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BDS छात्रा Shweta Singh कौन थी? हॉस्टल में छोड़ गई अपनी मौत का चौंकाने वाला क्लू! 7 दिन में दूसरी घटना

Udaipur BDS Student Shweta Singh Case:: उदयपुर के पैसिफिक डेंटल कॉलेज में एक दिल दहला देने वाली घटना ने शिक्षा जगत को हिलाकर रख दिया है। जम्मू-कश्मीर की रहने वाली 21 वर्षीय MBBS और BDS (बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी) की अंतिम वर्ष की छात्रा श्वेता सिंह गुरुवार, 24 जुलाई 2025 की रात अपने हॉस्टल के कमरे में संदिग्ध अवस्था में मृत पाई गईं।

उसके कमरे से मिले एक नोट में कॉलेज स्टाफ पर मानसिक उत्पीड़न, शैक्षणिक अनियमितताओं और पैसे की उगाही का सनसनीखेज आरोप लगाया गया है। यह उदयपुर में एक हफ्ते के भीतर दूसरी ऐसी घटना है, जिसने छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और संस्थागत जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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Who Was Sweta Singh: कौन थीं श्वेता सिंह?

श्वेता सिंह जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) की रहने वाली एक होनहार MBBS और BDS छात्रा थी, जो पैसिफिक डेंटल कॉलेज, उदयपुर में अपनी पढ़ाई पूरी कर रही थीं। अंतिम वर्ष में पहुंच चुकी श्वेता एक मेहनती और महत्वाकांक्षी छात्रा थीं, जिनका सपना डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करना था। लेकिन कथित तौर पर कॉलेज प्रशासन के उत्पीड़न ने उनके इस सपने को हमेशा के लिए खत्म कर दिया।

क्या हुआ उस रात?

25 जुलाई 2025 को रात करीब 11 बजे, श्वेता की रूममेट ने उसे हॉस्टल के कमरे में संदिग्ध अवस्था में फंदे से लटका देखा और तुरंत अस्पताल ले गई। लेकिन डॉक्टरों ने श्वेता को मृत घोषित कर दिया। सुखेर पुलिस स्टेशन के SHO रविंद्र चरण ने बताया, 'शव को पोस्टमॉर्टम के लिए शवगृह में रखा गया है। परिवार वालों के आने के बाद पोस्टमॉर्टम होगा।'

पुलिस को श्वेता के कमरे से एक नोट मिला, जिसमें उन्होंने कॉलेज के दो कर्मचारियों पर मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया। नोट में लिखा था कि कॉलेज प्रशासन मनमाने ढंग से छात्रों को फेल करता था, बार-बार पैसे की मांग करता था और जो छात्र फीस देने में असमर्थ थे, उन्हें दबाव और अपमान का सामना करना पड़ता था।

छात्रों में आक्रोश, सड़कों पर प्रदर्शन

श्वेता की मौत की खबर फैलते ही कॉलेज परिसर में हंगामा मच गया। गुस्साए छात्रों ने कॉलेज गेट के बाहर सड़क जाम कर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। वे सुसाइड नोट में नामजद कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे थे। एक वायरल वीडियो में छात्र नारे लगाते और न्याय की मांग करते दिखे।

कॉलेज के निदेशक ने प्रदर्शनकारी छात्रों से बातचीत की और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा, 'कॉलेज प्रबंधन इस मामले की गंभीरता से जांच कर रहा है। दोषी कर्मचारियों को बर्खास्त किया जाएगा।' लेकिन छात्रों का गुस्सा शांत नहीं हुआ, और सुखेर पुलिस ने प्रदर्शन को नियंत्रित करने की कोशिश की।

7 दिन में दूसरी घटना, बढ़ती चिंता

यह एक हफ्ते के भीतर दूसरी ऐसी घटना है। 18 जुलाई 2025 को ग्रेटर नोएडा की शारदा यूनिवर्सिटी में BDS छात्रा ज्योति झांगरा ने भी हॉस्टल में फंदे से लटककर आत्महत्या कर ली थी। ज्योति के सुसाइड नोट में भी कॉलेज के दो प्रोफेसरों पर मानसिक उत्पीड़न का आरोप था, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया था।

ये घटनाएं शिक्षा संस्थानों में छात्रों पर पड़ रहे मानसिक दबाव और उत्पीड़न की गंभीर स्थिति को उजागर करती हैं। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के 2022 के आंकड़ों के अनुसार, देशभर में 13,000 से अधिक छात्रों ने आत्महत्या की थी, जिनमें शैक्षणिक दबाव, रैगिंग और संस्थागत बेरुखी प्रमुख कारण थे।

सुप्रीम कोर्ट की सख्ती

छात्रों की बढ़ती आत्महत्याओं पर सुप्रीम कोर्ट ने गहरी चिंता जताई है। हाल ही में विशाखापत्तनम में एक नीट अभ्यर्थी की आत्महत्या के मामले में कोर्ट ने देशभर के शिक्षण संस्थानों के लिए 15 सख्त दिशानिर्देश जारी किए हैं। जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने कहा, 'जब तक सरकार ठोस कानून नहीं बनाती, तब तक ये दिशानिर्देश लागू रहेंगे।' इनमें शामिल हैं:-

  • मानसिक स्वास्थ्य नीति: हर संस्थान को UMMEED गाइडलाइंस और राष्ट्रीय आत्महत्या रोकथाम रणनीति के आधार पर नीति बनानी होगी।
  • काउंसलर की नियुक्ति: 100 से अधिक छात्रों वाले संस्थानों में काउंसलर अनिवार्य।
  • हेल्पलाइन सिस्टम: हेल्पलाइन नंबर क्लासरूम और हॉस्टल में प्रदर्शित करना होगा।
  • संवेदनशील व्यवहार: SC, ST, OBC, LGBTQ+ और अन्य कमजोर वर्गों के प्रति स्टाफ को संवेदनशीलता की ट्रेनिंग।
  • जवाबदेही: आत्महत्या की स्थिति में संस्थान जिम्मेदार होगा, और कानूनी कार्रवाई होगी।

हाल की अन्य घटनाएं

पिछले कुछ महीनों में देशभर में छात्रों की आत्महत्याओं की कई घटनाएं सामने आई हैं:-

  • IIT खड़गपुर (18 जुलाई 2025): मैकेनिकल इंजीनियरिंग के छात्र रीतम मोंडल ने हॉस्टल में फंदे से लटककर आत्महत्या की।
  • इंदौर (मई 2025): एक हफ्ते में चार छात्रों (नर्सिंग, साइंस, लॉ) ने आत्महत्या की।
  • दिल्ली (जुलाई 2025): UPSC की तैयारी कर रहे 25 वर्षीय तरुण ठाकुर ने आत्महत्या की।
  • अहमदाबाद: 15 वर्षीय छात्रा ने स्कूल की चौथी मंजिल से कूदकर जान दी।
  • बाड़मेर (24 जुलाई 2025): 9वीं कक्षा की छात्रा धर्मी ने हॉस्टल में आत्महत्या की।
  • बेंगलुरु: PES यूनिवर्सिटी के B.Tech छात्र ने परीक्षा में अपमान के बाद आत्महत्या की।

क्या है आगे की राह?

श्वेता सिंह की आत्महत्या ने एक बार फिर शिक्षा संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य और जवाबदेही के मुद्दे को उजागर किया है। सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देश लागू होने के बावजूद, क्या ये घटनाएं रुकेंगी? श्वेता और ज्योति जैसी होनहार छात्राओं की मौत न केवल उनके परिवारों के लिए त्रासदी है, बल्कि पूरे समाज के लिए एक चेतावनी भी है।

पुलिस इस मामले की गहन जांच कर रही है, और छात्रों का विरोध प्रदर्शन जारी है। क्या श्वेता को न्याय मिलेगा, और क्या कॉलेज प्रशासन जवाबदेही लेगा? यह समय ही बताएगा।

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