MP News: बीना में विधायक निर्मला सप्रे के कार्यालय के बाहर कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच झड़प
Sagar News: बीना से विधायक निर्मला सप्रे के खिलाफ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया। विधायक के घर और कार्यालय पर कांग्रेस का झंडा लगाने की मांग को लेकर कार्यकर्ता अड़े रहे, जिसके बाद पुलिस के साथ उनकी झड़प हुई।
विधायक का भाजपा में शामिल होना
कांग्रेस का आरोप है कि जब विधायक निर्मला सप्रे भाजपा में शामिल हो चुकी हैं, तो उन्हें तत्काल इस्तीफा देना चाहिए। यह विवाद तब बढ़ा जब 10 अक्टूबर को विधानसभा में एक जवाब में विधायक ने कहा कि वे भाजपा में नहीं, बल्कि कांग्रेस में हैं। इस बयान ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच नाराजगी को और भड़का दिया।

प्रदर्शन की घटनाक्रम
गुरुवार दोपहर, बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता सर्वोदय चौराहे पर इकट्ठा हुए। हाथ में पार्टी का झंडा लिए हुए, उन्होंने विधायक के आवास और कार्यालय की ओर बढ़ने का प्रयास किया। इस सूचना के तुरंत बाद पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंच गई और अंबेडकर तिराहे पर बैरिकेडिंग कर दी ताकि कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ने से रोका जा सके।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बैरिकेडिंग को हटा दिया और आगे बढ़ने लगे, जिसके बाद पुलिस ने उन पर नियंत्रण पाने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। इस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सागर जिले के विभिन्न क्षेत्रों, जैसे आगासौद, खिमलासा, भानगढ़ और खुरई से अतिरिक्त पुलिस बल भी मंगाया गया।
विधायक की स्थिति पर सवाल
अनुराग ठाकुर ने कहा, "जब विधायक कहती हैं कि उन्होंने कांग्रेस नहीं छोड़ी, तो उन्हें कांग्रेस के झंडे से क्या ऐतराज है?" उनका यह भी कहना था कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा कार्यकर्ताओं को रोकने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि वे शांतिपूर्ण तरीके से विधायक से आग्रह करने जा रहे थे कि वह पार्टी का झंडा लगाएं।

पुलिस के हस्तक्षेप पर सवाल
ठाकुर ने आगे कहा, "हम हिंसा या उपद्रव नहीं कर रहे हैं। यह हमारे पार्टी का आंतरिक मामला है, जिसमें पुलिस का क्या काम?" उन्होंने कहा कि जिन कांग्रेसियों ने सप्रे को विधायक बनाया, वही आज पुलिस की कार्रवाई का शिकार हो रहे हैं, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

विधायक का स्पष्टता का अभाव
इस बीच, विधायक निर्मला सप्रे ने कांग्रेस छोड़ने से इनकार किया है। दलबदल कानून के संदर्भ में उनके जवाब से यह स्पष्ट होता है कि उन्होंने अपनी सदस्यता को लेकर कोई सबूत पेश नहीं किया, जिससे साबित हो सके कि उन्होंने दल बदला।












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