SRH से हार के बाद मुश्किल हुआ टॉप-2 का रास्ता, क्या अब भी बची है विराट कोहली की टीम की उम्मीद?

लखनऊ की पिच पर सनराइजर्स हैदराबाद ने आरसीबी (Royal Challengers Bengaluru) के टॉप-2 के सपने को जोर का झटका दिया। 42 रन की हार ने विराट कोहली की टीम की टॉप-2 की उम्मीदों को बड़ा झटका दिया है। अगर ये मैच आरसीबी जीत जाती, तो टॉप-2 की रेस में मज़बूती से बनी रहती, लेकिन अब हालात पेचीदा हो गए हैं। नेट रन रेट को भी नुकसान पहुंचा है और अब सिर्फ जीत काफी नहीं, दूसरों के नतीजों पर भी निगाह रखनी होगी।


SRH से हार ने आरसीबी की राह मुश्किल की
लखनऊ में खेले गए मुकाबले में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु को सनराइजर्स हैदराबाद के हाथों 42 रन से हार का सामना करना पड़ा। यह हार सिर्फ दो अंक गंवाने की नहीं थी, बल्कि इससे आरसीबी की टॉप-2 में पहुंचने की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा। अगर यह मैच जीत लिया गया होता, तो विराट कोहली की टीम सीधे टॉप-2 के करीब पहुंच जाती। लेकिन अब हालात उलझ गए हैं।

royal challengers bangalore

नेट रन रेट ने बिगाड़ा गणित
हार का असर सिर्फ अंकतालिका पर नहीं पड़ा, नेट रन रेट (NRR) पर भी बुरा असर हुआ है। इस हार के बाद आरसीबी 17 अंकों के साथ तीसरे नंबर पर है, लेकिन उनका नेट रन रेट गुजरात और पंजाब से पीछे चला गया है। यानी अगर आरसीबी अगला मैच जीत भी लेती है, तब भी नेट रन रेट की वजह से उसे टॉप-2 की पोजिशन मिलना मुश्किल हो सकता है।

अब सिर्फ जीत नहीं, बड़ी जीत चाहिए
आरसीबी के पास अब एक ही लीग मैच बचा है। उसे न सिर्फ यह मुकाबला जीतना है, बल्कि बड़े अंतर से जीतना ज़रूरी होगा। इससे उनका नेट रन रेट सुधरेगा, जो टॉप-2 की रेस में बने रहने के लिए बेहद ज़रूरी है। अगर वो यह कर पाती है, तो उसे फिर दूसरे मैचों के नतीजों का इंतज़ार करना होगा।

दूसरी टीमों के नतीजे तय करेंगे किस्मत
अब मामला पूरी तरह आरसीबी के हाथ में नहीं है। उन्हें उम्मीद करनी होगी कि पंजाब किंग्स या गुजरात टाइटंस में से कोई टीम अपना अगला मैच हार जाए। ऐसे में आरसीबी के पास टॉप-2 में पहुंचने का एक मौका बन सकता है - बशर्ते कि वो अपना आखिरी मैच धमाकेदार तरीके से जीते।

उम्मीद बाकी है, लेकिन रास्ता टेढ़ा है
फिलहाल विराट कोहली की टीम की टॉप-2 की उम्मीदें पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। लेकिन अब टॉप-2 सिर्फ उनके प्रदर्शन से नहीं, बाकी टीमों के नतीजों और नेट रन रेट के जोड़-घटाव से तय होगा। आरसीबी को खुद जीतना ही होगा, और दूसरों से हार की दुआ भी करनी होगी। यानी उम्मीदें ज़िंदा हैं, मगर हालात अब उनके कंट्रोल में नहीं हैं।

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