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Satna News : रामपुर बघेलान की प्रमुख मिठाई khurchan, विदेशों में भी है लोग इस पकवान के दीवाने

Satna news : जिले के रामपुर बघेलान क्षेत्र मैं बनने वाली खुरचन मिठाई का स्वाद राजधानी और अमेरिका तक पहुंच चुका है। प्रसिद्धि ऐसी कि टापरी और ठेले पर भी इसे बनाकर बेचा जाता है, लेकिन अगर खुरचन ताजे का असल स्वाद चाहिए तो रामपुर बघेलान आना पड़ेगा। खौलते दूध से मलाई की परत को खरोंच-खरोंच कर तैयार होने वाली इस खुरचन मिठाई के दीवाने देश में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी हैं।

तीन पीढ़ियों से खुरचन का व्यापार

तीन पीढ़ियों से खुरचन का व्यापार

रामपुर बघेलान क्षेत्र के नेमुआ निवासी चंद्रमणि मिश्रा व महादेव गुप्ता का परिवार लगभग 80 वर्षों से खुरचन तैयार कर रहा है। ठेला में अब तक कोई बड़ा बोर्ड नहीं बनाया है, लेकिन दूर-दूर से आने वाले भी सीधे यहां पहुंच जाते हैं। चंद्रमणि मिश्रा बताते हैं कि बाबा स्वर्गीय रामचरण मिश्रा से खुरचन बनाना शुरू किया था। पिता जगमोहन प्रसाद मिश्र ने भी इस कला को जीवंत रखा है। स्वाद व गुणवत्ता की वजह से खुरचन के कद्रदान हर दिन बढ़ते गए। विंध्य क्षेत्र के लोग विदेशों में रहने वाले परिजनों को सौगात के रूप में खुरचन भेजते हैं।

राजधानी से लेकर विदेश तक डिमांड

राजधानी से लेकर विदेश तक डिमांड

रामपुर बघेलान की खुरचन मिठाई की की मांग उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार से लेकर विदेश अमेरिका, कनाडा, जापान, सिंगापुर या फिर दूसरे देश में जाकर बसने वाले लोग यह पूछते हैं कि क्या अभी रामपुर बघेलान में खुरचन की खुशबू बरकरार है। दीपावली, मकर संक्रांति, जैसे त्योहारों में मांग और भी बढ़ जाती है। बेटियों को विदा करते वक्त सौगात के रूप में खुरचन भेजना भी लोग नहीं भूलते हैं। खुरचन पूरे वर्ष बनता है। गर्मी के दिनों में मात्र 2 दिन, जबकि जाड़ा में 4 दिनों तक इसे सुरक्षित रखा जा सकता है।

कला है खुरचन को तैयार करना

कला है खुरचन को तैयार करना

चंद्रमणि मिश्रा बताते हैं कि खुरचन बनाना एक जटिल कला है। 1 किलो दूध को 5 लोहे की कड़ाही में डाल कर कम आंच के चूल्हे पर चढ़ा कर खौलाया जाता है। दूध के ठंडा होने पर जमी परत को सींक से उतार कर थाली में रखा जाता है। इसके बाद दूध की पतली परतों के बीच कुछ खास ड्राई फूड्स डाली जाती हैं।

यूं फैली मिठास

यूं फैली मिठास

रामपुर बाघेलान में 80 सालों से बन रहे इस पकवान की मिठास सड़क किनारे मंडी होने के यहां से गुजरने वाला हर सातवां-आठवां राहगीर इसे खरीदता था। 1 किलो खुरचन बनाने में 4 लीटर शुद्ध दूध लगता है। 60 रुपए लीटर के मान से 240 रुपए का दूध लगता है। शक्कर और लकड़ी का खर्च करीब 50 रुपए आता है। इस तरह 290 रुपए लागत आती है। इन दिनों कारोबारी 360 रुपए किलो बेच रहे हैं। महज 70 रुपए प्रति किलो लाभ मिलता है।

हाईवे के किनारे सजती है मंडी

हाईवे के किनारे सजती है मंडी

मध्य प्रदेश के सतना जिले के रामपुर बाघेलान नगर और इससे जुड़े आसपास के 1 दर्जन से ज्यादा गांवों में खुरचन बनता है। दूध और पीसी चीनी को मिलाकर बनने वाली सतना की यह मिठाई पूरे प्रदेश से लेकर विदेश में है। मंडी हाईवे किनारे सजती है जिस कारण इसकी पहचान देश के दूसरे राज्यों में भी है। लगभग 80 वर्षों से इस क्षेत्र में खुरचन का व्यापार हो रहा है।

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