Priya Pariwar के निदेशक तेजपाल नूनिया की मौत, कोर्ट में पेशी के दौरान अचानक चली गई जान

सीकर। प्रिया परिवार के निदेशक तेजपाल नूनिया की बुधवार को मौत हो गई। मौत की वजह हार्ट अटैक बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार करोड़ों की ठगी के आरोप में जेल में बंद प्रिया परिवार के निदेशक तेजपाल नूनिया को बुधवार को जयपुर जेल से चालानी गार्ड नीमकाथाना में पेशी पर लेकर आए थे।

नीमकाथाना में लाए थे पेशी पर

नीमकाथाना में लाए थे पेशी पर

कोर्ट में पेश करने के बाद कोर्ट ने लंच के बाद का समय दिया। उसी दौरान तेजपाल नूनिया को अचानक सीने में दर्द की शिकायत हुई। चालानी गार्ड उसे तुरंत नीमकाथाना के कपिल अस्पताल में लेकर गए, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। फिलहाल पुलिस ने नीमकाथाना कपिल अस्पताल की मोर्चरी शव को रखवाया है।

कोर्ट में फिर करना था पेश

कोर्ट में फिर करना था पेश

हैड कांस्टेबल ओमप्रकाश ने बताया कि तेजपाल नूनिया के साथ ही उसके भाई सुरेंद्र नूनिया एव भतीजे नूनिया महेश को भी कोर्ट में पेश किया गया था। कोर्ट में लंच समय के बाद दुबारा पेश करना था। इसी दौरान अचानक तेजपाल नूनिया की हार्ट अटैक की वजह से मौत हो गई।

क्या है प्रिया परिवार का इतिहास

क्या है प्रिया परिवार का इतिहास

बता दें कि वर्ष 2002 में राजस्थान के झुंझनूं जिले के गांव नूनिया के तेजपाल नूनिया, सुरेन्द्र नूनिया और महेश नूनिया ने प्रिया परिवार के नाम से इनामी चिट फंड कंपनी शुरू की थी। राजस्थान की राजधानी जयपुर व झुंझुनूं समेत हरियाणा के हिसार, सिरसा व भिवानी आदि शहरों में प्रिया परिवार के कार्यालय खोले गए। लोगों को लुभावनी योजनाओं के जरिए सदस्य बनने के लिए प्रोत्साहित किया जाता था। कंपनी की मेंबरशिप लेने पर लोगों से 6800 रुपए जमा कराए जाते थे। वादा किया जाता था कि तीन साल बाद मेच्योरिटी पर 25,000 रुपए मिलेंगे।

2011 में मिलनी शुरू हुई शिकायतें

2011 में मिलनी शुरू हुई शिकायतें

इसके चलते हजारों लोगों ने अपना पैसा जमा कराया था। पूरे देश में कंपनी ने 2, 87,000 सदस्य बनाए थे। अकेले हरियाणा में कंपनी के 12 हजार से ज्यादा मेंबर थे। आयकर विभाग में जमा कंपनी की रिटर्न में सालाना टर्नओवर 260 करोड़ रुपए बताया गया है। वर्ष 2011 में प्रिया परिवार कंपनी पर धोखाधड़ी के आरोप लगने शुरू हुए। राजस्थान और हरियाणा से सैकड़ों शिकायतें पुलिस थानों में दर्ज हुई। तब सीकर पुलिस ने नूनिया भाइयों को गिरफ्तार कर जेल भिजवाया था और इनके कार्यालयों को सील कर दिया था।

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