IND vs AUS : पंजा के साथ अर्धशतक, अब जडेजा, अश्विन और हैडली एक कतार में
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ नागपुर टेस्ट में जडेजा ने पहली पारी में 5 विकेट लेने के अलावा फिफ्टी भी जमाई, उनसे पहले भी कुछ खिलाड़ी ऐसा कर चुके हैं।

IND vs AUS 1st Test: किसी टेस्ट मैच में 5 विकेट लेना और अर्धशतक बनाना एक गौरवपूर्ण उपलब्धि है। रवीन्द्र जडेजा ने छठी बार ये कारनामा किया। अब वे महान रिचर्ड हैडली और आर अश्विन की बराबरी में खड़े हैं। इस सूची में इंग्लैंड के इयान बॉथम पहले पायदान पर हैं। उन्होंने 11 बार पांच विकेट के साथ-साथ अर्धशतक भी बनाया है। दूसरे पायदान पर बांग्लादेश के शाकिबल हसन हैं। उन्होंने 10 बार ये कामयाबी पायी है। आइसीसी रैंकिंग के मुताबिक रवीन्द्र जडेजा अभी दुनिया के नम्बर एक टेस्ट ऑलराउंडर हैं। अश्विन दूसरे और शाकिबल हसन तीसरे स्थान पर हैं।
एक टेस्ट में शतक और 5 विकेट
अगर कोई ऑलराउंडर पांच या इससे अधिक विकेट लेने के साथ-साथ शतक भी बना दे तो फिर कहना ही क्या। टेस्ट क्रिकेट में तो ये स्वर्णिम प्रदर्शन है। इस विश्व कीर्तिमान की सूची में भी इयान बॉथम का ही दबदबा है। उन्होंने 5 बार टेस्ट मैच में शतक और पांच विकेट भी लिये हैं। अभी जो खिलाड़ी खेल रहे हैं उनमें आर अश्विन ने तीन बार, शाकिबल हसन ने दो बार और रवीन्द्र जडेजा ने एक बार यह विशिष्ट उपलब्धि प्राप्त की है। रवीन्द्र जडेजा ने पिछले साल मोहाली टेस्ट में ऐतिहासिक प्रदर्शन किया था। उन्होंने श्रीलंका के खिलाफ नाबाद 175 रन बनाये थे और बॉलिंग में 41 रन पर 5 विकेट लिये थे। रन के लिहाज से जडेजा बॉथम, अश्विन और शाकिबल हसन से आगे हैं। पंजा के साथ बॉथम का उच्चतम स्कोर नाबाद 149 है जब कि शाकिबल का 144 है। अश्विन का अधितम स्कोर 113 है। इस मामले में सबसे शानदार रिकॉर्ड वेस्टइंडीज के डेनिस एटकिंसन का है। उन्होंने 1955 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 219 रन बनाय थे और बॉलिंग में 56 रन पर 5 विकेट लिये थे।
गोल्डन जुबली टेस्ट मैच
इयान बॉथम विलक्षण प्रतिभा वाले ऑलराउंडर थे। उनकी असाधारण क्षमता को समझने के लिए ये कहानी जरूरी है। भारतीय क्रिकेट बोर्ड के 50 साल पूरा होने पर फरवरी 1980 में इंग्लैंड के साथ गोल्डन जुबली टेस्ट मैच खेला गया था। एक मात्र टेस्ट मैच के लिए इंग्लैंड की टीम भारत आयी थी। भारत के कप्तान गुंडप्पा विश्वनाथ और इंग्लैंड के माइक ब्रेयरली थे। भारत ने टॉस जीत कर पहले बल्लेबाजी की। लेकिन ये फैसला गलत साबित हुआ। गावस्कर के 49, किरमानी के 40, बेंगसरकर के 34, संदीप पाटिल के 30 रनों की बदौलत भारत ने 242 रन बनाये। बॉथम ने 58 रन दे कर 6 विकेट लिये।
आउट बल्लेबाज को फिर बैटिंग के लिए बुलाया
इंग्लैंड की पहली पारी शुरु हुई तो इसका टॉप ऑर्डर बिखर गया। कपिल देव, कर्सन घावरी, रोजर बिन्नी ने 58 रन पर ही इंग्लैंड के 5 बल्लेबाजों को पवेलियन भेज दिया। 5 विकेट पर 57 रन बना कर इंग्लैंड संघर्ष कर रहा था। इयान बॉथम और विकेटकीपर बॉब टेलर क्रीज पर थे। स्कोर अभी 85 पर पहुंचा था कि टेलर ने कपिल देव की एक गेंद खेलने की कोशिश की जो उनके बल्ले का एज लेकर कीपर किरमानी के पास चली गयी। अंपायर हनुमंत राव ने टेलर को कॉट बिहाइंड आउट दे दिया। लेकिन भारत के कप्तान विश्वनाथ ने इस कैच को अमान्य कर टेलर को बैटिंग के लिए वापस बुला लिया। फिर तो मैच का पास ही पलट गया। दोनों ने 171 रनों की साझेदारी कर इंग्लैंड को संभाल लिया। टेलर 43 रन बना कर आउट हुए जब कि बॉथम ने 114 रनों की पारी खेली। इंग्लैंड ने 296 रन बनाये।
बॉथम के 13 विकेट और शतक
भारत की दूसरी पारी शुरू हुई तो बॉथम ने बॉलिंग में और बड़ा कमाल कर दिया। कपिल देव ने 45 और यशपाल शर्मा ने 27 रन बनाये। बाकी किसी का बल्ला नहीं चला। भारत की पारी सिर्फ 149 पर ढह गयी। इयान बॉथम ने 48 रन देकर 7 विकेट लिये। अब इंग्लैंड को जीत के लिए 96 रन बनाने थे। गूच ने 49 और बायकॉट ने 43 रन बना कर दस विकेट से विजय दिला दी। इयान बॉथम ने इस टेस्ट में इतिहास रच दिया। उन्होंने कुल 13 विकेट लिये और शतक भी बनाया। आज तक टेस्ट इतिहास में फिर ऐसा कोई नहीं सक सका। यह टेस्ट मैच भारत ने अपने क्रिकेट बोर्ड की स्वर्ण जयंती को यादगार बनाने के लिए आयोजित किया था। लेकिन वह दुखद सपना बन गया। अकेले बॉथम ने भारत को पराजित कर दिया। ये तो 43 साल पहले की बात है। तब अंपायर का फैसला अटल होता था। कोई उसे चुनौती नहीं दे सकता था। फिर भी भारतीय कप्तान विश्वनाथ ने आउट के फैसले को बदलने पर मजबूर कर दिया था। इसका नतीजा ये रहा कि भारत टैस्ट मैच हार गया।












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