IPL Auction: टीमें कैसे तय करती हैं किस खिलाड़ी को खरीदना है, उसको कितनी रकम देनी है
नई दिल्लीः आईपीएल 2022 के लिए महा नीलामी का दौर कुछ ही दिनों में शुरू हो जाएगा। बेंगलुरु में 12 और 13 फरवरी को इंडियन प्रीमियर प्रीमियर लीग की 10 टीमें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों पर बोली लगाने के लिए अपना गणित आजमाएंगी। टीमों द्वारा नीलामी की तैयारियां काफी पहले से ही पूरी प्लानिंग बनाकर की जाती है। नीलामी के दिन आईपीएल की विभिन्न फ्रेंचाइजी अपने तय प्लान को अमलीजामा पहनाने के लिए ऑक्शन के मैदान में उतरती है और अपने पसंदीदा खिलाड़ियों को लेने की पूरी कोशिश करती है।

IPL Auction 2022
आईपीएल की नीलामी हर साल खिलाड़ियों के साथ-साथ फैंस के लिए भी उत्सुकता पैदा करती है लेकिन इस बार मामला और भी ज्यादा एक्साइटमेंट वाला है क्योंकि यह मेगा ऑप्शन है। इस बार कुल 10 टीमें आईपीएल के 15वें सीजन में खेलती हुए दिखाई देंगी जिसके लिए नीलामी में 590 खिलाड़ियों ने अपना नाम दिया है। नीलामी में खिलाड़ियों के अलग-अलग आधार मूल्य यानी बेस रेट होते हैं। बेस्ट प्राइस वह होता है जिससे कम मैं उस खिलाड़ी को नहीं लिया जा सकता। 2022 मेगा नीलामी में आप ₹20 लाख से लेकर 2 करोड रुपए तक के बेस प्राइस वाले खिलाड़ियों को देख सकते हैं। जैसे की हम बता चुके हैं कि नीलामी की तैयारियां टीमों द्वारा पहले से की जाती है तो आइए देखते हैं यह तैयारियां किस तरीके से की जाती हैं और एक टीम यह कैसे तय करती है कि उसको कौन-कौन से खिलाड़ी चाहिए और उन खिलाड़ियों के लिए रकम वह कैसे तय करती है।

IPL स्काउट टैलेंट सर्च करने का काम करते हैं-
बताना चाहेंगे कि किसी एक आईपीएल टीम को बनाने में पर्दे के पीछे कई लोगों की टीम होती है। आईपीएल में टैलेंट को सर्च करने का काम करने वाले लोग स्काउट कहलाते हैं। स्काउट कुछ-कुछ उसी तरह से काम करते हैं जैसे बीसीसीआई के सिलेक्टर काम करते हैं लेकिन आईपीएल के स्काउट का दायरा अंतरराष्ट्रीय होता है क्योंकि यहां पर देसी के साथ-साथ विदेशी खिलाड़ियों की भी भरमार होती है। ऐसे में एक स्काउट हर लेवल की क्रिकेट पर नजर बनाए रखता है, चाहे वह जिले में खेली जा रही हो, देश में खेली जा रही हो या राज्य में खेली जा रही हो। दुनिया में चल रही विभिन्न किस्म की T20 लीग पर भी स्काउट की नजरें आसानी से जमीं रहती हैं। कहीं पर भी कोई ऐसा टैलेंट मिल जाए जो आईपीएल की किसी टीम में फिट होता हो तो वह टीम उसको लेने के लिए जोर लगाती है।

कैसे तय होती है खिलाड़ियों की रकम-
स्काउट में अधिकतर पूर्व क्रिकेटर ही होते हैं जिनका काम एक खिलाड़ी को तलाश करने के लिए उसकी जानकारी हासिल करना उसकी कमी खूबियां जांचना और उसके खेल पर बारीक रिसर्च करना शामिल होता है। इसके बाद खिलाड़ी की कीमत तय करने का काम किया जाता है। एक प्लेयर की कीमत उसकी तत्कालीन फॉर्म के आधार पर भी तय होती है और खिलाड़ी की लॉन्ग टर्म में हासिल की गई उपलब्धियों, भविष्य में उसको लेकर बनी हुई संभावनाएं और खिलाड़ी की उम्र व फिटनेस भी काफी हद तक उसकी कीमत को तय करती है। आमतौर पर ऑलराउंडर की कीमत ज्यादा होती है क्योंकि वह एक की टीम में बैलेंस प्रदान करते हैं।

एक खिलाड़ी पर पहले ही रकम सेट करके रख ली जाती है-
इसके अलावा हर टीम को पता होता है कि उसको अपनी प्लेइंग इलेवन में किस-किस तरह के खिलाड़ियों की तलाश है और वे नीलामी में उतरने से पहले मॉक ऑप्शन की प्रक्रिया को अपनाते हैं। यह ठीक उसी तरह से है जैसे कि खिलाड़ी किसी मुकाबले में उतरने से पहले नेट में जाकर प्रैक्टिस करते हैं। सभी टीमें नीलामी में उतरने से पहले अपने बजट का बारीकी से अध्ययन कर चुकी होती है। जैसा की समाचार एजेंसी की रिपोर्ट में बताया गया है कि आरसीबी ने वेस्टइंडीज के बेहतरीन ऑलराउंडर जेसन होल्डर को लेने के लिए ₹12 करोड़ रुपए रिजर्व रखे हुए हैं। यानी आरसीबी इस ऑलराउंडर को हासिल करने के लिए इतनी हद तक बोली लगा सकती है लेकिन अगर मामला ऊपर जाता है तो फिर प्लान बदलना भी पड़ता है।

कुछ खिलाड़ी भविष्य के लिए भी लिए जाते हैं-
जब भी टीम किसी खिलाड़ी को लेने का मन बना लेती है तो वह नीलामी में उस खिलाड़ी की बोली प्रक्रिया शुरू होते ही सबसे पहले कीमत लगाती हैं और जितना प्राइस उस खिलाड़ी के लिए टीम ने अपनी प्लानिंग में सेट किया है उस कीमत तक वह उस खिलाड़ी की बोली को खींच सकती है। आईपीएल की नीलामी में हर तरह के खिलाड़ी उतरते हैं जिसमें से अनकैप्ड खिलाड़ी भी काफी होते हैं ऐसे खिलाड़ियों की बोली आमतौर पर कम लगती है और उनका बेस प्राइस 20, 30-40 लाख होता है। कई बार फ्रेंचाइजी ऐसे खिलाड़ियों को अपने सीजन में भले ही नहीं खिलाती लेकिन वह उनकी कम उम्र को देखते हुए अपनी टीम में उनको शामिल करती है और भविष्य के लिए तराशने का काम करती है।












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