फैंटेसी स्पोर्ट्स में रामपुर के युवक ने टीम बनाकर कमाए करोड़ों, वर्ल्ड कप फाइनल पर खेला दॉंव
दुनिया के हर कोने में आपको क्रिकेट के चाहने वाले मिलेंगे। इस खेल की लोकप्रियता पूरी दुनिया में फैली हुई है। यही वजह है कि इन खेलों से जुड़े हुए खिलाड़ियों को फैंस काफी ज्यादा प्यार करते हैं। फैंस के प्यार के साथ इन दिग्गज खिलाड़ियों को पैसे के रूप में भी मोटी कमाई होती है। फिर चाहे वह विज्ञापनों की जरिये हो, या फिर फीस के तौर पे हो। लेकिन क्या कभी आपने सुना है इस खेल की वजह से किसी फैन की किस्मत रातो रात बदली हो। बिलकुल ऐसा ही हुआ है उत्तर प्रदेश के रामपुर में जहाँ एक युवक आनलाइन खेल एप पर टीम बनाकर 1 करोड़ 35 लाख रुपये जीत गया।

इंग्लैंड और पाकिस्तान के मुकाबले में चमकी किस्मत
क्षेत्र के गांव रामपुर धम्मन निवासी इस्तियाक हुसैन ने बताया कि वह पिछले चार साल से क्रिकेट टूर्नामेंट में खेल एप पर टीम बनाते आ रहे हैं। इस बार टी-20 वर्ल्ड कप का फाइनल मुकाबला इंग्लैंड और पाकिस्तान के बीच हुआ था। उन्होंने मैच शुरू होने से पहले खेल एप पर तमाम क्रिकेट प्रेमियों की तरह अपनी टीम बनाई। इश्तियाक द्वारा चयनित किए गए खिलाड़ियों में छह खिलाड़ी इंग्लैंड और पांच पाकिस्तान की टीम के शामिल किए थे। जिन खिलाड़ियों की टीम उन्होंने बनाई, उन सभी ने बेहतर प्रदर्शन किया और उनके अंक बढ़ गए। मैच खत्म होने के बाद उनके पास 1.35 करोड़ की रकम जीतने का मैसेज आया। बाद में उनके बैंक खाते में 30 फीसद टीडीएस काटकर 94.50 लाख रुपये की रकम आई। वह बताते हैं कि इससे पहले भी वर्ष 2019 में 70 हजार रुपये जीते थे। टी-20 क्रिकेट वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले ने रामपुर के इस युवक की किस्मत बदल दी। एक आनलाइन खेल एप पर टीम बनाकर वह एक झटके में करोड़पति बन गया। यह रकम उसके लिए काफी मायने रखती है। युवक के एक करोड़ से अधिक रुपये जीतने पर परिवार में जश्न का माहौल है।

ऐसी 70 से ज्यादा कंपनियां हैं एक्टिव
आईपीएल और क्रिकेट वर्ल्ड कप के दौरान कई विज्ञापन देखने को मिलते हैं जिनमे कभी रोहित शर्मा तो कभी महेंद्र सिंह फोनी दर्शकों को अपनी टीम बनाने को कहते हैं। दरअसल, यह एक तरह का आभासी गेम है। इसमें आपको ऑनलाइन टीम बनानी होती है। आप फ्री एंट्री या पैसे वाले कॉन्टेस्ट में भाग ले सकते हैं। वैसे तो पैसे लगाकर दांव लगाना सट्टेबाजी माना जाता है, लेकिन इन पर यह कानून लागू नहीं होता।
फैंटेसी गेम्स की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि देश में ऐसी 70 से ज्यादा कंपनियां एक्टिव हैं। आपको बता दें की यह कंपनी केवल क्रिकेट ही नहीं खिलाते हैं बल्कि देश में ऐसी 33 के करीब और कंपनियां हैं जो पोकर, रमी, क्रिकेट, बास्केटबॉल, फुटबॉल से लेकर हॉकी और कबड्डी तक के ऑनलाइन गेम्स खिलाती हैं।

भारत में क्या है सट्टेबाजी को लेकर कानून?
फैंटेसी स्पोर्ट्स को लेकर देश में अभी कोई अलग से कानून नहीं है, लेकिन फैंटेसी स्पोर्ट्स ऑनलाइन खेला जाता है, इसलिए इसके खिलाफ आईटी एक्ट के तहत सिर्फ केंद्र सरकार ही कार्रवाई कर सकती है, राज्य सरकार नहीं। कानूनी शून्यता की यह स्थिति संघीय व्यवस्था में अच्छी नहीं मानी जा सकती।
पब्लिक गैम्बलिंग एक्ट-1867 के मुताबिक, देश में सट्टेबाजी और जुए को अपराध माना गया है। कॉन्ट्रैक्ट एक्ट, मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक कानून (पीएमएलए), फेमा, भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), आयकर और उपभोक्ता कानूनों के तहत सट्टेबाजी और जुआ गैर-कानूनी है। हालांकि, ये दोनों राज्य के विषय हैं। यानी राज्य चाहें तो इसके लिए अपने हिसाब से कानून बना सकते हैं। गोवा, दमन-दीव, तेलंगाना और सिक्किम में सट्टेबाज़ी और जुए से जुड़ी कई गतिविधियों को कानूनी मान्यता मिली हुई है। 1966 में सुप्रीम कोर्ट ने घुड़दौड़ और रमी में सट्टेबाजी को मान्यता देते हुए कहा था कि ये संयोग का खेल नहीं है, बल्कि इसमें चतुराई और कुशलता की जरूरत होती है।












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