Sadhvi Prem Baisa Case: साध्वी मौत मामले में पिता पर गहराया संदेह, SIT की सुई इन 3 बिंदुओं पर अटकी
Sadhvi Prem Baisa Case: जोधपुर में साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध मौत मामले में एसआईटी की जांच अभी भी पिता के आसपास घूम रही है। जांच टीम को अब डीएनए और विसरा रिपोर्ट का इंतजार है। पुलिस की जांच फिलहाल तीन प्रमुख लोगों के इर्द-गिर्द घूम रही है साध्वी के पिता वीरमनाथ, कंपाउंडर देवी सिंह और आश्रम के सेवादार सुरेश। इन तीनों से कई बार पूछताछ हो चुकी है और हर बयान के बाद नए सवाल खड़े हो रहे हैं।
जांच के दौरान साध्वी के कमरे से दो आईफोन और एक सैमसंग मोबाइल बरामद किए गए हैं। पुलिस का मानना है कि इन फोन में मौत से जुड़े अहम सुराग छिपे हो सकते हैं। जब पिता वीरमनाथ से इन मोबाइल के पासवर्ड मांगे गए तो उन्होंने जानकारी देने से इनकार कर दिया। जांच एजेंसियों का शक और गहरा गया है।

Sadhvi Prem Baisa Case: पिता पर 3 वजहों से संदेह गहराया
- पिता वीरमनाथ ही साध्वी के आखिरी समय में उनके साथ मौजूद थे। उन्होंने पहले पोस्टमार्टम कराने से भी इनकार किया था। आश्रम का पूरा प्रबंधन भी उन्हीं के हाथ में था, इसलिए संदेह गहराया है।
- पिता ने ही इंस्टाग्राम पर आखिरी पोस्ट किया था और पुलिस के आईफोन और सैमसंग फोन के पासवर्ड मांगने पर देने से इनकार कर दिया। पुलिस को शक है कि पिता कई गहरे राज़ छुपाना चाहते हैं। इतना ही नहीं वीरमनाथ ने पहले साध्वी के पास 3 मोबाइल होने की बात भी नहीं मानी थी।
- पुलिस की जांच में सामने आया है कि साध्वी के कार्यक्रमों, संपत्ति और आश्रम समेत दूसरी चीजों की देखभाल पिता ही करते थे। ऐसे में प्रॉपर्टी एंगल से जुड़े विवाद से इनकार नहीं किया जा सकता है।
Sadhvi Prem Baisa Case Update: पिता ने ही खिलाई थी दाल
एसआईटी की जांच में सामने आया है कि आम तौर पर पिता वीरमदास साध्वी के खाने-पीने का ध्यान नहीं रखते थे। उनके लिए खाना लाने का काम सेवादार सुरेश किया करता था। घटना वाली रात साध्वी को हल्का जुकाम था। उन्होंने दाल खाने की इच्छा जताई थी और सुरेश ही कमरे में जा रहा था। अचानक पिता वीरमदास ने दाल ले ली और उन्होंने ही उन्हें आखिरी बार खाना खिलाया था। दाल खाने के कुछ देर बाद साध्वी की तबीयत बिगड़ने लगी और सांस लेने में परेशानी होने लगी। इसके बाद कंपाउंडर देवी सिंह को बुलाया गया, जिन्होंने इंजेक्शन लगाया।
साध्वी के दो और करीबियों पर भी शक
परिजनों के मुताबिक इंजेक्शन लगने के थोड़ी देर बाद साध्वी का शरीर नीला पड़ने लगा और कुछ ही समय में उनकी मौत हो गई। इस मामले में पुलिस ने साध्वी के दो और करीबियों से भी पूछताछ की है। कंपाउंडर देवी सिंह ने ही इंजेक्शन लगाया था। इसलिए उनकी भूमिका सवालों में है। उनकी डिग्री और इलाज के तरीके की भी पड़ताल हो रही है। हालांकि, कंपाउंडर का कहना है कि डॉक्टर की लिखी पर्ची के आधार पर ही उसने दवाई दी थी। इसके अलावा, सेवादार सुरेश से भी लंबी पूछताछ की गई है। वही साध्वी के लिए खाना और काढ़ा तैयार करता था और घटनाक्रम का प्रत्यक्ष गवाह है।












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