कोहली की तरह ही की थी करियर की शुरुआत पर अधूरा रह गया सपना, पूर्व क्रिकेटर ने बताया क्या बना फर्क

नई दिल्ली। पिछले दो दशक में भारतीय क्रिकेट ने दुनिया भर में अपनी अगल पहचान बनायी है, इस दौरान उसके न सिर्फ राष्ट्रीय टीम के खिलाड़ियों ने बल्कि घरेलू क्रिकेट के खिलाड़ियों ने भी शानदार खेल दिखाया है और मौजूदा समय में भारत के पास दुनिया का सबसे मजबूत घरेलू क्रिकेट स्ट्रक्चर है, जिसके दम पर बोर्ड चाहे तो एक साथ 2 से 3 टीमें अंतर्राष्ट्रीय मैच खेलने के लिये उतार सकता है। हाल ही में वेस्टइंडीज की मेजबानी में खेले गये अंडर 19 विश्वकप में भारतीय टीम ने पांचवी बार खिताब जीता और इस प्रारूप में सबसे ज्यादा कामयाब देश का रिकॉर्ड अपने नाम रखा। भारतीय टीम ने अंडर 19 विश्वकप में 5 बार खिताब जीता है तो 3 बार रनर्स अप रहे हैं।
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भारत ने मोहम्मद कैफ (2000), विराट कोहली (2008), उन्मुक्त चंद (2012), पृथ्वी शॉ (2018) और यश धुल (2022) की कप्तानी में खिताब जीता है। किसी भी युवा क्रिकेटर के लिये देश के लिये अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में खेलना बहुत बड़े सपने की तरह होता है और भारत में अंडर 19 की सफलता को बरकरार रखते हुए राष्ट्रीय टीम में जगह बनाना बड़ा मुश्किल काम होता है, क्योंकि 5 बार खिताब जीतने वाली भारत की अंडर 19 टीमों में से कुछ ही खिलाड़ी ऐसे हुए हैं, जिन्होंने नेशनल टीम में जगह बनाने का कारनामा किया है, जबकि कुछ खिलाड़ियों के सितारे अंडर 19 विश्वकप के बाद धूमिल पड़ गये।
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कभी कहे जाते थे अगले विराट कोहली, फिर लेना पड़ा संन्यास
इसका सबसे बड़ा उदाहरण अंडर 19 विश्वकप का 2008 विश्वकप जिताने वाले कप्तान विराट कोहली और 2012 का खिताब दिलाने वाले उन्मुक्त चंद हैं, जहां पर विराट कोहली दुनिया के सबसे बड़े क्रिकेटर के रूप में अपना नाम कमा चुके हैं तो वहीं पर उन्मुक्त चंद सफलता नहीं हासिल करने के बाद भारतीय क्रिकेट से संन्यास लेने पर मजबूर हो गये। भारत के पूर्व क्रिकेटर निखिल चोपड़ा ने इन दोनों क्रिकेटर्स की किस्मत के बीच आये अंतर पर अपनी राय दी है।
उल्लेखनीय है कि उन्मुक्त चंद ने जब भारत को अंडर 19 विश्वकप जिताया था तो उनके बल्लेबाजी के अंदाज को देखते हुए उन्हें भारतीय क्रिकेट का अगला विराट कोहली कहा जा रहा था। हालांकि अंडर 19 विश्वकप की सफलता को वो घरेलू क्रिकेट में दोहरा नहीं सके और इसके चलते उन्हें राष्ट्रीय टीम में सेलेक्शन का मौका नहीं मिला। उन्मुक्त चंद ने पिछले साल इससे निराश होकर भारतीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया और यूएसए से खेलने के लिये अमेरिक शिफ्ट हो गये। पिछले महीने वो ऑस्ट्रेलिया की बिग बैश लीग में भी खेलते नजर आये थे।

अंडर 19 खिलाड़ियों के लिये अहम होता है यह दौर
खेलनीति के यूट्यूब चैनल पर बात करते हुए निखिल चोपड़ा ने अंडर 19 विश्वकप जीतने वाले इन दोनों कप्तानों पर अपनी राय दी और बताया कि ऐसा क्या फर्क रहा जिसकी वजह से घरेलू क्रिकेट का कोहली कहने के बावजूद उन्मुक्त चंद राष्ट्रीय स्तर पर कामयाब नहीं हो सके।
उन्होंने कहा,'भारतीय खिलाड़ियों के लिये अंडर 19 क्रिकेट से रणजी ट्रॉफी में होने वाला ट्रांजिशन का समय काफी अहम होता है, यह वो समय होता है जब आप एक युवा लड़के से बड़े खिलाड़ियों के बीच पहुंचते हैं। आपको युवा करियर समाप्त हो चुका है और अब आपको अपनी उस सफलता को रणजी ट्रॉफी के स्तर पर दोहराना होता है।'

किस वजह से उन्मुक्त नहीं बना पाये टीम में जगह
निखिल चोपड़ा ने आगे बात करते हुए बताया कि विराट कोहली ने जब विश्वकप का खिताब जीता तो उसके बाद उन्हें दिल्ली की टीम से खेलने का मौका मिला। घरेलू स्तर पर अच्छा प्रदर्शन करने के बाद उन्हें मौका मिला लेकिन जब वो उसका फायदा नहीं उठा सके तो बाहर भी कर दिया गया। हालांकि कोहली ने दोबारा से घरेलू क्रिकेट में रनों का अंबार लगाया और फिर से भारतीय टीम में जगह बनायी। वहीं उन्मुक्त चंद की बात करें तो वो अंडर 19 की सफलता को घरेलू स्तर पर दोहरा नहीं सके। बेशक उनके पास वो टैलेंट था जो उन्हें कोहली की तरह बनाता था लेकिन वो अपने टैलेंट और काबिलियत के प्रदर्शन में नहीं बदल सके। भारतीय टीम में जगह बनाने के लिये आपको यह साबित करना होता है कि आप बाकियों से ऊपर हैं।
गौरतलब है कि जहां पर विराट कोहली ने 7 सालों तक भारतीय टीम की कमान संभालते हुए सबसे सफल कप्तानों कि लिस्ट में अपना नाम शुमार किया तो वहीं पर उन्मुक्त चंद को बेहतर मौकों की तलाश में भारतीय क्रिकेट को अलविदा कहकर अमेरिका शिफ्ट होना पड़ा।












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