MP Politics: भाजपा से बागी विधायक नारायण त्रिपाठी ने की विंध्य पार्टी की घोषणा, 30 सीट में लड़ेंगे चुनाव
बागी तेवर और अलग राजनीति के लिए पहचाने जाने वाले मैहर से भाजपा विधायक नारायण त्रिपाठी ने विंध्य पार्टी के गठन की घोषणा कर दी है। बता दें कि विंध्य की तीस सीटों पर त्रिपाठी की नजर हैं।

Vindhya Party Narayan Tripathi MLA: मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले पृथक विंध्य प्रदेश बनाने की मांग जोर पकड़ने लगी है। भाजपा के बागी विधायक नारायण त्रिपाठी ने विंध्य पार्टी (Vindhya Party) के गठन का ऐलान किया है।
उन्होंने यह घोषणा सोमवार, 10 अप्रैल को की। साथ ही 2 मई से 7 मई तक मैहर में बागेश्वर महाराज की कथा आयोजित करने की भी घोषणा की। बता दें कि त्रिपाठी की नजर विंध्य की 30 सीटों पर है।
नारायण ने आगे कहा, 'सुभाष चंद्र बोस ने कहा था कि तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा। मैं आपसे कहता हूं की आप मुझे 30 सीट से दो। रीवा और शहडोल संभाग के 7 जिले, 30 विधानसभा जहां शादी विवाह, पहनावा, खाना, रीति रिवाज सब एक जैसे हैं। ये 30 विधानसभा का प्रदेश नहीं बनेगा। जब अलग प्रदेश बनेगा तो हमारा पुराना जो विंध्य था वो बनेगा। लेकिन पहले हम अपने घर को ठीक कर लें। आप मुझे 30 दे दो मैं दावा करता हूं कि 2024 में पृथक विंध्य प्रदेश आपके हवाले कर दूंगा।
नारायण त्रिपाठी ने अपील करते हुए कहा: मैं विंध्यवासियों से अपील और निवेदन करता हूं हमारा साथ दें। ये लड़ाई हम अंतिम सांस तक लड़ेंगे और विंध्य प्रदेश का पुनर्निर्माण कराएंगे जिससे हमारी आने वाली पीढ़ी का बेहतर भविष्य हो। हमारे युवाओं को रोजगार मिल सके। अब लड़ाई राजनीति की नहीं है। अब लड़ाई विंध्य के भविष्य की है।
बीजेपी के मैहर विधानसभा क्षेत्र से विधायक नारायण त्रिपाठी तो अलग राज्य के मुद्दे पर नई पार्टी बनाने जा रहे हैं। उन्होंने 10 अप्रैल को नई पार्टी के गठन का ऐलान किया।
भाजपा विधायक नारायण त्रिपाठी मैहर विधानसभा से अलग-अलग पार्टी से चुनाव लड़ कर 4 बार विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं। उन्होंने समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और भारी मतों से विजई हुए। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव के समय वे कांग्रेस के विधायक थे। लेकिन बाद में उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी और इस्तीफा देकर वर्ष 2016 में भाजपा के टिकट पर उपचुनाव में जीत दर्ज की।
वर्ष 2018 में बीजेपी ने फिर उन पर भरोसा जताया और वे पुनः निर्वाचित हुए। वे समाजवादी पार्टी के टिकट पर लोकसभा चुनाव में भी किस्मत आजमा चुके हैं। हालांकि उस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
वर्ष 2018 में बनी कांग्रेस की सरकार के 15 महीने के कार्यकाल के दौरान मध्य प्रदेश में तख्ता पलट की कवायदों के दौरान भी नारायण सुर्खियों में रहे। भाजपा विधायक होने के बावजूद तब के मुख्यमंत्री कमलनाथ से उनकी नजदीकियां और मुलाकातें सियासी गलियारों में सरगर्मियां घोलती रहीं।












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