Sagar News: विसर्जन के लिए भक्तों के कंधों पर निकली मां: दशहरे पर सागर में कांधे वाली काली का चल समारोह

सागर में शनिवार को दुर्गा विसर्जन समारोह का आयोजन धूमधाम से किया गया, जिसमें भक्तों का उत्साह देखते ही बनता था। इस अवसर पर पुरव्याऊ टौरी की कांधे वाली काली का चल समारोह खास आकर्षण का केंद्र बना। भक्तों ने श्रद्धा और भक्ति के साथ माता दुर्गा को कंधों पर उठाकर विसर्जन के लिए निकाला।

जयघोष और पुष्पवर्षा

समारोह के दौरान "चल माई काली माई" के जयघोष से वातावरण गूंज उठा। भक्तों ने मां का स्वागत करते हुए पुष्पवर्षा की। यह दृश्य देखते ही बनता था, जहां माता के प्रति आस्था और श्रद्धा का भाव स्पष्ट रूप से नजर आ रहा था।

Immersion Goddess on shoulders floating ceremony of shouldered Kali in the ocean on Dussehra

युवा उत्साह का जलवा

चल समारोह में आगे मशालें जलती हुई चल रही थीं, जबकि सैकड़ों युवा सड़क पर दौड़ते हुए माता के जयकारे लगा रहे थे। पीछे श्रद्धालुओं ने कांधे पर सवार मां दुर्गा की प्रतिमा को आगे बढ़ाते हुए हर ओर धार्मिक उल्लास का माहौल बना रखा था।

हजारों की संख्या में श्रद्धालु

इस अद्भुत दृश्य को निहारने के लिए चल समारोह मार्ग पर हजारों लोग एकत्रित हुए थे। हर कोई इस दिव्य और अलौकिक पल को अपने कैमरे में कैद करने में व्यस्त था, ताकि यह यादगार लम्हा सहेज सकें।

ब्रिटिशकाल की रोशनी और मशाल की कहानी

कांधे वाली काली के चल समारोह में मशाल की कहानी भी बेहद रोचक है। ऐतिहासिक रूप से, ब्रिटिशकाल में रोशनी की उचित व्यवस्था नहीं थी, जिसके चलते भक्त माता दुर्गा को विसर्जन के लिए ले जाते समय मशाल के उजाले का सहारा लेते थे। यह परंपरा पलीता के साथ चली आ रही है, जो आज भी श्रद्धा और सम्मान के साथ निभाई जा रही है।

120वीं वर्षगांठ का जश्न

इस वर्ष, पलीता कमेटी ने अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाते हुए इस परंपरा को 120 साल पूरे किए। विशाल मशाल का उजाला दूर से ही माता के आगमन का संकेत देता है, जिससे भक्तों में उत्साह और भक्ति का संचार होता है। "चल माई काली माई" के जयघोष के साथ भक्त माता को कंधों पर विसर्जन के लिए लेकर जाते हैं, जिससे माहौल में एक अद्भुत धार्मिक ऊर्जा भर जाती है।

तीनबत्ती तिराहे पर भव्य स्वागत

पुरव्याऊ टौरी की माता का चल समारोह देर रात तीनबत्ती तिराहे पर पहुंचा। यहां जलती हुई मशाल और भक्तों की भीड़ देखकर हर ओर "चल माई काली माई" के जयकारे गूंजने लगे। जैसे ही माता तिराहे पर पहुंची, भक्तों ने फूलों की बारिश की और आतिशबाजी का आयोजन किया।

स्वागत टेंट और समारोह का आनंद

इस खास मौके पर कटरा बाजार मार्ग पर स्वागत टेंट लगाए गए थे, जहां भक्तों ने उत्साह के साथ चल समारोह का स्वागत किया। इस भव्य उत्सव में हर किसी ने भाग लिया और माता की महिमा का गुणगान किया। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक था, बल्कि समाज में एकता और भाईचारे का भी संदेश फैलाने का माध्यम बना। इस प्रकार, सागर में दुर्गा विसर्जन समारोह ने पौराणिक परंपराओं को जीवित रखते हुए एक नई ऊर्जा और उत्साह का संचार किया।

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