यूपी चुनाव 2022: मुस्लिम बहुल है देवबंद सीट जिस पर काबिज है भाजपा, ठाकुरों का रहा है यहां वर्चस्व
यूपी चुनाव 2022: मुस्लिम बहुल है देवबंद सीट जिस पर काबिज है भाजपा, ठाकुरों का रहा है यहां वर्चस्व
सहारनपुर, 10 नवंबर: 2022 में उत्तर प्रदेश के अंदर विधानसभा चुनाव होने हैं, जिसमें कुछ ही महीनों का समय शेष बचा है। ऐसे में सत्ताधारी पार्टी अपनी कुर्सी बचाने और राजनीतिक पार्टियां सहारनपुर जिले की देवबंद सीट पर जीत का पताका फहराने की तैयारियों में लग गई हैं। hindi.oneindia.com आज आपके लिए लेकर आया है सहारनपुर जिले की देवबंद विधानसभा सीट के राजनीतिक इतिहास, पिछले चुनावों का रिजल्ट और भी बहुत कुछ...

मुस्लिम बहुल है 'देवबंद सीट'
देवबंद विधानसभा सीट (आरक्षित) है और सहारनपुर लोकसभा के अंतर्गत आती है। फिलहाल इस सीट पर बीजेपी का कब्जा है और यहां से बृजेश सिंह विधायक हैं। देवबंद विधानसभा सीट का समीकरण बाकी सीटों से काफी अलग है। दरअसल, देवबंद मुस्लिम बहुल है और इस्लामिक शिक्षण संस्थान के लिए विश्व प्रसिद्ध है। इस्लामी मरकज के इस टॉप संस्थान दारुल उलूम में पूरी दुनिया से मुसलमान इस्लामिक पढ़ाई के लिए आते हैं। बावजूद इसके यहां पर ठाकुरों का दबदबा रहा है।

1952 में पहली बार अस्तित्व में आई थी देवबंद सीट
1952 में देवबंद विधानसभा सीट पहली बार अस्तित्व में आई थी और वर्ष 2008 में हुए परिसीमन में भी इसे बरकरार रखा गया। 1952 में कांग्रेस के ठाकुर फूल सिंह को जनता ने जीताकर विधानसभा भेजा था। इस सीट पर दूसरा विधानसभा 1957 में हुआ और निर्दलीय प्रत्याशी ठाकुर यशपाल सिंह जीते। 1962 में यह सीट वापस कांग्रेस के खाते में गई और ठाकुर फूल सिंह विधायक बने। 1967 में कांग्रेस के पं. हरदेव सिंह चौधरी जीते थे। तो वहीं, मानबीर सिंह राणा 1969 में और 1974 में लगातार इस सीट पर कांग्रेस पार्टी से विधायक रहे।

कब-कब इस सीट से कौन जीता
साल 1977 में इस सीट पर हुए विधानसभा चुनाव में जनता पार्टी के मोहम्मद उस्मान को जीत मिली। 1980, 1985, 1989 में लगातार तीन बार कांग्रेस के मानबीर सिंह राणा विधायक रहे। 1991 में जनता दल के वीरेंद्र सिंह जीते। 1993 में यह सीट पहली बार बीजेपी के खाते में गई शशि बाला पुंडीर जीतीं। उनके बाद 1993 में फिर चुनाव हुए और सुखबीर सिंह राणा जीते। 2002 में बीएसपी के राजेंद्र सिंह राणा और 2007 में बीएसपी के मनोज चौधरी जीते। 2012 में समाजवादी के राजेंद्र सिंह राणा जीते। उनके निधन के बाद कांग्रेस के खाते में सीट गई। साल 2017 में भाजपा के टिकट पर बृजेश विजयी हुए थे। उन्होंने बसपा के माजिद अली को हराया था। इस चुनाव में बृजेश को 102244 वोट जबकि दूसरे नंबर पर रहे माजिद अली को 72844 वोट मिले थे।

सपा और भाजपा के बीच होगी टक्कर
देवबंद सीट पर ठाकुर और सैनी बिरादरी के वोटरों के अलावा मुस्लिम बाहुल्य है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों ही जातियां पूरी तरह भारतीय जनता पार्टी के साथ कमिटेड हैं। हालांकि, लोग स्थानीय विधायक से नाराज हैं, लेकिन योगी आदित्यनाथ के नाम पर वोट करने को तैयार हैं। तो वहीं, मुस्लिम वोटर पूरी तरह समाजवादी पार्टी को लेकर फोकस है। ऐसे में जाहिरा तौर पर आने वाले चुनाव में भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के बीच सीधी टक्कर देखने को मिलेगी।

'सिंह' प्रत्याशियों का रहा है दबदबा
हालांकि, देवबंद सीट के आंकड़ें यह भी बताते हैं कि 1952 से आज तक देवबंद सीट पर ठाकुरों का ही दबदबा रहा है। देवबंद को आज तक जितने भी विधायक मिले, उनमें से दो को छोड़कर बाकी सारे विधायक ठाकुर बिरादरी के ही रहे हैं।
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