रेलवे ने इस VIDEO में बताई SIKAR-JAIPUR ट्रेन की 100 साल पुरानी STORY, वर्ष 1916 की दिला दी याद

सीकर। राजस्थान में रेलवे ने कामयाबी की एक और नई कहानी लिख दी है। सीकर से जयपुर के बीच भी अब ब्रॉडगेज ट्रेन दौड़ने लगी है। राजधानी से सीकर तक अंग्रेजों के जमाने में मीटरगेज लाइन बिछाई गई थी, जिन्हें तीन साल पहले ब्रॉडगेज में बदलना शुरू किया गया। आमान परिवर्तन कार्य पूर्ण होने पर 21 अक्टूबर 2019 को रेलमंत्री पीयूष गोयल ने वीसी के माध्यम से रींगस रेलवे स्टेशन से जयपुर-सीकर के बीच बड़ी ट्रेन सेवा का शुभारंभ किया। इसके बाद से जयपुर-सीकर के बीच सप्ताह में छह दिन ब्रॉडगेज ट्रेन चलने लगी है।

1916 में चली पहली ट्रेन

1916 में चली पहली ट्रेन

बता दें ​कि सीकर-जयपुर ट्रेन की कहानी महज इतनी सी नहीं बल्कि यह सौ से भी ज्यादा साल पुरानी है। पूरी कहानी को खुद उत्तर पश्चिम रेलवे के जनसम्पर्क विभाग ने 5 मिन​ट 26 सैकंड के वीडियो के जरिए बयां किया है। रेलवे ने वीडियो में बताया है कि जयपुर से रींगस के बीच रेल यात्रा का सफर वर्ष 1916 में शुरू हुआ। इस रेल का वर्ष 1922 में रींगस से सीकर तक बढ़ाया गया। मतलब कि वर्ष 1922 में जयपुर से सीकर के बीच पहली बार ट्रेन दौड़ी।

देशभर के ब्रॉडगेज नेटवर्क से जुड़ा सीकर

देशभर के ब्रॉडगेज नेटवर्क से जुड़ा सीकर

सौ साल बाद युनीगेज पॉलिसी के तहत जयपुर से सीकर के बीच मीटरगेज रेल लाइन को ब्रॉडगेज में बदलने का कार्य शुरू हुआ। अब ब्रॉडगेज ट्रेन शुरू होने से शेखावाटी में विकास के नए अध्याय की शुरुआत हुई है। ब्रॉडगेज से सीकर का जयपुर के साथ-साथ देश के अन्य भागों के ब्रॉडगेज नेटवर्क सीधा जुड़ाव हो गया। वीडियो में यह भी बताया गया है कि पूर्व में इस खंड पर मीटर गेज और ब्रॉडगेज ट्रेनों की डायमंड क्रोसिंग होने से ट्रेनों को स्टेशन की बाहर की ओर रुकना पड़ता था, जिसके कारण ट्रेनों का संचालन समय ​अधिक रहता था।

7.3 किमी लंबा है रींगस डेटोर पुल

7.3 किमी लंबा है रींगस डेटोर पुल

रींगस में जयपुर और फुलेरा की ओर दो रेल मार्ग आते हैं तथा मालगाडियों के लिए अलग गलियारा यानी भारतीय रेलवे का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर भी रींगस से फुलेरा की ओर गुजरता है। अब इतनी लाइनों के एक साथ संचालन में होने से ट्रेनों का निर्बाध संचालन भी किसी चुनौती से कम नहीं। इसके समाधान के लिए रींगस से जयपुर की ओर आने वाले मार्ग को डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और फुलेरा की ओर जाने वाली लाइन के ऊपर से ले जाने की परिकल्पना ने दिया 7.3 किलोमीटर लंबाई का रींगस डेटोर पुल। इस पुल के बनने से किसी भी दिशा से आ रही ट्रेन को मार्ग देने के लिए रुकना नहीं पड़ेगा और रेल यातायात निर्बाध रूप से संचालित होगा। रींगस के इस डेटोर पुल का नाम भारतीय रेलवे के गिने-चुने पुलों में शामिल हो गया है।

जानिए क्या है रींगस डेटोर पुल

जानिए क्या है रींगस डेटोर पुल

बता दें कि रींगस से शुरू होकर छोटा गुढ़ा तक जाने वाला 7.30 किलोमीटर लंबे पुल की लागत करीब 187 करोड़ रुपए आई है। पुल पर 3.5 किलोमीटर कोसीमेंट गार्डर से ऊंचाई प्रदान की गई है। यह पुल रींगस में कस्बे के साथ-साथ मेंडा नदी के ऊपर से भी गुजरता है। 1304 आरसीसी पिलर और 338 पीसीसी पिलर रींगस पुल को मजबूती प्रदान करते हैं। पुल के काम में आने वाली सामग्री को गहन परीक्षण के बाद ही काम में लिया गया है। पुल के आस-पास की गांव-ढाणियों के लोगों के लिए छह रास्ते छोड़े गए हैं। यह पुल राजस्थान के सबसे लंबे रेल पुलों में से एक है। इसका निर्माण 22 माह के रिकॉर्ड समय में किया गया है।

यहांं देखें जयपुर सीकर ट्रेन के इतिहास का वीडियो

peeyus goyal
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