Rajasthan: आदिवासी समाज के वीर राव बादा का वार्षिकोत्सव, सचिन पायलट ने विपक्षियों को दिया ऐसे जवाब

Rajasthan Sachin Pilot: राजस्थान में आदिवासी समाज को लेकर शुरू हुए सियासी संग्राम को आज एक फिर से हवां मिल गई। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट ने अपने अंदाज में विपक्षियों को ऐसा जवाब दिया कि हर कोई सन्न रह गया।

दरअसल जयपुर के ग्राम दांतली में आज आदिवासी समाज के अंतिम शासक वीर राव बादा जी की मूर्ति स्थापना की प्रथम वर्षगांठ पर भव्य वार्षिक उत्सव का आयोजन किया गया।

कांग्रेसी के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट के साथ दौसा सांसद मुरारी लाल मीणा, टोंक सांसद हरीश मीणा सहित कई दिग्गज नेताओं ने शिरकत की। समारोह में हजारों की संख्या में किसान, नौजवान और महिलाएं मौजूद रही।

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    आदिवासी समाज के वीर राव बादा का वार्षिकोत्सव, सचिन पायलट ने विपक्षियों को दिया ऐसे जवाब

    समारोह में सचिन पायलट की एक झलक पाने के लिए आदिवासी समाज के युवाओं का हुजुम उमड़ गया। हजारों की तादाद में मीणा, गुर्जर, बैरवा सहित कई समाजों के लोग जुटे।

    सचिन पायलट ने जैसे ही अपना संबोधन शुरू किया तो पांडाल सचिन पायलट के जिंदाबाद के नारों से गूंज उठा। सचिन पायलट आई लव यू .... आई लव यू के नारों से युवाओं ने पायलट का स्वागत किया।

    पायलट ने अपने संबोधन में आमजन का धन्यवाद देते हुए कहा कि पूरे क्षेत्र के लोगों को आपने इस कार्यक्रम में निमंत्रित किया। आप सब लोग यहां पर आए, इसके लिए आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद बहुत-बहुत साधुवाद।

    पायलट ने विपक्ष के नेताओं को अपने अंदाज में जवाब देते हुए कहा कि बड़ी सोच लेकर लोगों को समझकर काम करना चाहिए। आपस में लोगों को जोड़ने की बात होनी चाहिए।

    आजकल तमाम नेता तोड़ने की बात करते हैं। विवाद पैदा करने की बात करते हैं। सभी समाजों को जातियों को अलग-अलग धर्म के लोगों को अलग-अलग प्रांत के लोगों को यहां तक की गोत्रों पर लोगों को आपस में टकराने का मौका दिया जाता है।

    आप सब समझदार लोग हो और मुझे खुशी है इस मंच से तमाम विधायकों ने तमाम सांसदों ने एक ही बात बोली है। जयंती के अवसर पर हमें आपको इतिहास को भी याद करना है, लेकिन भविष्य की चिंता भी करनी चाहिए।

    भविष्य बेहतर कब बनेगा, जब हमारे बच्चे पढ़ेंगे लिखेंगे अपने पैरों पर खड़े होंगे, संपन्न होंगे, साधन उनकों मिलेंगे नौकरियों उनकों मिलेगी। जीवन उनका बेहतर होगा।

    समाज में जो कमियां है कुरीतियां है उनको दूर करने का एकमात्र इलाज है। हम शिक्षित हो पढ़े-लिखे और साधन संपन्न करें।

    सचिन पायलट ने आदिवासी समाज के बार-बार आंदोलन करने पर सवाल उठाते हुए कहा कि मैं आप लोगों से दो-तीन सवाल जरूर पूछना चाहता हूं। आज चाहे हमारा आदिवासी समाज हो चाहे, दलित समाज हो बार-बार सड़कों पर क्यों आना पड़ता है ? बार-बार भारत बंद क्यों करना पड़ता है ? बार-बार आंदोलन क्यों करना पड़ता है ?

    हक, अधिकार जो अंबेडकर साहब ने संविधान में लिखे थे आज उनकों कौन लोग चुनौतियां दे रहे हैं । आज वह कौन लोग हैं जिनके साए से आदिवासी दलित समाज के अंदर घबराहट पैदा होती है।

    हम लोग भी सरकार में रहे, मनमोहन सिंह 10 साल प्रधानमंत्री रहे। मै सरकार में मंत्री रहा । मैं आप लोगों से पूछना चाहता हूं जब कांग्रेस की सरकार दिल्ली में थी, मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे, कभी आदिवासी समाज को लगा कि हमारे अधिकार छीन सकते हैं।

    कभी किसी को लगा कि संविधान में संशोधन कर सकते हैं, तो क्या कारण है कि बड़े-बड़े पदों पर बैठे लोगों को बार-बार यह सफाई देनी पड़ती है कि हम संविधान से छेड़छाड़ नहीं करेंगे। हम आरक्षण से छेड़छाड़ नहीं करेंगे।

    आप ही के लोग बोलकर लोगों को उठाते हैं। संदेह पैदा करते हैं। इसलिए मैं आप लोगों से कहना चाहता हूं हम सब लोग जो राजनीति में काम करते हैं, हो सकता है हमारे अलग-अलग सोच अलग-अलग विचारधारा हो लेकिन हम सब का दायित्व है की इस देश में सबसे बड़ा ग्रंथ अगर कोई है हमारा संविधान है।

    एक नई सरकार का गठन दिल्ली में हुआ है राजनीति में हार जीत होती रहती है लेकिन 10 सालों में जब से सरकार दिल्ली में बैठी है हमारा किसान वर्ग है जो वंचित वर्ग है जो पिछड़ा दलित आदिवासी वह अपने आप को दबा महसूस क्यों करता है ?

    बार-बार लोगों के जहन में सवाल क्यों आता है कि अगर 400 पार हो जाते तो न जाने क्या करते ? धन्य है इस देश की जनता जिन्होंने लोकतंत्र को जिंदा रखते हुए एक ऐसी त्रिशूल लोकसभा दी है जहां किसी दल को बहुमत नहीं मिला।

    यह गलतफहमी नहीं पालनी चाहिए किसी दल को बहुमत मिला है। एक मिली जुली सरकार बनी है। बैसाखी के सहारे चल रही है।

    देश की सरकार चलेगी तो संविधान की भावना से चलेगी। आज माहौल बन गया अब देखो जब से राहुल गांधी नेता प्रतिपक्ष बने हैं संसद में क्या हाल है ?

    बड़े-बड़े नेताओं के मुंह मुरझा गए वह रौनक चली गई वह हंसी चली गई और जो बिल लेकर आते हैं पहले कहते है लैटरल एंट्री करेंगे, भर्ती सीधी करेंगे । मतलब वहां पर भी वह जो पिछड़ा आदिवासी गरीब पक्ष के लोग हैं उनके बच्चों को रोकना चाहते थे।

    हमने विरोध किया और सरकार को अपना आदेश वापस लेना पड़ा क्योंकि यह विपक्ष की ताकत है यह आपके संघर्ष की ताकत है।

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