बेबस मां की पुकार : हे भगवान...या तो इकलौते बेटे को बिस्तर से खड़ा कर दे, या हमें भी उठा ले!
सीकर। इसे बदकिस्मती कहे या फिर कुदरत का कहर। पहले पति ने सदमे में जिंदगी की जंग हारी। अब इकलौता बेटा जिंदगी के लिए पिछले पांच साल से मौत से जंग लड़ रहा है। यह दर्दभरी दास्तां है राजस्थान के सीकर जिले की फतेहपुर तहसील के गांव रिणाऊ निवासी गिन्नी देवी की।

बेटे की सेवा कर रही बुजुर्ग मां
जिस उम्र में बेटे को बुजुर्ग मां का सहारा बनना था उस उम्र में मां बेटे की सेवा कर रही है। दिल में दर्द लिए मां भगवान से प्रार्थना कर रही है कि हे भगवान...या तो बेटे को बिस्तर से खड़ा कर दे, या हमें भी उठा ले। गिन्नी देवी के परिवार पर कुदरत का ऐसा कहर टूट पड़ा है कि अब मदद की आस ही एकमात्र सहारा है।

बिस्तर में कट रहे दिन रात
गिन्नी देवी के 27 वर्षीय इकलौते बेटे सुरेन्द्र स्वामी पांच साल पहले पेड़ से गिरने से रीढ़ की हडडी टूट गई थी। हादसे के बाद सुरेन्द्र के आधे शरीर ने काम करना बंद कर दिया। दो साल तक सीकर व जयपुर में इलाज चला। कई ऑपरेशन भी हुए, लेकिन कोई असर नहीं पड़ा। इलाज के लिए लाखों रुपए खर्च हो गए। चलने-फिरने में असक्षम सुरेन्द्र की जिंदगी अब दिनरात बिस्तर पर ही कट रही है। मां गिन्नी देवी दिन रात बेटे की सेवा में लगी रहती है।

अब तक खर्च किए 15 लाख
मां गिन्नी देवी ने बताया कि पति की मौत के बाद परिवार में इकलौटा ही कमाने वाला था। इलाज के लिए लाखों रुपए उधार लिए थे। अब तक 15 लाख रुपए खर्च हो चुके हैं। घर पर बैठे रहने से शरीर में गहरे जख्म हो गए जिन पर मरहम पटटी के लिए रोजाना हजारों रुपए लगते हैं।

लोगों से मदद की आस
अब आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर हो चुकी है कि अब इस परिवार का गुजारा बसर भी नहीं हो रहा। अब परिवार के पास कमाई का कोई जरिया नहीं है। परेशान परिवार समाज और सामाजिक संगठनों व भामाशाहों के सहयोग की अपेक्षा कर रहा है।

पोलर मैन राजीव बिरड़ा की अपील
भारत सरकार के अंटार्कटिका मिशन से लौटे राजीव बिरड़ा गांव रिणाऊ के ही रहने वाले हैं। बिरड़ा ने इस परिवार की आर्थिक मदद की अपील की है। बिरड़ा ने बताया कि दो दिन पहले ही बुजुर्ग व उसके इकलौटे बेटे से मुलाकात की है। जनसहयोग से उनकी आर्थिक मदद करवाने की ठानी है। अधिकारियों, नेताओं और आजमन से अपील करता हूं कि सुरेन्द्र कुमार की आर्थिक मदद करने वाले लोग उनके पंजाब नेशनल बैंक खाता नंबर 0657000103138934 व आईएफएससी-पीयूएनबी 0065700 का इस्तेमाल भी कर सकते हैं।
सदमे में पिता की मौत
उम्र के पड़ाव में पिता डालाराम ने सोचा था कि बेटा परिवार की जिम्मेदारी संभाल लेगा। लेकिन, नियति को कुछ और ही मंजूर था। हादसे के बाद पिता भी पूरी तरह से टूट गए। बेटे की हालत देखकर वे सदमे में चल बसे। हादसे के कुछ समय बाद उनकी हार्ट अटैक से मौत हो गई थी।












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