'भारतीय ओवरसीज में नहीं चलते, पर वो अलग था', लारा बोले- मैंने सबसे पहले उसमें यही बात नोटिस की

90 के दशक में वेस्टइंडीज के महान बल्लेबाज ब्रायन लारा का मानना है कि आमतौर पर भारतीय बल्लेबाज विदेशी हालातों में संघर्ष करते हैं लेकिन ये बल्लेबाज ऐसा नहीं था और ये पहली बात जो इन्होंने इस खिलाड़ी में नोट की।

Brian Lara

भारतीय क्रिकेट के इतिहास पर नजर डालने पर दुनिया के कुछ बढ़िया बल्लेबाज और स्पिनर दिखाई देते हैं। 90 के दशक के बाद तेज गेंदबाजी में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है लेकिन भारत सही मायनों में आला दर्जे के बल्लेबाजों का देश रहा है। 70 और 80 के दशक में, सुनील गावस्कर ने टेस्ट क्रिकेट में अलग ही छाप छोड़ी और उनके बाद 16 वर्षीय सचिन तेंदुलकर ने 1989 में पाकिस्तान के खिलाफ डेब्यू करने के बाद से पीछे मुड़कर नहीं देखा। तेंदुलकर ने अपने 24 साल के लंबे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट करियर के दौरान कई रिकॉर्ड तोड़े। आज भी वे वनडे और टेस्ट में सर्वाधिक रन उन्हीं के नाम हैं।

ये बल्लेबाज हैं सचिन तेंदुलकर

ये बल्लेबाज हैं सचिन तेंदुलकर

तेंदुलकर के जमाने में वेस्टइंडीज के पूर्व कप्तान ब्रायन लारा थे जो उसी टक्कर के बल्लेबाज थे। लारा के खेल का स्टाइल तेंदुलकर से ज्यादा आक्रामक था और कई बार में वे 'वन मैन शो' भी साबित हुए। हालांकि उनके करियर में भी ऐसे गिराव के पल आए जब उन्होंने कहा इस पड़ाव पर सचिन ही मेरे आदर्श हैं। पूर्व कप्तान रह चुके लारा ने फॉक्स क्रिकेट के साथ बातचीत के दौरान खेल में सचिन के योगदान के बारे में बात की। लारा ने कहा कि तेंदुलकर विपक्षी पर हावी रहे। चाहे कोई भी हालात रहे हों लेकिन तेंदुलकर केवल हावी होना ही जानते थे।

यह पहली चीज है जो मैंने सचिन के साथ देखी

यह पहली चीज है जो मैंने सचिन के साथ देखी

लारा ने कहा, "मैं भारतीय बल्लेबाजी में सचिन पहले के सुनील गावस्कर, मोहम्मद अजहरुद्दीन जैसे दिग्गजों का भी मुरीद हूं (लेकिन) जब आप भारत में भारतीय खिलाड़ियों के बारे में बात करते हैं, तो उनमें से कई ऐसे हैं जो आपके खिलाफ बहुत स्कोर करेंगे। लेकिन जैसे ही वे भारत के बाहर जाते हैं तो कुछ ही ऐसे होते हैं जो विदेशी परिस्थितियों के हिसाब से ढल पाते हैं और यह पहली चीज है जो मैंने सचिन के साथ देखी थी।"

फर्क नहीं पड़ता सचिन कहां पर खेले

फर्क नहीं पड़ता सचिन कहां पर खेले

लारा ने आगे कहा, "कोई फर्क नहीं पड़ता कि सचिन कहां पर खेले, तेज गेंदबाज या स्पिन से भी फर्क नहीं पड़ा, उनके सब कुछ संभालने वाली तकनीक थी। मुझे लगता है कि भारतीय लोग भी ये बात जानते हैं। यह पाकिस्तान के खिलाफ उनका पहला टेस्ट मैच था, जहां एक शॉर्ट बॉल ने उन्हें हिट किया। लेकिन वह उठे, उनका खून भी बह रहा था, वह वहीं खड़े रहे और बल्लेबाजी की। ये ऐसी बात है जहां सिर्फ भारतीय बल्लेबाज ही नहीं बल्कि दुनिया भर के ढेर सारे बल्लेबाज इलाज के लिए पवेलियन पहुंच जाएंगे। मुझे लगता है कि उन्होंने काफी हिम्मत दिखाई है।"

सचिन के जाने के बाद से क्रिकेट बहुत तेजी से बदला

सचिन के जाने के बाद से क्रिकेट बहुत तेजी से बदला

लारा ने मास्टर ब्लास्टर को कंपलीट खिलाड़ी बताया। उन्होंने कहा, "उनकी प्रतिभा, क्षमता और तकनीक कुछ ऐसी थी जो एकदम सही थी। वह अब तक के सबसे महान बल्लेबाजों में से एक के रूप में उभरे। 16 साल की उम्र से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 24 साल... यह कुछ खास है।'

दिलचस्प बात ये है सचिन के जाने के बाद से क्रिकेट बहुत तेजी से बदला है। टी20 ने बल्लेबाजों को निडर बना दिया है और टेस्ट क्रिकेट में भी निर्ममता से रन कूटे जा रहे हैं लेकिन आज भी सचिन जैसे क्लास खिलाड़ी की कमी महसूस होती है जो बिना किसी फैंसी 360 डिग्री शॉट के क्लासिक क्रिकेट बुक स्टाइल से दर्शकों को बल्लेबाजी से मुग्ध कर देता था।

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