Sonbhadra में संतों पर भड़के स्वामी प्रसाद मौर्य, बोले- इतनी ताकत है तो मुझे भस्म करें
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय महासचिव स्वामी प्रसाद मौर्य रविवार को सोनभद्र में थे। सोनभद्र में पत्रकारों से बातचीत के दौरान वे संतों और बाबाओं पर जमकर निशाना साधे।

समाजवादी पार्टी के नेता और राष्ट्रीय महासचिव स्वामी प्रसाद मौर्य रविवार को Sonbhadra में थे। सोनभद्र जिले के मऊ कला गांव में बुध महोत्सव में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होने के लिए वे पहुंचे थे। कार्यक्रम में शामिल होने के बाद पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने बागेश्वर धाम के बाबा धीरेंद्र शास्त्री और अन्य साधु-संतों पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बाबा यदि इतने चमत्कारी हैं तो चीन को भस्म क्यों नहीं कर देते हैं।

धर्मावलंबी नहीं कसाई बन गए हैं बाबा
मीडियाकर्मियों से बातचीत के दौरान स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि मैं पढ़ता था, सुनता था कि पहले के ऋषि-मुनि, महात्मा कभी गुस्सा नहीं होते थे। यदि किसी के ऊपर गुस्सा होते थे और श्राप दे दे देते थे, तो वह आदमी भस्म हो जाता था। लेकिन आजकल के बाबाओं के पास, साधू-सन्यासियों, संतो के पास अपने जप और तप पर भरोसा नहीं है। उनको अपने आराध्य पर विश्वास नहीं रह गया। इसीलिए वे श्राप देने की हैसियत में नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि यही कारण है कि बाबा अब आतंकवादियों की भाषा बोल रहे हैं। बाबाओं द्वारा सिर, जीभ, नाक, कान, गला, हाथ, पैर काटने के लिए इनाम देने की बात कही जा रही है। लगता है यह धर्मावलंबी नहीं कसाई और आतंकवादी हो गए हैं।
जल्द ही चढ़ावा देना बंद कर देंगे लोग
स्वामी प्रसाद मौर्या ने यह भी कहा कि साधु संत सन्यासियों और बाबाओं के इतने हिंसक चेहरे हैं। जिनको देखकर लोगों के अंदर नफरत आएगी और इनका यही चेहरा बार-बार सामने आता रहा तो लोग इनसे डर जाएंगे। इनको जो चढ़ावा चढ़ाया जाता है वह भी बंद हो जाएगा। वहीं यूपी में चल रहे हैं ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि यह समिट पूरी तरह से हवा-हवाई है। देश में बेरोजगारी और महंगाई चरम पर है। इस तरफ किसी का ध्यान नहीं जा रहा है और सरकार जनता का ध्यान भटकाने के लिए यह सब कर रही है।
मानस का नहीं चौपाई का कर रहे विरोध
यह भी बता दें कि सोनभद्र जाने से पहले रविवार को मीडिया कर्मियों से बात करने के दौरान स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा था कि वह पूरे रामचरितमानस का विरोध नहीं कर रहे हैं। रामचरितमानस में केवल एक चौपाई और उसके कुछ अंश का उनके द्वारा विरोध किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कुछ गलत है तो उसकी समीक्षा की जानी चाहिए और उसमें बदलाव किया जाना चाहिए। जिस चौपाई का विरोध उनके द्वारा अभी किया जा रहा है यदि उसे हटाया नहीं जाता है तो भविष्य में भी विरोध किया जाता रहेगा।
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