मेजर मुस्तफा बोहरा: मां बुन रही थीं सेहरा, बेटा शादी से 6 माह पहले तिरंगे में लिपटकर आया घर, मिला शौर्य चक्र
Major Mustafa Bohra Shaurya Chakra: राष्ट्रपति भवन में 5 जुलाई 2024 को शहादत का सम्मान किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 10 कीर्ति चक्र और 26 शौर्य चक्र प्रदान किए। मरणोपरांत शौर्य चक्र पाने वालों में राजस्थान के भी दो शहीद बेटे शामिल थे। एक मेजर मुस्तफा बोहरा व दूसरे मेजर विकास भांभू। दोनों के परिजनों ने अवार्ड प्राप्त किए हैं।
कौन थे शहीद मेजर मुस्तफा
शहीद मेजर मुस्तफा बोहरा राजस्थान के उदयपुर के हाथीपोल इलाके की अजंता गली के रहने वाले थे। 21 अक्टूबर 2022 को शहीद हुए मेजर मुस्तफा अविवाहित थे। उनकी सगाई हो चुकी थी। छह माह बाद ही शादी होने वाली थी, मगर उससे पहले वे वीरगति को प्राप्त हो गए।

मां फातिमा बोहरा बेटे की शादी के लिए सेहरा बुन रही थीं, मगर बेटा तिरंगे में लिपटकर घर आया तो मां बेसुध हो गईं। वहां मौजूद कोई शख्स आंसू नहीं रोक पाया। शहीद बेटे के नाम से शौर्य चक्र पाने के बाद मां फातिमा बोलीं कि 'यह मेरे और पूरे मेवाड़ राजस्थान के लिए गौरव की बात है। यह वो क्षण है जिसके लिए ऐसे वीरों को मां हमेशा तैयार रहती हैं। ऐसी बहादुर मां भी जानती हैं कि उनका फौजी बेटा कभी देश के लिए प्राणों की बाजी लगा सकता है।'
कौन थे शहीद मेजर भांभू?
शहीद मेजर विकास भांभू को भी मरणोपरांत शौर्य चक्र मिलर है। ये राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के रामपुरा गांव के रहने वाल थे। मेजर विकास भांभू ने प्रारंभिक शिक्षा गांव से ली और फिर सहकारी विभाग में कार्यरत पिता के साथ सीकर चले आए। आगे की पढ़ाई सीकर से पूरी की।

विकास भांभू ने 12वीं की परीक्षा के साथ ही एनडीए का एग्जाम दिया था। जिसमें चयनित होने पर भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट चयनित होकर ज्वॉइन कर लिया था। विकास ने टास्क और मिशन को सफलता पूर्वक पूरा किया। साथ ही मेजर विकास ने जितने भी आंतरिक कोर्स किए, वे सब में टॉपर रहे।

अरुणाचल प्रदेश हैलीकॉप्टर हादसा क्या था?
21 अक्टूबर 2022 को सुबह साढ़े दस बजे भारतीय सेना का हैलीकॉप्टर अरुणाचल प्रदेश के बॉर्डर एरिया में टोही मिशन पर था। हैलीकॉप्टर में 252 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन के मेजर विकास भांभू और उनके को-पायलट मेजर मुस्तफा बोहरा व उनके साथी फौजी सवार थे।
मिशन पूरा कर वापस लौट रहे थे तब हेलिकॉप्टर में आग लग गई थी। कहा जाता है कि उस समय हेलिकॉप्टर को नीचे उतारा जा सकता था, लेकिन नीचे मेकिंग नाम का आबादी क्षेत्र और उसके साथ आर्मी का बेस था। आसमां में आग का गोला बना हेलिकॉप्टर उस जगह उतारा जाता तो बड़ी जनहानि हो सकती थी। ऐसे में हैलीकॉप्टर को जंगल की तरफ ले गए। जहां हैलीकॉप्टर क्रैश हो गया और मुस्तफा बोहरा व विकास भांभू शहीद हो गए।












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