स्पिन के स्वर्णकाल में जब सुनील गावस्कर को डालना पड़ता था पहला ओवर
भारत के महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने स्पिन के स्वर्णकाल में भी अपनी टीम के लिए लंबे समय के लिए पहला ओवर डाला है।

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ नागपुर टेस्ट में विजय के बाद भारतीय स्पिनरों का पूरी दुनिया में डंका बज रहा है। ऐसा लगता है कि भारत अपने स्वर्णिम इतिहास को दुहरा रहा है। अब स्थिति ये है कि अश्विन, रवीन्द्र जडेजा, अक्षर पटेल और कुलदीप यादव को एक साथ अंतिम एकादश में रखने की मांग हो रही है। यह परिदृश्य 1970 के दशक के शुरुआती दिनों का है। तब भारतीय टीम में चार स्पिनर भी एक साथ खेलते थे। इसकी वजह से महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर को नयी गेंद फेंकनी पड़ती थी ताकि वह कुछ पुरानी हो जाए तो स्पिनर उस पर अपना जौहर दिखा सकें। यह कितने आश्चर्य की बात है कि 1971 के जिस टेस्ट में गावस्कर ने बल्लेबाज के रूप में डेब्यू किया था उसमें उन्होंने बॉलिंग भी की थी। आम तौर पर गावस्कर की बॉलिंग की बात नहीं होती। लेकिन उन्होंने 125 टेस्ट मैचों में 63.2 ओवर गेंदबाजी की है और जहीर अब्बास के रूप में एक विकेट भी लिया है।
2012 में परिदृश्य बिलकुल उल्टा घुम गया
लेकिन 2012 के आते आते भारतीय क्रिकेट का परिदृश्य बिल्कुल उल्टा घुम गया। स्पिनरों के शहंशाह कहे जाने वाले भारत की टेस्ट टीम से स्पिनर गायब हो गये। 1970 के दशक में गावस्कर बस नाम के लिए मीडियम फास्ट करते थे तो 2012 में वीरेन्द्र सहवाग पार्ट टाइम स्पिन करने लगे। तब तक भारत भी उन देशों की कतार में पहुंच गया जब प्लेइंग इलेवन में केवल तेज गेंदबाज हुआ करते थे। खास कर विदेशी पिचों पर। 2012 के पर्थ टेस्ट में भारतीय गेंदबाजी का आक्रमण जहीर खान, उमेश यादव, आर विनय कुमार और इशांत शर्मा संभाल रहे थे। वीरेन्द्र सहवाग ने पार्ट टाइम स्पिनर के रूप में बॉलिंग की थी। 2018 के जोहांसबर्ग टेस्ट में तो भारतीय टीम 5 तेज गेंदबाजों के साथ मैदान में उतरी थी- भुनेश्वर कुमार, जसप्रीत बुमराह, इशांत शर्मा, मोहम्मद शमी और हार्दिक पांड्या। 2018 के पर्थ टेस्ट में इशांत शर्मा, जसप्रीत बुमराह, उमेश यादव और मोहम्मद शमी खेले थे। स्पिनर की भूमिका बल्लेबाज मुरली विजय ने निभायी थी। ये बहुत बड़ा बदलाव था क्यों कि आज से 50-55 साल पहले गेंदबाजी का सारा दारोमदार स्पिनरों पर रहता था।
2023 में भारतीय पिचों पर स्पिनरों का जलवा
नागपुर टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया के 20 विकेट में से 15 विकेट स्पिनरों ने लिये। अगर भारत की तरफ से चार स्पिनर खेलते हैं तो टीम का स्वरूप क्या होगा ? मोहम्मद शमी या सिराज में से किसे बाहर किया जाएगा ? क्या विराट कोहली गावस्कर की तरह कामचलाऊ तेज गेंदबाजी करेंगे ? सुनील गावस्कर ने मार्च 1971 में वेस्टइंडीज के विरुद्ध पोर्ट ऑफ स्पेन से अपने टेस्ट जीवन की शुरुआत की थी। उन्होंने पहली पारी में 67 और दूसरी पारी में नाद 67 रन बनाये थे। इसके अलावा उन्होंने वेस्टइंडीज की पहली पारी में एक ओवर गेंदबाजी भी की थी जिसमें 9 रन दिये थे। उस समय़ भारतीय टीम में स्पिन बॉलिंग का जिम्मा तीन महान गेंदबाज संभाल रहे थे- बिशन सिंह बेदी, श्रीनिवास वैंकटराघवन और इरापल्ली प्रसन्ना। गावस्कर और एकनाथ सोल्कर पार्ट टाइम मध्यमगति के गेंदबाज थे। सलीम दुर्रानी और आबिद अली ऑलराउंडर के रूप में शामिल थे।
1971 के इंग्लैंड दौरे में कोई तेज गेंदबाज नहीं
भारतीय टीम ने जुलाई 1971 में इंग्लैंड का दौरा किया था। इस टीम में कोई जेनुइन मीडियम पेसर नहीं था। आबिद अली, एकनाथ सोल्कर और सुनील गावस्कर ने ही मीडियम पेसर की भूमिका निभायी थी। मैनचेस्टर के दूसरे टेस्ट में गावस्कर ने 12 ओवर गेंदबाजी की थी जिसमें 3 मेडन रखते हुए 37 रन दिये थे। गावस्कर को टेस्ट क्रिकेट में विकेट के लिए बहुत इंजार करना पड़ा। 1978 में पाकिस्तान के खिलाफ उनकी ये मुराद पूरी हुई। फैसलाबाद टेस्ट की पहली पारी में जहीर अब्बास ने 176 रनों की पारी खेली थी। दूसरी पारी में भी वे शतक के नजदीक थे। जब वे 96 रन पर थे तब गावस्कर बॉलिग के लिए आये। उन्होंने जहीर को चेतन चौहान हाथों कैच करा कर 96 रनों पर आउट कर दिया। गावस्कर का बॉलिंग विश्लेषण था- 5 ओवर 34 रन 1 विकेट। स्पिनरों के स्वर्णकाल में ऐसा भी हुआ कि गावस्कर को मैच का पहला ओवर डालना पड़ा।












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