बैंक मैनेजर तन्वी जैन के बाद रिटायर्ड जज हुए डिजिटल अरेस्ट, क्या है ठगी का ये नया तरीका, इससे कैसे बचें?
What to do to avoid cyber fraud: AI के जमाने में ऑनलाइन ठगी का नया तरीका डिजिटल अरेस्ट आया है। राजस्थान के जयपुर में बैंक मैनेजर तन्वी जैन के बाद हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज डिजिटल अरेस्ट हो गए और उनके साथ लाखों रुपए की ठगी तक हो गई।
जयपुर के वैशााली नगर पुलिस थाने में हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज केएस चौधरी ने रिपोर्ट देकर बताया कि वे जयपुर में मीरा पथ पर रहते हैं। साइबर ठगों ने उन्हें पौने तीन घंटे तक डिजिटल अरेस्ट किए रखा और दो रुपए ठग लिए।

केएस चौधरी की रिपोर्ट के अनुसार पांच जुलाई 2024 को उनके पास कॉल आया था। सामने वाले ने खुद का नाम राहुल तिवाड़ी व ट्राई का दूरसंचार अधिकारी बताया। साइबर ठग राहुल तिवाड़ी ने चौधरी से कहा कि उनके नाम से जारी सिम का इस्तेमाल अवैध गतिविधियों के लिए हो रहा है।
रिटायर्ड जज केएस चौधरी ने रिपोर्ट में कहा कि साइबर ठग ने डिजिटल अरेस्ट करके धमकी कि उसके खाते में दो लाख जमा नहीं करवाए तो वह उसके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के केस में वारट जारी करवा देगा। पौने तीन घंटे परेशान होकर चौधरी बैंक पहुंचे और राहुल तिवाड़ी के कहे बैंक खाते में जमा करवा दिए।
क्या होता है डिजिटल अरेस्ट?
- जयपुर में साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ गौतम कुमावत कहते हैं कि लोगों से पैसे ऐंठने के लिए साइबर ठग 'डिजिटल अरेस्ट' नाम का एक नया तरीका अपना रहे हैं, जिसमें वे पीड़ितों को पुलिस, सीबीआई या नारकोटिक्स अफसर बन कर वीडियो कॉल करते हैं।
- खास बात यह है कि इस तरह के साइबर ठग एआई-जनित आवाज या वीडियो का उपयोग करके पीड़ितों को यह डर दिखाते हैं कि उन्होंने कोई गंभीर अपराध किया है। उनके नाम पर ड्रग्स या फ़र्ज़ी पासपोर्ट पकड़ा गया है और उन्हें 'डिजिटल रूप से गिरफ्तार' किया गया है।
- डिजिटल अरेस्ट करने वाले इतने शातिर होते हैं कि वे पीड़ितों को तीन-चार घंटे तक रोककर रखते हैं। ना फोन काटने देते और ना ही घर से बाहर जाने देते। ताकि वे बीच में किसी की मदद ले सकें।
- वे तब तक अपने घर से नहीं निकल सकते जब तक कि वे बड़ी राशि का भुगतान नहीं करते। और अगर भुगतान नहीं किया गया तो उन्हें कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
- साइबर एक्सपर्ट गौतम कुमावत कहते हैं कि वास्तविकता डिजिटल अरेस्ट कुछ होता ही नहीं। कानून में ऐसी कोई गिरफ्तारी का प्रावधान नहीं है। केंद्र सरकार अब तक माइक्रोसॉफ्ट के साथ मिलकर ऐसे साइबर अपराधों, ब्लैकमेल और वसूली के लिए उपयोग किए जाने वाले 1,000 से अधिक स्काइप आईडी को ब्लॉक कर चुकी है।
चक्षु - Report Suspected Fraud Communication
सरकार ने ऐसे साइबर और ऑनलाइन धोखाधड़ी को रोकने के लिए संचार साथी वेबसाइट पर चक्षु पोर्टल लॉन्च किया है। यदि आपको इसी तरह की कॉल या संदेश प्राप्त होता है, तो आप उस नंबर को चक्षु पोर्टल पर रिपोर्ट कर सकते हैं। साइबर ठगी होने की स्थिति में सबसे पहले आप अपने बैंक को इस बारे में सूचित करें। इसके बाद आप उसकी शिकायत क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर या http://www.cybercrime.gov.in पर कर सकते हैं।












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