हॉस्टल में खतरनाक अजगर देख बच्चों की हलक में फंसी जान, चीखकर बचाई जान
आवासीय छात्रावास परिसर में बच्चे धूप में खेल रहे थे, तभी जीभ लपलपाते हुए एक भारी-भरकम अजगर सरसराते वहां पहुंच गया। स्नैक केचर अकील बाबा ने अजगर का रेस्क्यू कर जंगल में छोड़ा है।

सागर के बाहरी इलाके बाघराज वार्ड में लाल पहाड़ी पर आवासीय ज्ञानोदय छात्रावास में दोपहर में एक भारी-भरकम अजगर शिकार की तलाश में बच्चों की तरफ बढ़ रहा था, जैसे ही उस पर नजर पड़ी तो दहशत के मारे बच्चे चीख उठे। दौड़कर जान बचाई और हॉस्टल प्रबंधन को सूचना दी। करीब आधे घंटे बाद यहां पहुंचे स्नेक कैचर अकील बाबा ने अजगर का रेस्क्यू किया, तब जाकर सबकी जान में जान आई। बता दें कि इस छात्रावास में तीन महीने पहले भी 12 लंबा अजगर हॉस्टल के अंदर से पकड़ा गया था।

बालक छात्रावास में करीब 12 फीट का खतरनाक अजगर पहुंच गया
आदिम जाति आवासीय विद्यालय के ज्ञानोदय छात्रावास में रविवार दोपहर बालक छात्रावास में करीब 12 फीट का खतरनाक अजगर पहुंच गया। बच्चे जिस मैदान में खेल रहे थे, उसी मैदान की सूखी खास के बीच सरसराते हुए वह बच्चों की तरफ पहुंच गया था। अजगर पर नजर पड़ते ही बच्चों ने चीखकर दूसरे बच्चों को सचेत किया और अपने शिक्षकों को जानकारी दी। इन्होंंने स्नेक केचर अकील बाबा को फोन पर सूचना दी थी। करीब आधे घंटे बाद मौके पर पहुंचे अकील बाबा में महज 5 मिनट में ही अजगर की दुम से पकड़कर उसे काबू में कर लिया।

काफी फुर्तीला और तेज अजगर है
सांप पकड़ने में माहिर अकील बाबा ने बताया कि पकड़ा गया अजगर काफी फुर्तीला और तेज है। यह इंसानों पर भी हमला करने से नहीं चूक रहा था। अकील ने बताया कि अजगर की लंबाई करीब 10 से 12 फीट और वजन करीब 25 किलो के आसपास होगा। गनीमत रही कि बच्चे इसकी जद से दूर थे, अन्यथा यह उन पर भी हमला कर सकता था।

तीन महीने पहले भी बिल्ली को निकल गया था
करीब तीन महीने पहले इसी हॉस्टल के टॉयलेट में रात के अंधेरे में करीब 12 फीट लंबा और 40 किलो वजन से अधिक का अजगर छिपा था, उसने एक बिल्ली का शिकार कर निगल लिया था। जब बच्चे टायलेट जाने लगे तब उनको अजगर की जानकारी ली। उस समय अकील और उनके बेटे असद खान ने अजगर को काबू में कर उसके हलक से बिल्ली निकलवाई थी।

54 से अधिक अजगर लाल पहाड़ी से पकड़ चुके
स्नैक कैचर अकील बाबा के अनुसार बाघराज वार्ड में लाल पहाड़ी का इलाका अजगरों का प्राकृतिक आवास है। यहां से वे बीते 6-7 सालों में 54 से अधिक अजगर पकड़ चुके हैं। अकील के अनुसार ठंड के मौसम में पहाड़ी के नीचे खोखली चट्टानें व गुफाओं में काफी ठंडक रहती है, इसलिए धूम सेंकने और शिकार की तलाश में अजगर बाहर निकलते हैं। ज्ञानोदय छात्रावास के पीछे ही छत्रसाल नगर आवासीय कॉलोनी बन गई है, यहां से भी काफी अजगर पकड़े जा चुके हैं।












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