फूल सी बेटी को कांटों में फेंका : अपनों ने ठुकराया तो अस्‍पताल स्‍टाफ ने अपनाया, 'परी' को मिल रहा दुलार

चूरू, 19 अगस्‍त। इस मासूस को दुनिया में आए चंद घंटे ही हुए थे। ठीक से आंखें भी नहीं खोल पाई थी। छुईमुई सा इसका शरीर बस मां का आंचल और मखमली बिछौना चाह रहा था। इसे अपनों का ढेर सारा लाड़-दुलार मिलना चाहिए था, मगर अपने तो पराए निकले। इसे प्‍यार से निहारना तो दूर यह किसी को भी फूटी आंख नहीं सुहाई। शायद यही वजह है कि फूल जैसी इस बेटी को मरने के लिए कांटों में फेंक दिया गया। इसका पूरा शरीर छलनी हो गया। जगह-जगह घाव हो गए। कांटे भी चुभे और चीटियों ने भी काटा। अपनों ने तो भले ही इसकी मौत चाही पर जिंदगी की डोर इतनी लंबी थी कि वे चाहकर भी नहीं काट पाए। हर किसी को झकझोर देने वाला यह मामला राजस्‍थान के चूरू जिले की सरदारशहर तहसील के गांव पुनूसर का है।

सरदारशहर के सरकारी अस्‍पताल में पहुंचाया

सरदारशहर के सरकारी अस्‍पताल में पहुंचाया

दरअसल, 13 अगस्‍त की सुबह पुनूसर के ग्रामीणों ने कंटीली झाड़ियों में किसी बच्‍चे के रोने की आवाज सुनी। पास देखा तो एक नवजात लहूलुहान हालत में रो रही थी। ग्रामीणों ने बिना कोई देरी किए इस मासूस बच्‍ची को सरदारशहर के सरकारी अस्‍पताल में पहुंचाया।

नर्सिंग स्‍टाफ द्वारा इसकी देखभाल की जा रही

नर्सिंग स्‍टाफ द्वारा इसकी देखभाल की जा रही

वहां पर प्राथमिक उपचार देने के बाद गंभीर हालत में चूरू जिला मुख्‍यालय स्थित शिशु अस्पताल के नीकू वार्ड में भर्ती करवाया गया। अब इस बच्‍ची की स्थिति में सुधार है और नीकू वार्ड के डॉक्‍टर व नर्सिंग स्‍टाफ द्वारा इसकी देखभाल की जा रही है।

12 घंटे के अंदर जन्म हुआ

12 घंटे के अंदर जन्म हुआ

म‍ीडिया से बातचीत में चूरू के नीकू वार्ड अस्पताल प्रभारी शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ चंद्रभान जांगिड़ ने बताया कि बच्ची का पिछले 12 घंटे के अंदर जन्म हुआ है। खुले में रहने के कारण से वह अस्वस्थ हो चुकी है। बच्ची का एसएनसीयू वार्ड में उपचार जारी है। अस्पताल में कार्यरत एएनएम विनोद कंवर, श्यामलाल जांगिड़ और डॉक्टर चंद्रभान ने बच्ची को नहलाया और बच्ची के शरीर को पूरी तरह से साफ किया। नर्सिंग स्टाफ ने बालिका को परी नाम दिया है।

 चाइल्ड हेल्प लाइन की टीम को सूचना कर दी गई

चाइल्ड हेल्प लाइन की टीम को सूचना कर दी गई

नीकू वार्ड प्रभारी विजयपाल पूनिया के अनुसार फिलहाल नवजात बालिका स्वस्थ है। इसका वजन करीब दो किलो आठ सौ ग्राम है। नवजात बालिका को फिडिंग करवाई गई है। नवजात की देखभाल के लिए अतिरिक्त स्टाफ लगाया गया है। नवजात को एमसीएच में भर्ती करने और हेल्थ चैकअप के बाद चाइल्ड हेल्प लाइन की टीम को सूचना कर दी गई है।

 नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई वार्ड में लाया गया

नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई वार्ड में लाया गया

नवजात बालिका को सरदारशहर अस्पताल से लेकर आई नर्सिग ऑफिसर सुनीता पूनिया ने बताया कि 13 अगस्त को जिस हालत में नवजात मिली थी। उसकी स्थिति ठीक नहीं थी। अब नवजात बेहतर स्थिति में है। बुधवार दोपहर मातृ शिशु अस्पताल के नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई वार्ड में नवजात को लाया गया तब से ही वार्ड में मौजूद नर्सिंग और डॉक्टर उसकी विशेष देखभाल कर रहे हैं।

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