सामाजिक बुराइयों को दूर करने वाले महान संत थे रविदास, सागर में बोले पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सागर में अपने संबोधन में संत रविदासजी के दोहे को बोलते हुए कहा कि वे सामाजिक बुराईयों को दूर करने वाले संत थे। पीएम ने 'जात पांत के फेर मंहि, उरझि रहइ सब लोग। मानुषता कूं खात हइ, रैदास जात कर रोग... व पराधीनता पाप है, जान लेहु रे मीत। रैदास दास पराधीन सौं, कौन करैहै प्रीत॥ दोहे को बोलते हुए कहा कि हमारी सरकार गरीबों के कल्याण के लिए योजनाएं चला रहे हैं।

पीएम मोदी ने इसके पूर्व कहा कि सागर की धरती, संतों का सानिध्य, समाज के हर वर्ग से, सागर में समरसता का महासागर उमड़ा हुआ है। देश की इसी समृद्दि को समृद्ध करने के लिए संत रविदास स्मारक कला संग्राहलय की नींव पड़ी। मुझे संतों की कृपा से मुझे इसके भूमिपूूजन का सौभाग्य मिला है। मैं काशी का सांसद हूं, मेरे लिए दोहरी खुशी का दिन है कि आज मैंने शिलान्यास किया है।
Recommended Video
डेढ़ साल बाद स्मारक के लोकार्पण के लिए भी आउंगा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि उन्होंने कहा कि लोकार्पण के लिए मैं जरूर आउंगा। संत रविदास जी मुझे यहां दोबारा आने का मौका देने ही वाले हैं। मुझे बनारस में संत रविदास जी की जन्म स्थली पर जाने का कई दफा सौभाग्य मिला है। आज आप सबका सानिध्य मिला है। उन्होंने कहा स्मारक व संग्राहलय में दिव्यता होगी, रविदास जी की उन शिक्षाओं से दिव्यता आएगी, जो आज इस स्मारक की नींव में जोड़ा गया है।
मप्र और शिवराज को बधाई दी
पीएम मोदी ने एक बार फिर संत रविदास के दोहे 'ऐसा चाहूं राज मैं, जहां मिले सबन को अन्न, छोट बड़ा सब संग बसे रैदास रहे प्रसन्न' का उल्लेख करते हुए कहा कि मैं जानता हूँ गरीब का स्वाभिमान क्या होता है, मुझे गरीबों की परेशानियां समझने में किताबें नहीं पढ़नी पढ़तीं, क्योंकि मैं तो आपके परिवार का सदस्य हूँ। उन्होंने गरीब कल्याण योजनाओं के लिए मप्र और शिवराज सिंह को बधाई दी।












Click it and Unblock the Notifications