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Rajasthan: एक शहर ऐसा जहां साल में दोबार होता है रावण दहन, जानिए कहां ?

Rajasthan Ravan Dahan News: राजस्थान में एक ऐसा जिला है जहां आज विजयादशमी के साथ ही साल में दो बार रावण दहन किया जाता है। शायह आप नहीं जानते होंगे लेकिन ऐसा बिल्कुल प्रदेश में सालों से विधिवत परम्परा के साथ किया जा रहा है।

तो आज आपकों ले चलते है उस शहर में जहां एक साल में दो बार रावण का दहन किया जाता है और इस रावण दहन में आमजन से लेकर जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहते है।

दरअसल राजस्थान का झालावाड़ ऐसा जिला है जहां रावण दहन की अनोखी परंपरा सदियों से निभाई जा रही है। यहां एक बार नही बल्कि साल में दो बार रावण दहन किया जाता है।

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प्रदेशभर में आज विजयदशमी का पर्व मनाया जा रहा है। जहां जगह-जगह रावण के पुतलों का दहन किया जाएगा। सभी जगह दशहरा का पर्व साल में एक बार मनाया जाता है।

लेकिन प्रदेश में झालावाड़ एक मात्र ऐसा जिला है, जहां साल में एक बार नही बल्कि दो बार दशहरा का पर्व मनाया जाता है, यहां हर छः माह में रावण दहन किया जाता है।

पहले शारदीय नवरात्र के बाद आने वाले विजयादशमी पर, फिर चैत्र नवरात्र के बाद आने वाली दशमी पर यह रावण दहन किया जाता है।

स्थानीय बुजुर्ग बताते हैं कि राडी के बालाजी में चैत्र महोत्सव व दशहरा की शुरुआत सन 1964 में हुई थी। तभी से हर साल चैत्र नवरात्र के बाद रावण दहन किया जा रहा है।

झालावाड़ के मोहन माहेश्वरी, बृजमोहन खंडेलवाल व गजानन ने चैत्र मास में दशहरा महोत्सव की शुरुआत की थी। इसके बाद से लोग जुड़ते गए और भव्यता बढ़ती गई। पहले केवल यहां रामायण पाठ होता था, बाद में दशहरा का पर्व मनाया जाने लगा। तब से चैत्र नवरात्र महोत्सव और दशहरा पर्व हर साल मनाया जा रहा है।

9 दिनों तक चलती है राम कथा

महावीर सेवादल समिति के अध्यक्ष संजय जैन ने बताया कि यहां पहले 9 दिनों तक राम कथा चलती है, जिसमे हर दिन अलग अलग कार्यक्रम होते है जिसमे रामलीला, ब्रज की होली, फूलों की होली, सांकृतिक कार्यक्रम , भजन संध्या, विराट कवि सम्मेलन सहित कही धार्मिक कार्यक्रम नो दिन तक चलते है।

उसके बाद अंतिम दिन चैत्र नवरात्र की दशमी पर रावण दहन किया जाता है। रावण दहन से पहले राम का विजय जुलूस निकाला जाता है, जो शहर के विभिन्न इलाकों से होते हुए राड़ी के बालाजी पहुंचता है। इस दौरान शोभायात्रा मे भारी तादाद मे पुलिस जवान भी तैनात रहते है। शोभायात्रा के राड़ी के बालाजी पहुंचने के बाद राम द्वारा रावण दहन किया जाता है।

70 वर्ष से अधिक समय से चली आ रही यह परंपरा

जैन ने बताया कि यह परंपरा करीब 70 वर्ष से अधिक समय से आज भी चली आ रही है। इसकी शुरुआत महावीर सेवादल समिति के पूर्व काल के कार्यकर्ताओं द्वारा शुरू की गई थी, तभी से इसे भव्य आयोजन के रूप में मनाया जाता रहा है।

दहन से पूर्व बालाजी मन्दिर समिति महावीर सेवादल के द्वारा विजयी जुलुस निकाला जाता है, जुलूस शहर के पंचमुखी मन्दिर परिसर से पूजा अर्चना के साथ विभिन्न झांकियों के साथ प्रारंभ होता है, जो शहर के राड़ी के बालाजी पहुंचकर समाप्त होता है। फिर यहां राम द्वारा रावण का वध किया जाता है।

पुतले की लंबाई 10-15 से बढ़कर 50 फीट तक की

पहले रावण के पुतले की लंबाई 10 से 15 फीट होती थी। बाद में इसकी लंबाई बढ़ती गई। बीस और पच्चीस के बाद 35 अब यहां 50 फीट तक का पुतला बनाया जाता है। पहले स्थानीय लोग ही पुतला बनाते थे, लेकिन पिछले 20 साल से छीपाबड़ौद व शेरगढ़ के कारीगर बना रहे हैं।

महावीर सेवादल समिति के अध्यक्ष संजय जैन ने बताया कि राडी के बालाजी में चैत्र नवरात्र व दशहरा महोत्सव 1965 से हो रहा है। चालीस साल से महावीर सेवादल यह आयोजन करा रहा है। हालांकि शारदीय नवरात्र के बाद विजयादशमी पर दशहरा पर्व का आयोजन नगर परिषद की और से होता है।

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