Gautam Gambhir क्या छोड़ देंगे टीम इंडिया का साथ? आखिर कब तक संभालेंगे हेड कोच की जिम्मेदारी!
Gautam Gambhir Head Coach Contract: भारतीय क्रिकेट टीम के हेड कोच गौतम गंभीर (Gautam Gambhir) ने भविष्य को लेकर एक बड़ा मास्टर प्लान तैयार किया है। गंभीर ने बीसीसीआई (BCCI) से अपने कार्यकाल को 2028 के टी-20 वर्ल्ड कप (ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड) तक बढ़ाने की मांग की है। फिलहाल उनका कॉन्ट्रैक्ट साल 2027 के वनडे वर्ल्ड कप तक ही सीमित है।
गंभीर ने बताया कब तक करेंगे टीम की कोचिंग (Gautam Gambhir Head Coach Contract)
गौतम गंभीर चाहते हैं कि उन्हें अगले टी-20 वर्ल्ड कप और 2028 में होने वाले लॉस एंजिल्स ओलंपिक तक टीम इंडिया को संवारने का समय मिले। गंभीर का मानना है कि एक बेहतर कोचिंग सेटअप ही टीम को बड़े टूर्नामेंट्स में लगातार जीत दिला सकते हैं। कोच गंभीर ने बोर्ड के सामने यह मांग भी रखी है कि सूर्यकुमार यादव को ही टी-20 टीम का कप्तान बनाए रखा जाए। सूर्या की कप्तानी में ही भारत ने इस साल टी-20 वर्ल्ड कप जीता है।

सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में भारत ने जीता था टी-20 वर्ल्ड कप
हालांकि, सूर्या की कप्तानी को लेकर बोर्ड के भीतर अब दो राय बनने लगी हैं। वर्ल्ड कप जीतने के बावजूद सूर्यकुमार यादव की फॉर्म चिंता का विषय बनी हुई है। उन्होंने टूर्नामेंट में 242 रन बनाए, जिसमें अमेरिका के खिलाफ 84 रनों की पारी शानदार थी। लेकिन उसके बाद वे निरंतरता नहीं दिखा सके। मुंबई इंडियंस के लिए खेलते हुए सूर्या ने शुरुआती 4 मैचों में केवल 106 रन बनाए हैं। दिल्ली के खिलाफ 51 रनों की पारी को छोड़ दें तो उनका बल्ला अब तक खामोश रहा है।
बीसीआई ने सूर्या की कप्तानी पर कही बड़ी बात
पीटीआई (PTI) की रिपोर्ट के मुताबिक बीसीसीआई के अधिकारी सूर्या की बल्लेबाजी में आ रही गिरावट पर नजर रखे हुए हैं। बोर्ड के सूत्रों का कहना है कि सूर्या फिलहाल कप्तान हैं और इंग्लैंड दौरे पर टीम की कप्तानी करेंगे। लेकिन साल 2028 तक उनकी कप्तानी बरकरार रहेगी या नहीं, यह पूरी तरह उनके निजी प्रदर्शन पर निर्भर करेगा।
आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ होने वाली द्विपक्षीय सीरीज सूर्या के लिए अग्निपरीक्षा जैसी होगी। गौतम गंभीर का साल 2028 तक का समय मांगना यह बताता है कि वे टीम में एक लॉन्ग-टर्म बदलाव चाहते हैं। हालांकि, सूर्यकुमार यादव के लिए चुनौतियां बढ़ गई हैं। 35 साल की उम्र और गिरता फॉर्म उनके नेतृत्व पर सवाल खड़े कर रहा है। गंभीर भले ही उनके पक्ष में हों, लेकिन बोर्ड का रुख साफ है कि अगर कप्तान के बल्ले से रन नहीं निकलेंगे तो 2028 की राह उनके लिए आसान नहीं होगी।












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