा रहे अंडर 19 विश्वकप 2022 में भी भारत ने एक बार फिर से फाइनल का टिकट कटाया है, जहां पर उसका सामना इंग्लैंड से होगा। अंडर 19 विश्वकप के इतिहास में सबसे ज्यादा बार फाइनल में जगह बनाने वाली भारतीय टीम के पास शनिवार को इतिहास रचते हुए अपने खिताबों की संख्या को बढ़ाकर 5 करने का मौका होगा। दोनों टीमें इस टूर्नामेंट में अब तक अजेय रही हैं और सर विवियन रिचर्डस स्टेडियम में खिताब अपने नाम करने के इरादे से उतरेंगी।
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जहां पर इंग्लैंड की टीम 24 साल बाद खिताब जीतने की कगार पर पहुंची है तो वहीं पर भारतीय टीम ने लगातार चौथी और ओवरऑल 8वीं बार फाइनल में जगह बनायी है। एंटिगुआ में खेले जाने वाले इस महामुकाबले से पहले आइये एक नजर अंडर 19 विश्वकप के इतिहास में भारतीय टीम की ओर से खेले गये फाइनल मैचों पर डालते हैं और समझते हैं कि उसका प्रदर्शन कैसा रहा है।
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2000 में पहली बार खेला था फाइनल, श्रीलंका को हरा कर जीता था खिताब
साल 2000 में पहला मौका था जब भारतीय टीम अंडर 19 विश्वकप के फाइनल में पहुंच पायी थी। कोलंबो के मैदान पर खेले गये इस फाइनल मैच में भारतीय टीम ने सलभ श्रीवास्तव (3/33) और रतिंदर सोढ़ी (0/26) की किफायती गेंदबाजी के दम पर श्रीलंका को बड़ा स्कोर खड़ा करने से रोका और जेहान मुबारक (58) की अर्धशतकीय पारी के बावजूद श्रीलंका की टीम 178 रन ही बना सकी। लो स्कोरिंग फाइनल मैच में रनों का पीछा करते हुए भारतीय टीम के ओपनर्स ने अर्धशतकीय साझेदारी की, जिसके बाद उसे दोहरा झटका लगा। यहां से मोहम्मद कैफ और युवराज सिंह ने पारी को संभालने की कोशिश करते हुए 31 रन जोड़े लेकिन फिर से दोहरा झटका लगा। तभी रतिंदर सिंह सोढ़ी (39*) ने टीम को जिताने की जिम्मेदारी संभाली और नीरज पटेल (34) के साथ 40.4 में ही लक्ष्य का पीछा कर पहला खिताब जीत लिया।

2006 में पाकिस्तान से हुआ मुकाबला, 38 रन से हारा भारत
अंडर 19 विश्वकप का पहला खिताब जीतने के बाद भारतीय टीम को दोबारा फाइनल में पहुंचने का मौका 2006 में मिला, जहां पर रोहित शर्मा, चेतेश्वर पुजारा, रविंद्र जडेजा और पीयूष चावला जैसे खिलाड़ी टीम में शामिल थे। पाकिस्तान के खिलाफ यह फाइनल उसी जगह पर खेला गया था जहां पर भारत ने 2000 में श्रीलंका को हराया था, लेकिन उनका सामना डिफेंडिंग चैम्पियन और धुर विरोधी टीम पाकिस्तान से हो रहा था। भारतीय टीम ने पहले गेंदबाजी का करते हुए जडेजा और चावला के दम पर पाकिस्तान की टीम को महज 109 रन पर समेट दिया, जिसके बाद भारत की दूसरी विश्वकप जीत आसान लग रही थी, हालांकि सरफराज अहमद की कप्तानी वाली पाकिस्तान टीम के लिये अनवर अली ने कहर बरपाया और महज 35 रन देकर भारत के 5 विकेट चटका डाले, तो अख्तर आयुब ने 3 विकेट हासिल कर पूरी भारतीय टीम को 18.5 ओवर्स में महज 71 रन पर ऑल आउट कर खिताब को बचा लिया।

2008 में कोहली की कप्तानी में भारत ने जीता दूसरा खिताब
2006 में रनर्स अप रहने के बाद भारतीय टीम ने 2008 में खेले गये अगले अंडर 19 विश्वकप में शानदार प्रदर्शन किया और विराट कोहली की कप्तानी में साउथ अफ्रीका को फाइनल में हराकर दूसरा खिताब जीता। इस फाइनल मैच में साउथ अफ्रीका की अंडर 19 टीम के पूर्ण प्रयास से भारतीय टीम 159 रन पर सिमट गई। भारत के लिये तन्मय श्रीवात्सव ने सबसे ज्यादा 49 रनों का योगदान दिया। भारत के लिये अजितेश अरगल और प्रदीप सांगवान ने शानदार शुरुआत करते हुए महज 11 रन पर 3 विकेट झटक लिये लेकिन तभी बारिश ने खलल डाल दिया। जब मैच दोबारा शुरू हुआ तो साउथ अफ्रीका की टीम को जीत के लिये 98 गेंदों में 99 रन की दरकार रह गई थी। इस मैच मे आउटफील्ड गीली होने की वजह से साउथ अफ्रीका बल्लेबाज बाउंड्री लगाने में संघर्ष करते नजर आये लक्ष्य से 12 रन पीछे रह गये।

2012 में ऑस्ट्रेलिया को फाइनल में हराकर जीता तीसरा खिताब
2008 में चैम्पियन बनने के बाद भारतीय टीम 4 साल बाद ऑस्ट्रेलिया की मेजबानी में खेले गये अंडर 19 विश्वकप के फाइनल में पहुंच सकी। इस मैच में ऑस्ट्रेलिया की टीम ने पहले बल्लेबाजी का फैसला किया लेकिन संदीप शर्मा ने नई गेंद से शानदार गेंदबाजी की और जल्दी से 4 विकेट झटक कर टीम को सफलता दिला दी। लेकिन यहां से कप्तान विलियम बोसिस्टो, ट्रैविस हेड और एश्टन टर्नर ने पारी को दोबारा जिंदा किया और 8 विकेट के स्कोर पर 225 रन का स्कोर खड़ा कर दिया। इसके जवाब में भारतीय टीम ने कप्तान उन्मुक्त चंद की नाबाद 111 रनों की पारी के दम पर 14 गेंद पहले लक्ष्य को हासिल कर लिया और भारतीय टीम को तीसरा खिताब जिता दिया।

2016 में वेस्टइंडीज ने 5 विकेट से दी मात
2012 के बाद भारतीय टीम को 4 साल बाद फिर से फाइनल मैच खेलने का मौका मिला जहां पर उसका सामना वेस्टइंडीज से हुआ। इस मैच में सरफराज खान भारतीय टीम के इकलौते बल्लेबाज थे जिन्होंने 89 गेंदों का सामना कर 51 रनों की पारी खेली। वेस्टइंडीज की टीम ने अल्जारी जोसेफ और रेयान जॉन की गेंदबाजी के दम पर भारतीय टीम को 146 रन पर समेट दिया। भारतीय टीम ने इस मैच में काफी कोशिश की और इस लक्ष्य को लगभग बचा लेने में कामयाब भी हो गये थे लेकिन केसी कार्टी और कीमो पॉल ने आखिरी ओवर में नब्ज को संभाले रखा और वेस्टइंडीज को 5 विकेट से खिताब जिता दिया।

2018 में फिर ऑस्ट्रेलिया को मात देकर जीता भारत
2018 में भारतीय टीम ने एक बार फिर से ऑस्ट्रेलिया को फाइनल में हराकर चौथा खिताब जीतने का कारनामा किया। यह फाइनल मैच उसी जगह पर खेला गया था जहां पर भारत और ऑस्ट्रेलिया की टीम ने टूर्नामेंट का ओपनिंग मैच खेला था। पृथ्वी शॉ की कप्तानी वाली भारतीय टीम ने पहले मैच में भी कंगारू टीम को मात दी थी, जिसके बाद उसने फाइनल मैच में ऑस्ट्रेलिया को 8 विकेट से मात देकर एकतरफा जीत हासिल की। जोनाथन मर्लो की 76 रनों की पारी के चलते भारत ने 216 रनों का स्कोर खड़ा किया लेकिन भारत के लिये मनजोत कालरा (101) और हार्विक देसाई (47) ने शानदार पारियां खेली और टीम ने 38.5 ओवर्स में ही मैच जीत कर खिताब अपने नाम कर लिया।

2020 में बांग्लादेश से हारा भारत
साल 2020 में भारत और बांग्लादेश के बीच बेहद रोमांचक फाइनल मुकाबला देखा गया, जहां पर न सिर्फ मैदान पर बल्ले और गेंद की जंग देखने को मिली बल्कि खिलाड़ियों के बीच झगड़ा भी देखने को मिला। बांग्लादेश ने भारत को डकवर्थ लुइस नियम के तहत 3 विकेट से मात देकर अपनी पहली आईसीसी ट्रॉफी जीती। बांग्लादेश के लिये कप्तान एंकर अली ने रन चेज में अहम भूमिका निभाई और 43 रनों की पारी खेल कर 170 रन के लक्ष्य को 23 गेंद पहले ही हासिल कर लिया। बांग्लादेश के जीत के जश्न ने मैदान पर तनाव का माहौल बना दिया था, जिसके बाद दोनों टीमें हाथापाई के करीब आ गई थी। भारतीय टीम के कप्तान प्रियम गर्ग ने इसे बेहद खराब बताया था तो वहीं पर बांग्लादेश के कप्तान ने बाद में माफी मांगते हुए कहा कि ऐसा नहीं होना चाहिये था।
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