Pushkar Mela: 23 करोड़ की भैंस और 15 करोड़ का घोड़ा! आज से शुरू हुआ एशिया का सबसे महंगा पुष्कर मेला
Pushkar Mela 2025: राजस्थान के पुष्कर में आज (30 अक्टूबर) से शुरू हो रहे भारत के सबसे बड़े पशु मेले (Pushkar Camel Fair) के लिए व्यापारियों, पशु प्रजनकों और दुनिया भर के पर्यटकों का जमावड़ा शुरू हो चुका है। यह हफ़्ता भर चलने वाला मेला न केवल करोड़ों रुपये के पशुओं के व्यापार का केंद्र है, बल्कि यह राजस्थान की समृद्ध परंपरा और जीवंत संस्कृति का भी भव्य प्रदर्शन है।
इस बार मेले में ऐसे पशु चर्चा का विषय बने हुए हैं, जिनकी क़ीमतें सुनकर आप दंग रह जाएंगे। रिपोर्ट्स के अनुसार मेले में एक घोड़े की क़ीमत 15 करोड़ रुपये और एक भैंस की क़ीमत तो 23 करोड़ रुपये तक बताई जा रही है!

हजारों पशुओं का रजिस्ट्रेशन
इस साल 4,000 से अधिक पशुओं (घोड़े, ऊंट और गायें) का रजिस्ट्रेशन हुआ है। जहां एक तरफ़ पशुओं का रिकॉर्ड तोड़ मूल्य चर्चा में है, वहीं दूसरी तरफ़ यह मेला अब आधुनिकता को भी अपना रहा है। व्यापार में पारदर्शिता और पता लगाने की क्षमता (Traceability) को बेहतर बनाने के लिए राज्य के पशुपालन विभाग ने पशुओं के रिकॉर्ड को डिजिटाइज़ करना शुरू कर दिया है। विभाग पशुओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा की निगरानी भी कर रहा है।
सुरक्षा व्यवस्था और मेहमान नवाज़ी
इतने बड़े आयोजन के लिए सुरक्षा भी पुख्ता की गई है। अजमेर ग्रामीण डीएसपी रामचंद्र चौधरी ने जानकारी दी कि पिछले वर्षों की तुलना में इस बार पुलिस की तैनाती कहीं ज़्यादा है। मेले के दौरान 2,000 से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया जाएगा, जिन्हें यह सुनिश्चित करने के लिए विशेष रूप से निर्देश दिए गए हैं कि आगंतुकों को किसी तरह की असुविधा न हो।
शाम को पवित्र सरोवर पर महाआरती
जैसे-जैसे पवित्र नगरी में शाम ढलेगी, ध्यान पुष्कर सरोवर के घाटों की ओर जाएगा, जहां श्रद्धालु और आगंतुक महा आरती और दीपदान समारोह के लिए एकत्र होंगे। सैकड़ों दीये धीरे-धीरे सरोवर के जल पर तैरते हैं, जो सुनहरे प्रतिबिंबों के साथ पानी को रोशन करते हैं-यह दृश्य आध्यात्मिकता और भव्यता का एक अलौकिक मिश्रण होता है।
रात 06:30 बजे: लोक कलाकारों का जलवा
दिन का समापन बहुप्रतीक्षित 'वॉइस ऑफ़ पुष्कर' सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ होगा। इसमें लोक संगीतकार, नर्तक और कॉमेडी एक्ट्स देखने को मिलेंगे। राजस्थानी लोक कलाकारों के इन जीवंत प्रदर्शनों, हंसी और तालियों की गूंज के साथ, मेला अपने पहले दिन की शानदार छाप छोड़ेगा।
पुष्कर मेले का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व
पुष्कर मेला का वास्तविक नाम कार्तिक मेला है। इस मेले की जड़ें हिंदू धर्मग्रंथों में गहरी समाई हुई हैं और यह सदियों से आयोजित किया जा रहा है। इसका इतिहास पौराणिक कथाओं से जुड़ा हुआ है। ऐसा माना जाता है कि इस पवित्र स्थान पर भगवान ब्रह्मा ने कार्तिक पूर्णिमा के दिन एक महान यज्ञ किया था, जिससे यहां के सरोवर का निर्माण हुआ।
इसी धार्मिक महत्व के कारण कार्तिक पूर्णिमा पर पुष्कर सरोवर में स्नान करना अत्यंत शुभ माना जाता है, जिससे भक्तों की भीड़ उमड़ती है। धार्मिक तीर्थयात्रा के लिए एकत्र होने वाली इसी विशाल भीड़ ने धीरे-धीरे इसे एक बड़े पशु व्यापार केंद्र के रूप में विकसित कर दिया। इसलिए, यह मेला केवल पशुओं के बेचने और खरीदने का बाज़ार नहीं है, बल्कि यह धर्म, व्यापार और संस्कृति के एक प्राचीन संगम का प्रतीक है, जो हर साल लाखों लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है।












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