Rajasthan: बुलडोजर एक्शन पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी, सुनिए मंत्री कन्हैयालाल चौधरी ने क्या कहा ?

Rajasthan News: देश के उत्तर प्रदेश से शुरू हुआ बुलडोजर एक्शन के राजस्थान सहित कई भाजपा शासित राज्यों में ट्रेंड बनकर चल रहा है। इसी बुलडोजर एक्शन पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद भजनलाल सरकार के कैबिनेट मंत्री कन्हैयालाल चौधरी का बड़ा बयान सामने आया है।

बुलडोजर न्याय को लेकर सुप्रीम कोर्ट के सवालों के बाद राजस्थान के जलदाय मंत्री कन्हैयालाल चौधरी ने कहा कि 'राजस्थान में कहीं भी गलत तरीके से बुलडोजर कार्रवाई नहीं की गई है। जिस भी बिल्डिंग को भी तोड़ा गया है वो अवैध रूप से बनाई गई थी।

मंत्री कन्हैयालाल चौधरी ने कहा कि राजस्थान में रोजाना कई जगह कार्रवाई होती हैं, जो लोग सरकारी जमीन या दूसरे की जमीन पर कब्जा करके रह रहे हैं, उन्हीं पर यह कार्रवाई हो रही है।

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    Rajasthan: बुलडोजर एक्शन पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी, सुनिए मंत्री कन्हैयालाल चौधरी ने क्या कहा ?

    कैबिनेट मंत्री चौधरी ने विपक्ष पर बिना नाम लिए चुटकी लेते हुए कहा कि जब खबरों में किसी समाज विशेष का नाम आता है तो इस कानूनी कार्रवाई को कुछ और नाम दे दिया जाता है। राजस्थान हो या यूपी यहां जिनती भी कार्रवाई हुई है, वो सभी अवैध निर्माण पर हुई है।

    दरअसल उदयपुर जिले में बिते दिनों चाकूबाजी की घटना के बाद हुए तनाव को लेकर आरोपी छात्र के घर पर भजनलाल सरकार ने 17 अगस्त को बुलडोजर चलवा दिया था। इस कार्रवाई के विरोध में आरोपी छात्र के पिता 60 वर्षीय ऑटो-रिक्शा चालक राशिद खान ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और न्याय की मांग की।

    सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को इस मामले की सुनवाई की और अपराधों के आरोपी व्यक्तियों के घरों या संपत्तियों को ध्वस्त करने की बढ़ती प्रवृत्ति की आलोचना करते हुए इसे 'बुलडोजर न्याय' का मामला बताया।

    सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि किसी भी अचल संपत्ति को सिर्फ इसलिए ध्वस्त नहीं किया जा सकता क्योंकि आरोपी किसी अपराध में शामिल है और ऐसा विध्वंस केवल तभी हो सकता है जब ढांचा अवैध हो।

    वहीं पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म 'एक्स' पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी की तारीफ करते हुए लिखा कि देश में पिछले कुछ सालों से शुरू हुए "बुलडोजर कल्चर" पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी स्वागतयोग्य है।

    किसी भी आरोपी के घर पर बुलडोजर चला देना न्याय नहीं है। मैंने दो वर्ष पहले भी इस कल्चर के खिलाफ सार्वजनिक तौर पर कमोवेश ऐसे ही विचार रखे थे, जैसी आज सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की है। त्वरित न्याय जैसे सिद्धांत एक सभ्य और कानून का पालन करने वाले समाज में स्वीकार्य नहीं हैं, एवं संविधान की मूल भावना के पूरी तरह विपरीत है।

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