IPL 2023 : सचिन तेंदुलकर की खिलखिलाहट और धोनी की वह मोहक मुस्कान
IPL 2023: सचिन, धोनी के बचपन के हीरो रहे हैं। धोनी उन्हें अपना आदर्श मानते थे। लेकिन वही तेंदुलकर उनकी कप्तानी में छह साल तक खेले।

मुम्बई इंडियंस और चेन्नई सुपर किंग्स के मैच के दौरान वानखेड़े स्टेडियम पर एक खास नजारा देखने के मिला। टॉस से पहले मैदान पर भारत रत्न सचिन तेंदुलकर और पद्म भूषण महेन्द्र सिंह धोनी की आत्मीय मुलाकात, एक दुर्लभ दृश्य था। दोनों दिल खोल कर हंसे। मुसकुराये। फिर अपनेपन के साथ बात भी की। सचिन तेंदुलकर और महेन्द्र सिंह धोनी का रिश्ता थोड़ा हट कर है और कई मायनों में अनोखा है। सचिन, धोनी के बचपन के हीरो रहे हैं। धोनी उन्हें अपना आदर्श मानते थे। लेकिन वही तेंदुलकर उनकी कप्तानी में छह साल तक खेले। इसमें सबसे खास बात ये थी कि धोनी को किसी और नहीं बल्कि सचिन ने ही कप्तान बनवाया था। सचिन तेंदुलकर जैसे महान खिलाड़ी का कप्तान होना धोनी के लिए बहुत गौरव की बात थी। लेकिन उन्होंने हमेशा अपने बचपन के नायक का सम्मान किया। सचिन के विशाल आभामंडल को देख कर धोनी सकुचाये रहते थे। कप्तान होने के बावजूद वे मैदान से बाहर सचिन से बात में बहुत शर्माते थे।
तेंदुलकर जब पहली बार धोनी से मिले
भारत की टीम 2004 में बांग्लादेश के दौरे पर गयी थी। सौरव गांगुली कप्तान थे। टेस्ट मैच के लिए दिनेश कार्तिक और वनडे के लिए महेन्द्र सिंह धोनी को विकेटकीपर चुना गया था। इस दौरे से ही धोनी का अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट जीवन शुरू होने वाला था। वनडे सीरीज से पहले एक प्रैक्टिस मैच में सचिन ने पहली बार धोनी को देखा था। इसके पहले उन्होंने घरेलू क्रिकेट में धोनी का नाम नहीं सुना था क्यों कि वे राष्ट्रीय टीम के साथ मैच में मशरूफ रहते थे। उन्होंने अभ्यास के दौरान धोनी को दो चौके मारते हुए देखा। यह देख कर सचिन अपने दोस्त सौरव गांगुली के पास गये और कहा, दादा ! क्या देखे उसके शॉट्स ? उसके हाथ में एक अलग किस्म का झटका है जो वह गेंद को हिट करते समय इस्तेमाल करता है। यह हिटिंग बिल्कुल अगल और विशिष्ट है। वह जिस तरह गेंद को हिट कर रहा है, उससे स्पेशल खिलाड़ी की झलक मिल रही है। उस समय सचिन की टीम और क्रिकेट बोर्ड में इतनीइज्जत थी कि उनकी कही किसी बात का बहुत बड़ा मतलब होता था।
कैसा था धोनी का वनडे डेब्यू
23 दिसम्बर 2004 को महेन्द्र सिंह धोनी ने वनडे क्रिकेट में डेब्यू किया। बांग्लादेश के खिलाफ पहले वनडे मैच को भारत ने तो जीत लिया लेकिन धोनी का डेब्यू बहुत निराशाजनक रहा। वे 0 पर रनआउट हो गये। दूसरे वनडे में धोनी ने 11गेंदों पर 12 रन बनाये और दो चौके लगाये। यह मैच भारत भारत हार गया। तीसरे वनडे में धोनी ने नाबाद 7 रन बनाये और अपने अंतर्राष्ट्रीय करियर का पहला छक्का लगाया। भारत ने यह मैच 91 रनों से जीता था। बांग्लादेश के खिलाफ वनडे सीरीज में धोनी का प्रदर्शन बहुत साधारण रहा। लेकिन सचिन तेंदुलकर उनकी आंतरिक क्षमता से वाकिफ थे। उन्होंने धोनी को नौतिक समर्थन जारी रखा।
ऐसे हुई सचिन की धोनी से मजबूत बॉन्डिंग
पांच-छह महीने में सचिन, धोनी से और ज्यादा प्रभावित हुए। अप्रैल 2005 में पाकिस्तान की टीम भारत के दौरे पर आयी थी। भारत के कप्तान सौरव गांगुली थे। भारत और पाकिस्तान के बीच कोच्ची में पहला वनडे मैच खेला गया था। पहले खेलते हुए भारत ने सहवाग और द्रविड के शतक की मदद से 281 रन बनाये। 282 के टारगेट का पीछा करने के लिए पाकिस्तान की टीम मैदान पर उतरी। इस मैच में सचिन ने अपनी गेंदबाजी से खेल पलट दिया था। जब सचिन बॉलिंग के लिए आये तो उन्होंने धोनी से पूछा, लेग स्पिन डालूं या आफ स्पिन, या फिर सीम को ऊपर रख कर डालूं ? दूसरे लोगों ने बाद
में धोनी के क्रिकेट नॉलेज का लोहा माना लेकिन सचिन ने शुरू में ही उनकी इस योग्यता को ताड़ लिया था। सचिन ने इस मैच में धोनी से अपनी बॉलिंगको लेकर इसलिए सवाल पूछा क्यों कि कीपर होने के कारण वे पिच के मिजाज को अच्छी तरह भांप रहे थे। धोनी तब नये-नये टीम में आये थे और वे सचिन का बहुत लिहाज करते थे। इस सवाल पर पहले तो वे हड़बड़ाये, फिर आत्मविश्वास से कहा, लेग स्पिन ही ठीक रहेगी। धोनी की इस सलाह ने कमाल कर दिया। सचिन ने 10 ओवर में 1 मेडन रखते हुए 50 रन दे कर 5 विकेट लिये। सचिन की इस बॉलिंग से पाकिस्तान की कमर टूट गयी और वह 87 रनों से मैच हार गया।
सचिन, सौरव के भरोसेमंद
सचिन का धोनी पर यह भरोसा भारत के बहुत काम आया। धोनी ने अपने पांचवें वनडे मैच में ही शतक लगा कर अपनी काबिलियत साबित कर दी। तब तक धोनी सचिन और सौरव के भरोसेमंद खिलाड़ी बन चुके थे। विशाखापट्टनम में भारत और पाकिस्तान के बीच दूसरा वनडे खेला गया था। इस मैच में सचिन और सहवाग ने ओपनिंग की थी। लेकिन जब सचिन केवल 2 रनों पर आउट हो गये तो सौरव गांगुली ने धोनी को वन डाउन बैटिंग के लिए भेज दिया। फिर तो धोनी ने पाकिस्तानी गेंदबाजों की बखिया उधेड़ कर रख दी।
उन्होंने केवल 88 गेंदों में शतक पूरा कर लिया। 123 गेंदों पर 148 रन बनाये। इसके अलावा जनवरी 2006 में धोनी ने पाकिस्तान के खिलाफ फैसलाबाद टेस्ट मैच में 148रनों की तेज-तर्रार पारी खेली थी। इस पारी में उन्होंने 19 चौके और 4 छक्के लगाये थे। धीरे-धीरे धोनी भारत के यशस्वी क्रिकेटर बन गये। समय चाहे जितना भी गुजर जाए, धोनी और सचिन तेंदुलकर जब भी मिलेंगे, वह नजारा बहुत खास ही होगा।












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