Lok Sabha Election: नेताजी का बिगड़ गया एलाइमेंट...और कैसे बेनीवाल के बयानों पर किया मिर्धा ने पलटवार ?

Lok Sabha Election: राजस्थान के नागौर में इन दिनों सियासी पारा हाई हो गया है। आरएलपी प्रत्याशी हनुमान बेनीवाल के बयानों के बाद भाजपा प्रत्याशी ज्योति मिर्धा ने तंज कसते हुए पलटवार किया है और कहा है कि नेताजी का एलाइमेंट बिगड़ गया है।

आपकों बता दे बिते दिनों हनुमान बेनीवाल ने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ पर तंज कसते हुए कहा था कि सरपंच के चुनाव भी नहीं जीत सकते है साथ अन्य जाट नेताओं पर विवादित टिप्पणियां की थी।

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अब भाजपा प्रत्याशी ज्योति मिर्धा ने पलटवार करते हुए कहा है कि जो भी खिलाफ बोलते हैं उन पर तेल-पानी लेकर चढ़ जाते हैं नेताजी, सबको गाली देते हैं। ज्योति मिर्धा ने कहा कि मीडिया के माध्यम से मैं 5 दिन पहले हनुमान बेनीवाल से पूछा था उस आरक्षण वाले लेटर में क्या लिखा हुआ था। बेनीवाल स्वयं खुद इस बात का जवाब देवें।

मैं सही बात तब बताऊंगी की हनुमान बेनीवाल ने आरक्षण पर जो लेटर लिखा था उसके अंदर क्या लिखा है उस पर जवाब देंगे। अमित शाह और प्रधानमंत्री भी आरक्षण पर स्पष्ट जवाब दे चुके हैं।

नागौर लोकसभा क्षेत्र में मतदान की तारीख नजदीक आते ही जुबानी जंग तेज हो गई है। भाजपा प्रत्याशी डॉ. ज्योति मिर्धा ने बलाया गांव की चुनावी सभा में कहा कि वो जो राजनीति करते हैं उसका कोई सार नहीं है।

वैसे भी फिलहाल इंडी गठबंधन प्रत्याशी हनुमान बेनीवाल का तो एलाइनमेंट बिगड़ा हुआ है। बेनीवाल पहले मुझको फिर दिव्या मदेरणा, फिर परसराम मदेरणा और नाथूराम मिर्धा को गालियां दीं। लेकिन कोई बात नहीं, ठीक है सुन लिया। लेकिन अब तो वो नए सिरे से शुरु हो गए हैं।

जो भी समर्थन देने आता है नेताजी उन्ही को गालियां देना शुरु कर देते हैं। राजाराम मील भाजपा को समर्थन देने आए तो उन पर तेल-पानी लेकर चढ़ गए और कहने लगे कि उन्होंने पैर पकड़े तो लाठर डीजीपी बने।

इनको पूछना चाहिए कि आप कौन होते हैं ? डीजीपी बनाने वाले, या तो इनको बताना चाहिए कि अशोक गहलोत के साथ इनकी घालमेल थी। इनकी अशोक गहलोत के पास इतनी सिफारिश चलती थी सरकार में।

मूंडवा पंचायत समिति के सरपंचों के अटके हुए जनहित के बजट को‌ जारी करवाना चाहिए था। इनकी कथनी और करनी में बहुत ज्यादा फर्क है।

डॉ. मिर्धा बोलीं कि बेनीवाल ने उपराष्ट्रपति के बारे में टिप्पणी करी। उनकों पार्टी से तकलीफ है तो अलग बात है, लेकिन अगर हमारे समाज के व्यक्ति को देश में नंबर 2 का पद मिलता है तो उनका आदर करना चाहिए। उनको हल्का भारी नहीं बोलना चाहिए।

वो उपराष्ट्रपति हैं उन्हें सरपंच का चुनाव जीतने की जरुरत नहीं है। हमारी तो शुभकामनाएं हैं कि वो कभी देश के राष्ट्रपति बनें और हमारे समाज का नाम ऊंचा करें।

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