राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा का दिल्ली दौरा, सचिन पायलट वाली गलती नहीं दोहराना चाहती पार्टी

Rajasthan News: राजस्थान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा पिछले दिनों दिल्ली दौरे पर रहे। इस दौरान प्रदेश अध्यक्ष डोटासरा ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की है। गोविंद सिंह डोटासरा के दिल्ली दौरे को लेकर सियासी गलियारों में चर्चा है। प्रदेश में उनके इस दौरे को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। राजनीति के जानकारों की मानें तो गोविंद सिंह डोटासरा का कार्यकाल पूरा होने में साल भर का समय बचा है। ऐसे में डोटासरा अपना कार्यकाल बढ़वाने के प्रयास के लिए दिल्ली दौरे पर गए हैं। अब उनका कार्यकाल बढ़ाने को लेकर सियासी गलियारों में चर्चा है।

सचिन पायलट वाली गलती नहीं दोहराना चाहती कांग्रेस

राजस्थान में कांग्रेस ने साल 2014 में सचिन पायलट को प्रदेश अध्यक्ष बनाया था। पायलट का कार्यकाल पूरा होने के बाद पार्टी ने उनका कार्यकाल एक्सटेंड कर दिया था। साल 2020 में मुख्यमंत्री पद को लेकर हुई बगावत के बाद सचिन पायलट को प्रदेश अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री पद से हटा दिया गया। पार्टी अध्यक्ष रहने के दौरान सचिन पायलट ने संगठन में अपना एक गुट तैयार कर लिया था। प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए सचिन पायलट ने पार्टी को मजबूत करने के लिए संघर्ष किया। इससे सचिन पायलट की मुख्यमंत्री पद को लेकर अपेक्षाएं बढ़ गई। ऐसे में कांग्रेस के भीतर सत्ता में रहते हुए बड़ा संघर्ष चला। जो अब तक जारी है।

sachin pilot

अब डोटासरा की गुटबाजी का डर

पार्टी ने सचिन पायलट की जगह गोविंद सिंह डोटासरा को अध्यक्ष बनाया। पार्टी अध्यक्ष बनने के बाद डोटासरा ने अच्छी परफॉर्मेंस भी दिखाई। प्रदेश में अब गोविंद सिंह डोटासरा को पार्टी के बड़े नेता के तौर पर जाना जाता है। राजनीति के जानकार कहते हैं कि विधानसभा और लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने गोविंद सिंह डोटासरा के अध्यक्ष रहते हुए अच्छा प्रदर्शन किया। ऐसे में पार्टी हाईकमान को अब डोटासरा द्वारा गुटबाजी करने या मुख्यमंत्री बनने की अपेक्षा का डर है। ऐसे में पार्टी प्रदेश में समय रहते अध्यक्ष बदलना चाहती है।

विधानसभा उपचुनाव के मद्देनजर बदलाव की तैयारी

राजस्थान में अगले कुछ महीनों में विधानसभा उपचुनाव होने हैं। विधानसभा और लोकसभा चुनाव के बाद से कांग्रेस उत्साहित है। विधानसभा सत्र में भी कांग्रेस सत्ता पक्ष पर भारी ही रही है। पार्टी अब उपचुनाव में अपनी परफॉर्मेंस बरकरार रखना चाहती है। ऐसे में पार्टी में बदलाव किए जा सकते हैं। भाजपा ने राजस्थान में ब्राह्मण चेहरे को मुख्यमंत्री और ओबीसी मूल के नेता को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर बड़ा संदेश दिया है। ऐसे में चर्चा है कि पार्टी विधानसभा उपचुनाव को देखते हुए किसी ब्राह्मण या आदिवासी चेहरे को प्रदेश अध्यक्ष बना सकती है।

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