कैसा लगता है इतने अनुभव के बाद केवल एक ही फॉर्मेट खेलना, शिखर धवन ने बयां की सच्चाई

नई दिल्ली, 10 अगस्त: शिखर धवन एक ऐसे खिलाड़ी है जो काफी आध्यात्मिक है लेकिन उनका यह पक्ष नहीं लोगों को नहीं पता है। वे मैदान पर काफी हंसमुख नजर आते हैं और सोशल मीडिया पर मौज मस्ती करते हैं लेकिन इसके पीछे एक गंभीर आध्यात्मिक इंसान भी छुपा है। धवन अपने 37वें जन्मदिन की ओर पहुंच रहे हैं और वे चाहते हैं कि जब तक वह भारत के लिए खेले तब तक अपनी टीम के लिए एक अहम खिलाड़ी बने रहे, ना की टीम उनको बोझ की तरह ढोए।

टी20 में जगह मिलनी बंद

टी20 में जगह मिलनी बंद

धवन ने 2020 की वेस्टइंडीज सीरीज के अंत से अब तक 22 वनडे मुकाबले खेले हैं और 10 अर्धशतक के साथ 975 रन बनाए हैं जो किसी भी भारतीय द्वारा बनाए गए काफी सबसे ज्यादा रन है। धवन ने पीटीआई से बात करते हुए कहा है कि वह जितने परिपक्व है, जितने शांत है, यह उनके खेल में दिखाई देता है इसी वजह से उनके आंकड़े बेहतर है। इसके अलावा उन्होंने वनडे फॉर्मेट को भी समझा है जिसने रन बनाने में मदद की है। लेकिन शिखर धवन को टी20 में जगह मिलनी बंद हो चुकी है और टेस्ट मैच में तो उनके दरवाजे पहले से ही बंद है।

कैसा लगता है केवल एक ही फॉर्मेट खेलना

कैसा लगता है केवल एक ही फॉर्मेट खेलना

हालांकि, धवन इस बात से ज्यादा दुखी नहीं है। उनका कहना है कि वह ऐसा नहीं सोचते। अगर वे एक फॉर्मेट खेलते हैं तो इसी को अपना सब कुछ देने की कोशिश करेंगे क्योंकि वह बहुत पॉजिटिव इंसान हैं और अपने अंदर नकारात्मक सोच नहीं लाना चाहते।

धवन मानते हैं कि वह 36 साल की उम्र में अपने आपको काफी फिट महसूस करते हैं और उनके पास काफी कौशल भी है। वह चार चीजों पर जोड़ देते हैं जो उनकी ट्रेनिंग का हिस्सा है जिसमें जिम और स्किल सेशन के साथ-साथ रनिंग और योगा भी शामिल है।

आप मेरा प्लान भी ट्राई करके देख लीजिए

आप मेरा प्लान भी ट्राई करके देख लीजिए

धवन अब जल्दी ही जिंबॉब्वे सीरीज में भारत की कप्तानी करते दिखाई देंगे। उनका कहना है कि वह खाली समय में गुड़गांव में अपनी एकेडमी में खूब ट्रेनिंग करते हैं जहां पर वे स्थानीय नेट गेंदबाजों को हायर करते हैं।

एक कप्तान के तौर पर धवन खुद का आकलन करते हैं और कहते हैं कि वह हमेशा गेंदबाजों की हिसाब से ही कप्तानी करते हैं। लेकिन अगर गेंदबाजों की प्लानिंग के मुताबिक चीजें ठीक नहीं बैठती है तो एक प्लान B भी होता है जहां कप्तान को बॉलर के पास आना पड़ता है और उसको हौसला देना होता है और कहना होता है कि अब आप मेरा प्लान भी ट्राई करके देख लीजिए।

रोहित, द्रविड़ से चलती रहती हैं बातें

रोहित, द्रविड़ से चलती रहती हैं बातें

धवन मानते हैं कि खिलाड़ी और कप्तान के बीच में बातचीत होने से ही कप्तानी में अधिक परिपक्वता आती है। धवन रोहित शर्मा से भी बात कर लेते हैं, जब हिटमैन को ब्रेक मिलता है तब कप्तानी के बारे में बातें होती हैं।

धवन ने राहुल द्रविड़ को भी काफी बातचीत करने वाला इंसान बताया और कहा कि इससे खिलाड़ियों को अपने विचार व्यक्त करने में आसानी मिलती है। क्योंकि जब भी मीटिंग होती है तो राहुल द्रविड़ हर व्यक्ति को उसका विचार प्रकट करने की पूरी छूट देते हैं। और जब कई सारी राय बन जाती हैं तो खिलाड़ी एकजुट होते हैं और तय करते हैं कि क्या बेस्ट हो सकता है।

 बांसुरी क्यों बजा रहे हैं?

बांसुरी क्यों बजा रहे हैं?

धवन अपने उस मुश्किल समय को याद करते हैं जब उनको बहुत धैर्य दिखाने की जरूरत थी और उन्होंने ऐसा दिखाया भी है। इसलिए धवन खुद को एक शांत इंसान मानते हैं क्योंकि 2004 में अंडर-19 वर्ल्ड कप खेलने के बाद से उनको टेस्ट मैच खेलने के लिए 9 साल का वेट करना पड़ा। यह इंतजार बिना धैर्य के संभव नहीं था।

पिछले 4 साल से धवन बांसुरी बजाना सीख रहे हैं और सोशल मीडिया पर जगजीत सिंह के क्लासिक 'होठों से छू लो तुम मेरा गीत अमर कर दो' को लेकर भी काफी सुर्खियां बटोर चुके हैं। बांसुरी बजाना धवन के स्ट्रेस को खत्म करता है और जब भी उनके जीवन में कोई समस्या आती है तो वह आध्यात्मिकता की ओर रुख करते हैं।

शिवानी दीदी और गौर गोपाल दास को सुनकर शांति मिलती है

शिवानी दीदी और गौर गोपाल दास को सुनकर शांति मिलती है

धवन कहते हैं, मैं अपनी व्यक्तिगत जीवन में काफी उतार-चढ़ाव देख चुका हूं और मैं आध्यात्मिकता की वजह से ही उन सब से बाहर निकलने में कामयाब हो पाया हूं। मैं शिवानी दीदी और गौर गोपाल दास जैसे आध्यात्मिक गुरुओं को सुनना पसंद करता हूं। उनको सुनने से मुझे जो सीख मिलती है उससे मेरे अंदर निश्चित तौर पर एक शांत बनाता है। दमन अंत में अपनी फिलॉसफी जाहिर करते हुए कहते हैं कि अगर जीवन में सुकून पाना है तो सबसे पहले आपके दिमाग में मौजूद होना जरूरी है।

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