Sagar: जज VRS लेकर कांग्रेस से चुनाव लड़े तो बनेंगे नए समीकरण, VRS मिलेगी या नहीं, अभी तय नहीं!
Madhya Pradesh Assembly Elections 2023: सागर विधानसभा से कांग्रेस ने न्यायाधीश स्तर के अधिकारी को टिकट क्या आफर कर दी, राजनीतिक हलकों का पारा एकदम से बढ़ गया। यदि न्यायाधीश वीआरएस लेकर चुनाव मैदान में कूदे तो भाजपा को काफी मशक्कत करना होगी। वहीं इस बात पर भी फिलहाल तक संशय है कि उन्हें वीआरएस मिल सकेगा या नहीं? इसके बाद ही चुनाव लड़ने का फैसला हो सकेगा।

जातिगत समीकरणों में फिर उलझेगी सागर की राजनीति
सागर विधानसभा के पिछले 38 साल के चुनावी गणित को लेकर राजनीति के पंडितों का मानना है कि सागर में विधानसभा सीट बीते 40 सालों से जैन समाज के पाले में जाति है। समाज की एकता के चलते पहले कांग्रेस के पास 10 साल यह सीट रही थी। पूर्व मंत्री प्रकाश जैन सागर से जीते थे। उनके बाद 15 साल तक भाजपा की सुधा जैन और उनके बाद बीते 15 साल से विधायक शैलेंद्र जैन विधायक हैं। अब यदि कांग्रेस से वीआरएस लेकर न्यायाधीश चुनाव लड़ते हैं तो इस बार दो समाजों में फिर विधानसभा को लेकर मतदाता विभाजित होंगे, समाजों और जातियों का हवाला देकर चुनाव में मतदान की अपील भी की जाएगी। बीड़ी उद्योगपति वर्सेस सेवानिवृत्त न्यायाधीश का हवाला दिया जाएगा। विकास और भविष्य के सागर की प्लानिंग को लेकर भी दावे-वादे किए जाएंगे। बाकी समाजें इस दौरान प्रत्याशी से ज्यादा पार्टियों की तरफ झुकाव दिखाएंगी। चूंकी पूर्व में सागर में जैन वर्सेस जैन, जैन वर्सेस ब्राह्म्ण का चुनाव हो चुका है। इसमें भाजपा जीतती रही है।
वीआरएस का आवेदन स्वीकृत नहीं हुआ तो नहीं लड़ पाएंगे चुनाव
सागर विधानसभा में दो दिन से सियासी हलचल बढ़ गई है। कारण 15 साल से भाजपा विधायक शैलेंद्र जैन के खिलाफ कांग्रेस ने तुरूप का इक्का निकाला है। उन्होंने सागर मूल के जिला जज स्तर के एक अधिकारी को सागर सीट का टिकट आफर कर दिया है। हालांकि मामला मजिस्ट्रेट के वीआरएस पर आकर अटका हुआ है। वीआरएस स्वीकृत होता है तो ही वे चुनाव लड़ पाएंगे, अन्यथा किसी अन्य प्रत्याशी पर दांव लगाना होगा।
सरकारी अधिकारियों जिन्होंने कांग्रेस ज्वाइन की, उनके इस्तीफे स्वीकार नहीं हुए
मप्र में एक और खबर जोर-शोर से उछल रही है। बीते महीनों में करीब एक दर्जन ऐसे सरकारी अधिकारी-कर्मचारी हैं, जिन्होंने नौकरी छोड़कर कांग्रेस का दामन थामा था। उनके इस्तीफे स्वीकार ही नहीं किए गए। ऐसे में यदि न्यायाधीश चुनाव लड़ने के इच्छुक हुए और वीआरएस का आवेदन भी कर दिया, लेकिन यदि उनका वीआरएस शासन ने स्वीकृत नहीं किया तो फिर मामला ठंडे बस्ते में चला जाएगा। कारण जब डिप्टी कलेक्टर निशा बांगरे का इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया, तो यह जरूरी नहीं की जज का वीआरएस स्वीकार कर ही लिया जाएगा।
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